बेटियों -संजय वर्मा”दृष्टी”

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बेटियों   sanjay-2-2
पढ़- लिख कर नाम कमाओं बेटियों
हक़ की परिभाषा को समझाओ बेटियों
जिंदगी में किसी से न डरो तुम बेटियों
पूजी जाती हो घरो में याद रखो बेटियों

रिश्तों का तुम ही हो आधार बेटियों
मेहंदी धूल खाती तुम न होती बेटियों
स्वरों में हक़ अदा करती तुम बेटियों
श्रृंगार कैसे रचता तुम न होती बेटियों

संसार चल नहीं सकता तुम बिन बेटियों
रक्षा करेंगे हम -सब ये संकल्प है बेटियों
उच्च पदो पर सदा रहो आसीन बेटियों
निडरता की उड़ान भरों तुम सब बेटियों

आंसू न दुलके सबको ऐसा स्नेह दो बेटियों
अपने दम ख़म का तुम बजा दो डंका बेटियों
रोशन हो गावं शहर नाम करो तुम बेटियो
ज्ञान की देवी सदा बनी रहो तुम सब बेटियों

संजय वर्मा”दृष्टी”

मनावर

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