आज पुराने साथी मिल गए -शिवाँश भारद्वाज

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कविता

आज पुराने साथी मिल गए  14632808_183558312097994_6315526620738608315_n
एक चेहरे मे कई चहरे मिल गए
लिखने बैठा कविता तो कुछ
मुझे नए अल्फ़ाज़ मिल गए
आज पुराने साथी …

ज़िन्दगी की राहों में हमसफ़र मिल गए
राहों में पत्थर को कही फ़ूल मिल गए
बैठे बैठे हमे याद आया था उनके बारे में
हमे खोये हुये साथियो के पते मिल गए
आज पुराने साथी मिल गए

चलते चलते हमे लगे पुराने इश्तियार दिख गए
उन्हें देखकर दिलो में हज़ार फूल खिल गए
घर के पुराने समानो में वे पुराने वरक़
हमे उन पन्नों में साथियो के नाम मिल गए
आज पुराने साथी मिल गए

मन में ख़ार थे फिर फ़ूल मिले
दुश्मनों के बाद दोस्त मिल गए
आज पुराने साथी मिल गए

शिवाँश भारद्वाज
दिल्ली

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