आज कुछ अच्छा लिखूंगा

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अपनी कलम की धार से
उफनते विचारों की ललकार से।
सहज-सरल न कुछ सच्चा लिखूंगा
आज कुछ मैं अच्छा लिखूंगा।।
भूखे जन की भूख नहीं
देश में मची कोई लूट नहीं।
किसी अबला का चित्कार नहीं
बेरोजगारों को दुत्कार नहीं।
बस आज सब कच्चा लिखूंगा
आज कुछ मैं अच्छा लिखूंगा।।
मरती दुनिया मर जाये
नफरत की नदियां बह जाये।
भ्रष्टाचार फले-फूले
आतंक की गोद में ये जहां झुले।
पर मैं ना आज कोई चर्चा लिखूंगा
आज कुछ मैं अच्छा लिखूंगा।
बस आज मैं अच्छा लिखूंगा।।

                                             मुकेश सिंह
          सिलापथार,असम

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