आम का पेड़ -संजय कुमार गिरि

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15242021_1008182772619509_9032276154050515018_nएक व्यक्ति ने अपने गाँव में एक आम का नन्हा सा पौधा लगाया और गाँव के सभी व्यक्तियों से कहा ये पेड़ बड़ा होगा और हम सभी को इसकी शीतल छाँव मिलेगी ,गाँव के सभी व्यक्तियों ने उस वृक्ष को लगाने में उस व्यक्ति की मद्दत की और सुबह शाम उसमें पानी और खाद दी कुछ दिन वह पोधा कुछ बड़ा हुआ तो लोगो को बहुत ख़ुशी हुई की चलो हमारे मेहनत रंग ला रही है .किन्तु ,गाँव के ही कुछ शराती व्यक्तियों को यह बात कुछ हजम नहीं हो रही थी ..वे आये और उस नन्हे से वृक्ष के नीचे जबरदस्ती बैठने लगे …..अब भला वह नन्न्हा से पोधा उन्हें क्या छाया दे पाता …..वह उस व्यक्ति से जिद्द करने लगे , की आपने तो कहा था की यह वृक्ष हम सभी को छाया देगा कितु यह तो नहीं दे रहा ….तुमने हमें मूर्ख बनाया …..क्यों बनाया भाई …..हमने हजारों वृक्ष देखे हैं सभी हमें छाया देते हैं यह तुम्हारा वृक्ष हमे छाया नहीं दे रहा….तुमने हमारा अपमान क्या है …..हम इस आम के वृक्ष को नहीं रहने देंगे …उखाड़ फेंकेंगे इसे ……उस व्यक्ति ने उन्हें लाख समझाया की भाई अभी यह वृक्ष बहुत छोटा है अभी इसे खाद पानी देना होगा ….इसमें अभी सही से पत्ते भी नहीं आये हैं ……..कृपया आप भी इसे अपना सहयोग दें ……..किन्तु उन्व्यक्तियों को ……तो जैसे उस वृक्ष से ही ईर्षा थी ……..वे किसी भी तरह उसे उखाड़ फैकना चाहते थे ……तभी कुछ बुजुर्ग उस गाँव से जा रहे थे तो उनकी बाते सुन कर रुक गए …और पूरी बात जब उन्हे समझ आ गई तो उन्होंने उस व्यक्ति से कहा भाई दुष्टों का यही कार्य होता है हर शुभ चीज में पहले से ही भिग्न डालना …..आप इनसे किसी भी तरह अपना पीछा छुडाव और इस वृक्ष के खूब सेवा पानी करो …..इसी में पूरे गाँव का भला है …..यह बात उस व्यक्ति के समझ में आ गई और उसने किसी तरह उन दुष्टों से अपना पीछा छुड़ाया और उस आम के वृक्ष के सेवा पूरे तन मन से करने लगा ………और कुछ ही दिनों में वह आम का वृक्ष बहुत बड़े आकार में फ़ैल गया ….जहाँ पूरे गाँव के बुजुर्ग और बच्चे उसकी शीतल छाँव में आकर विश्राम करने लगे ……..इस तरह .उस व्यक्ति की मेहनत सफल हुई 


संजय कुमार गिरि

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