पन्नो मे इतिहास के, लिखा स्वयं का नाम -रमेश शर्मा, मुंबई

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पन्नो मे इतिहास के, लिखा स्वयं का नाम ! ramesh-sharma
दो हजार सोलह चला,..यादें छोड तमाम !!
दो हजार सोलह चला, ले कर नोट हजार !
दो हजार के नोट का,. .दे कर के उपहार !!
दो हजार सोलह चला, छोड सभी का साथ !
हमें थमा कर हाथ में,… नये साल का हाथ !!
जाते-जाते दे गया, घाव कई यह साल !
निर्धन हुए अमीर तो, भ्रष्ट हुए कंगाल !!
हो जाए अब तो विदा, कलुषित भ्रष्टाचार !
यही सोचकर हो रही, लम्बी रोज कतार !!
ढेरों मिली बधाइयाँ,……..बेहिसाब संदेश !
मिली धड़ी की सूइंयाँ,ज्यों ही रात “रमेश”!!
मदिरा में डूबे रहे, ……लोग समूची रात !
नये साल की दोस्तों, यह कैसी सुरुआत !!
नये साल की आ गई, नयी नवेली भोर !
मानव पथ पे नाचता, जैसे मन मे मोर !!
नये साल का कीजिये, जोरों से आगाज !
दीवारों पर टांगिये, .नया कलैंडर आज !!
घर में खुशियों का सदा,. भरा रहे भंडार !
यही दुआ नव वर्ष मे,समझो नव उपहार !!
आयेगा नववर्ष में, …..शायद कुछ बदलाव !
यही सोच कर आज फिर, कर लेता हूँ चाव !!
रमेश शर्मा, मुंबई.

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