साहित्य विभाग द्वारा 84 वी काव्य गोष्ठी हुई संपन्न

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जिन हाथों ने बंजर धरती को हरियाली सौंपी है |

हर घर के हर आंगन हर पल खुशहाली सौंपी है |

खुद उनको ही रहना होगा कब तक दूर निवालों से ||

आईपैक्स भवन वेलफेयर सोसायटी के साहित्य विभाग द्वारा जनवरी 2011 में आरंभ हुई मासिक काव्य गोष्ठी काव्य परंपरा अपने 7वर्ष पूर्ण कर अगले वर्ष वें वर्ष में प्रवेश करेगीदिसंबर 2017 के प्रथम रविवार को आयोजित 84 वी काव्य गोष्ठी मैं श्रृंगार दर्शन आज के स्वर में श्रोताओं को पल-पल में तालियां बजाने और वाह – वाह  करने के लिए मजबूर कर दिया दोनों युवा कवि संदीप शजर एवं पंकज शर्मा ने अपने काव्य साधना का सुंदर परिचय दिया सर्वप्रथम मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष कवियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया तत्पश्चात 84 में गोष्टी समर्पित थी कवि पत्रकार साहित्यकार स्वर्गीय पाण्डेय बेचेन शर्मा ‘उग्र’ जी का परिचय उनकी काव्य साधना के रूप में कवित्री श्रीमती सुषमा सिंह ने सुधी श्रोताओं से कराया | श्री सुरेश बिंदल ने निमंत्रित कवियों का स्वागत किया |

 काव्य गोष्ठी का आगाज युवा कवि संदीप शज़र ने किया उन्होंने अपनी सस्वर कविताओं ने श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया | श्री संदीप शजर ने अपनी अद्भुत काव्य रचना से किसानों का दर्द प्रस्तुत करते हुए पढ़ा :-

 आँखों का पानी बहता है इन हाथों के छालों से |

मेहनत गिरवी राखी हुई है कैसे बचें दलालों से ||

जिन हाथों ने बंजर धरती को हरियाली सौंपी है |

हर घर के हर आंगन हर पल खुशहाली सौंपी है |

खुद उनको ही रहना होगा कब तक दूर निवालों से ||

श्रृंगार की रचना प्रस्तुत करते हुए उन्होंने पढ़ा :-

 इश्क ये नहीं तो फिर क्या है

मेरा छूना तेरा निखर जाना |

तुझको देखें तो फिर ये लाजिम,

चंद के चेहरे का उतर आना |

श्री संदीप शजर ने देश के शहीदों को काव्य श्रधांजलि अर्पित की  :-

 राखियों के बदले जिनकों बेड़ियाँ अच्छी लगीं |

क्या करें वरमाल का, जब फासियाँ अच्छी लगीं ||

शमा ऐ आजादी की रौशन क्यों न होती जब उन्हें |

तेल सांसों का बदन की बतियाँ अच्छी लगे ||

 सुप्रसिद्ध पत्रकार सो सोरी के लेखक, ओजस्वी कवि पंकज शर्मा ने श्रोताओं को झंझोर कर रह दिया:-

मैं तुम्हारा ही था, मैं तुम्हारा ही हूँ,

हर जनम में तुम्हारा रहूँगा सदा |

फिर नया रंग है, फिर नया रूप है,

मैं वही कृष्ण हूँ, तुम वाही राधिका ||

 गर तुम्हे याद हो, मैं मिला था तुम्हे,

रास के रंग में और वनवास में |

तुम्हे तजकर महल, प्रेम पत्थर चुने,

मैं वही राम हूँ, जिसकी तुम राधिका ||

साहित्य विभाग के संरक्षक डा. गोविन्द व्यास, चेयरमैन श्री सुशील गोयल,  प्रधान श्री सुरेश बिंदल,  सलाहकार श्री राजेश चेतन, महामंत्री श्री प्रमोद अग्रवाल, पिछले 7 वर्षों के काव्य परंपरा के आयोजन में अपना पूर्ण सहयोग दे रहे है |

84 विन काव्य गोष्ठी में अनेक शायर, कवि व समाज सेवी उपस्थित थे | काव्य परम्परा के प्रधान, संस्कार भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश बिंदल ने घोषणा की कि जनवरी 2018 में हम जन्मदिन काव्य गोष्ठी का आयोजन करेंगे |

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