अच्छे दिन आने वाले हैं…

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अच्छे दिन आने वाले हैं ऐसे स्वप्न सजाये थे,
छाँट बीनकर कई नमूने राजनीति में लाये थे,

धर्म सनातन के हर पहलू राजनीति से जोड़े थे,
हिन्दू हित के तीर गाय गंगा पर रखके छोड़े थे,

मंदिर मंदिर गए महंतों के चरणों में लेटे थे,
आप हमारे घर आँगन के सारे दर्द समेटे थे,

एक बड़ी उम्मीद जगी थी हर हिन्दू के सीने में,
लगता था आनन्द मिलेगा स्वाभिमान से जीने में,

जितने अच्छे काम किये हैं श्रेय सभी के ले लो तुम,
आत्मसमर्पण के मुद्दों पर बाण हमारे झेलो तुम,

क्योंकि ये है धर्म हमारा ये कोई व्यापार नहीं है,
खुद्दारी की कलम कहीं भी झुकने को तैयार नहीं है,

राष्ट्रधर्म को बेंच कवी जो सत्ता के गुण गायेगा,
दोनों बड़े शूरमा हैं ये दर्पण कौन दिखायेगा,

सत्ता सुख की चाह नहीं हम धर्म बचाने वाले हैं,
भ्रमित हुए योद्धाओं का हम कर्म बताने वाले हैं,

धर्म बेंचकर वोटबैंक का क्या मैं धंधा हो जाऊं,
चापलूस मक्कार बनूँ बोलो क्या अँधा हो जाऊं,

आज डासना पीठ मुझे चित्तौड़ दिखाई देता है,
खिलजी वाले षड्यंत्रों का दौर दिखाई देता है,

एक दरोगा मामूली सा शिव भक्तों पर ऐंठ गया,
जिनके कारण जली पद्मिनी उसी गोद में बैठ गया,

क्या होगा अंजाम भागवत जी विवेक से सोचो तुम,
बोलोगे क्या बहन बेटियाँ घर में घुसकर नोचो तुम,

जनरल साहब जरा बताओ ऐसी क्या लाचारी है ?
क्या डायर जनरल बनने की तुमने की तैयारी है ?

धर्म सनातन के मूलों को सत्ता पाकर भूल गए,
नरसिंह गर्जना मौन कराने की साजिस में झूल गए,

आज मुसलमां हद से ज्यादा तुमको प्यारे लगते हैं,
अंधभक्ति में एक वही आँखों के तारे लगते हैं,

तुम योद्धा हो शूरवीर हो धर्म सनातन वाले हो,
हिन्दू माँ के बेटे पहले भगवा के रखवाले हो,

इसीलिए तुम साथ हमारे रजपूती हुंकार भरो,
गद्दारों की छाती से तुम टकराकर टंकार करो,

इतिहासों के पन्नों में भी अच्छा नाम कमाओगे,
साथ धर्म का दोगे यदि दौलत से तोले जाओगे,

वर्ना अगली पीढ़ी तुमको जिन्ना सा धिक्कारेगी,
जिनको अपना समझ रहे हो वो भी जूते मारेगी,

ये मरकर भी अमर रहेंगे लेकिन तुम पिट जाओगे,
कांग्रेस की तरह भाजपा वालों तुम मिट जाओगे,

कवि ‘चेतन’ नितिन खरे
महोबा, बुन्देलखण्ड

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