73वां वार्षिक निरंकारी संत समागम – 5, 6, 7 दिसंबर वर्चुअल रूप में

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 निरंकार को मन से जोड़कर जीवन में आती है ‘स्थिरता- सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज

 बरनाला  17 नवम्बर, 2020ः सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के आशीर्वाद से इस वर्ष का 73वां वार्षिक निरंकारी संत समागम वर्चुअल रूप में दिनांक 5, 6, 7 दिसम्बर, 2020 को आयोजित किया जायेगा। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर भारत सरकार द्वारा जारी किए गये दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह संत समागम वर्चुअल रूप में आयोजित किया जायेगा। जिसे विश्वभर के लाखों श्रद्धालु, घर बैठे ऑनलाइन माध्यम द्वारा देख सकेंगे।

बरनाला ब्रांच के संजोयक जीवन गोयल ने बताया कि निरंकारी मिशन के इतिहास में ऐसा प्रथम बार होने जा रहा है कि वार्षिक निरंकारी संत समागम वर्चुअल रूप में आयोजित किया जा रहा है। इस सूचना से समस्त साध संगत में हर्षाल्लास का वातावरण है। संपूर्ण समागम का वर्चुअल प्रसारण मिशन की वेबसाईट पर दिनांक 5, 6, 7 दिसम्बर, 2020 को प्रस्तुत किया जायेगा। इसके अतिरिक्त यह समागम संस्कार टी.वी. चैनल पर तीनों दिन सायं 5.30 से रात्रि 9.00 बजे तक प्रसारित किया जायेगा।

                इस वर्ष निरंकारी समागम का मुख्य विषय ‘स्थिरता है। संत निरंकारी मिशन आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से विश्व में सत्य, प्रेम, एकत्व का संदेश दे रहा है। जिस प्रकार प्रभु परमात्मा स्थिर है और संसार में अन्य सभी कुछ गतिशील, अस्थिर व परिवर्तनशील है तो जो स्थिर है उसके साथ जुड़कर स्थिरता प्राप्त की जा सकती है। आजकल के आधुनिक परिवेश में, जहाँ संसार गतिमान होने के साथ साथ, कहीं ना कहीं अस्थिर भी होता जा रहा हैय मानव मन को आध्यात्मिक रूप से स्थिर होने की परम आवश्यकता है।

              सद्गुरु माता सुदीक्षा जी ने जीवन में स्थिरता को समझाते हुए बताया कि – जिस वृक्ष की जड़ें मजबूत होती है वह हमेशा स्थिर रहता है। तेज हवाएं और आंधियां चाहे कितनी भी हो पर अगर वृक्ष अपने मूल रूप जड़ों से जुड़ाव रखता है तो उसकी स्थिरता बनी रहती है। इसी प्रकार जिस मुनष्य ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके अपना नाता इस मूल रूप निरंकार से सदैव जोडे़ रखा है उसके जीवन में जैसी भी परिस्थितियाँ हों तो वह निरंकार प्रभु का सहारा लेकर स्थिरता को प्राप्त कर लेता है।

                देश-विदेश के निरंकारी सदस्यों को इस वर्चुअल समागम का बेसबरी से इंतजार है और इस परिस्थिति को भी निरंकार प्रभु परमात्मा का हुकुम मानते हुए हर्षाल्लास से स्वीकार कर रहे है।

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