नोटबंदी से जनता है परेशान अभी तक नही निदान- लाल बिहारी लाल

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जनता के हितों की रक्षा सर्वोपरि होना चाहिए

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नई दिल्ली।कालाधन के नाम पर 8 नवंबर 2016 को जब नोटबंदी की शाम में  घोषणा हुई और रात्रि 12 बजे के बाद बंद हो गई। तब स्थिति को 50 दिन में  समान्य होने के की बात प्रधानमंत्री ने कहा था। पर आज 50 दिनों में भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। नोटबंदी के समय कालाधन ,आतंकवाद और नकस्लवाद और जाली नोटों पर अंकुश लगाने की वात कही गई थी पर इन दौरान आतंकवादियों एवं नक्सलियो के पास से भी नई करेंसी बरामद हुई है और बाजार में भी
बहुतायत रुप से जाली नोट पकड़े गये है। इन 50 दिनों में प्रधानमंत्री,वितमंत्री, वित सचिव औऱ रिजर्व बैंक के गवर्नर ने लगभग 59 दफा नये-नये गाइडलाइन जारी किये पर बैंककर्मी को समय पर सूचना नही मिलने से आम जन को काफी
परेशानी हुई। अभी जनता लाइन में लग कर अपनी-अपनी समस्याओं के निदान के लिए प्रयासरत थी इसी बीच कोढ़ में खाज के रुप में कैशलेश की वात शुरु हो गई।यूरोप के अधिकांश देशो में पुरजोर तरीके से 90% तक कैशलेश ट्रांजिकशन
की जाती है पर वहा पर टैक्स के बदले आम जन को सामाजिक सुरक्षा दी जाती है और इनफ्रास्ट्रक्चर भी काफी मजबूत है। पर भारत में अभी यह आकड़ा मात्र 2% है। भारत में 2 लाख ए.टी.एम.मसीन(सेंटर) होने के बावयूद भी काफी
ए.टी.एम काम नहीं कर रहे थे क्योकि नये नोट का साइज अलग है। कुछ काम भी कर रहे थे तो काफी कम रकम निकल पा रही थी जिससें जनता पुनः लाइनों में लगती थी।

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127 करोड़ देश की आबादी में लगभग 75 करोड़ क्रेडिट और डेबिट कार्ड हैं।इनमें 45 करोड़ कार्ड की सक्रियता से इस्तेमाल हुआ है।औऱ 15 हजार भाग्यशाली विजेताओं को पुरस्कृत करने की घोषणा हुई है। 31 दिसंबर 2016 तक सभी डिजीटल टांजीक्शन पर कर में छूट की घोषणा हुई थी पर धीरे –धीरे कर लिया जा रहा है। दिल्ली मैट्रो में ए.टी.एम से भी पेमेंट करने पर लगभग 1% टैक्स लिया जा रहा है। इसी तरह पिछले 30 दिनौं में पेटीएम के 1.5 करोड़ उपभोक्ता
बढ़े है। इस तरह बिना फायदा के कोई एक गिलास पानी नहीं देता फिर ये पेटीएम अपनी सुविधा क्यों देगा। हैरानी की वात तो ये है की पेटीएम के साथ 7 उपभोक्ताओं ने धोखाधड़ी किया जिसका केस सीधे सी.बी.आई ने दर्ज किया है।
इसका साधरण-सा अर्थ है कि किसी ब्यक्ति विशेष का पेटीएम के उपर हाथ है।दूसरी अहम वात ये है की सरकार डिजीटल में भी आधार,यू.पी.आई औऱ यू.एस.एस.डी को प्राथमिकता देने का निर्देश बैंको को दे रही है जबकि देश में
100 करोड़ मोबाइल यूजर्स है जिनमें 30% के पास स्मार्ट फोन है। जब 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा हुई थी तो 500 के 2 करोड़ जल्दबाजी में छप गये जिससें सरकार को 900 करोड़ का घाटा हुआ। और बाजार में 500 और 1000 को बंद नोटों के स्थान पर नये नोट मुहैया कराने के लिए लगभग छपाई पर 10,861 करोड़ रु. खर्च का अनुमान है। 3_1_5x7_अभीतक लगभग 700 छापों और सैकड़ो सर्च में 3590 करोड़  का अघोषित सम्पति(कालाधन) सामने आया है जिसमें 93 करोड़ नये नोट सहित 505 करोड़ के नकदी और ज्वेलरी जब्त की गई है। अब 1 जनवरी,2017 से बैंको में 40,000 निकालने की अनुमति दी गई पर ब्यवहार में संभव नही है क्योंकि अभी भी 24,000 के आदेश पर कोई भी बैंक 4,000 तो कोई 6,000 तो कोई 10,000 से ज्यादा एक मुस्त नही दे पा रही है क्योंकि ज्यादातर बैंकों में मांग के अनुरुप मुद्रा की आपूर्ति हो नही पा रही है। कूल मिला के इस नोटबंदी की वजह से आम जन काफी दुखी औऱ परेशान है।इस दौरान 100 के आसपास लोगो की मौत हो गई। कईयों की शादी नही हो पाई तो कइयो की अर्थी भी सही से नही सज पाई। नोटबंदी कई देशों में कामयाब नहीं रहा चाहे 1982 में घाना में हो, 1987 में म्यनमार में हो ,1991 में रुस में हो या फिर 2010 में उतरी कोरिया में हो भारत में भी स्थिति कमोबेस यही प्रतीत हो रहा है।इसका असर आनेवाले दिनों में 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों में आर्थिक औऱ राजनैतिक असर काफी रोचक रहेगा क्योकि जनता और नेता दोनों एक दुसरे को कितना खुश करने में कामयाब होते हैं इसी के उपर निर्भर करेगा इन 5 राज्यों का चुनाव परिणाम। अब ये देखना है की 1 जनवरी से जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। जिस तरह चौका छ्क्का से मैच जीतने में आसानी होती है पर मैच जीतने के लिए एक- एक रन बनाना जरुरी होता है उसी तरह प्रधानमंत्री को देश चलाने के लिए जमिनी हकीकत से गुजरना होगा औऱ जनता के हितों की रक्षा करनी होगी वरना ये जनता कब उन्हों फकीरी के राह पर धकेल देगी पता भी नहीं चलेगा। तभी तो रोटी फिल्म का यो गीत-यो पब्लिक है सब जानता है…अंदर क्या है बाहर क्या है ये सब पहचानती है…..आज भी काफी लोकप्रिय है।

सचिव लाल कला मंच
नई दिल्ली-

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