आज से प्यारी कलम तेरे होठों पर-अशोक सपड़ा

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आज से प्यारी कलम तेरे होठों पर हो वीरों की कहानी
अशोक चन्दू चाणक्य के किस्से हो हर पल तेरी जुबानी fb_img_1482336680085

जो नफरत घोल रहें उनको उल्फत सिखा देना तू प्यारी
सोन चिरैया था मेरा देश सर्वोच्च सपनें भी थे आसमानी

अस्मत की हिफाजत की खातिर कर देती पद्मणियां जौहर
लाखो डर से विजय पाकर लक्ष्मी चलाती तलवार तूफानी

भगत सुखी राज वन्दे मातरम् कह चूम फांसी चढ़ जाते हो
आर्यभट्ट से लेकर महान हो देश के कलाम जैसे विज्ञानी

कल्पना से ऊँची उड़ान हर कोई भरना चाहता हो यहाँ पे
पत्थर फ़ेंक कर वीरोँ ने आसमाँ में छेद की जब हो ठानी

नक्शा मेरे प्यारे भारत का कहता इंसानियत हो जिंदाबाद
उड़ान ऊँची भरके देखों हिन्द नक्श से लगता पूरा इंसानी

मेरी प्यारी कलम विश्वास कर तू इस जहां में नहीं कोई भी
फक्त तीर तरकश में हमारे जो गर्व से कहें हम हिन्दुस्तानी

अशोक सपड़ा की कलम से दिल्ली से

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