एंटरटेनमेंट के साथ सोचने व सीखने का मौका देगी ‘द मैसेज’

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एंटरटेनमेंट के साथ सोचने व सीखने का मौका देगी ‘द मैसेज’
  • अभिनेता राहुल रॉय बने निर्माता, द ग्रेट एंटरटेनमेंट बैनर तले पहली फिल्म की घोषणा की।
  • सिनेमा सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यमः नरेन्द्र झा।
  • पहली कार्बन न्यूट्रल फिल्म होगी द मैसेज।
Vierendrra Lalit, Rahul Roy, Narendra Jha, Shyam Ramsey, Prasun Kumar
नई दिल्ली, 17 फरवरी 2017; सिनेमा एक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। हम ऐसे समय से गुज़र रहे हैं, ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं, जिस दौर में लोगों का विश्वास कहीं न कहीं से डगमगा रहा है, सिस्टम से, आम दिनों की चीजों से। ऐसे में ‘द मैसेज’ एक तरह का प्रयास है जिसके माध्यम से हम आमजन के खोते उस विश्वास को पुर्नस्थापित करने का प्रयास करेंगे। यह बात कहते हुए सकारात्मक सोच के साथ कलाकार नरेन्द्र झा ने सहज सोच-विचार के साथ आये राहुल रॉय व प्रसून कुमार के प्रोडक्शन हाउस ‘द ग्रेट एंटरटेनमेंट’ एवम् बैनर की पहली फिल्म के मुहर्त कार्यक्रम की शुरूआत की।
दिल्ली के सिरीफोर्ट सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में 90 के दशक की सुपरहिट फिल्म आशिकी से धमाल मचाने वाले अभिनेता राहुल रॉय, निर्देशक विरेन्द्र ललित, राइटर प्रोड्यूसर प्रसून कुमार, नवोदित अभिनेत्रा त्रिविक्रम मट्टू, प्रोड्यूसर श्याम रामसे आदि सहित टीम के अन्य लोग भी उपस्थित थे।
मौके पर फिल्म ‘द मैसज’ के औपचारिक विमोचन की घोषणा के साथ-साथ इसका पहला पोस्टर भी जारी किया गया। मंच पर मौजूद राहुल रॉय ने बताया कि मुझे इंडस्ट्री में 27 साल हो गये हैं, यहां बहुत कुछ जाना है, सीखा है और इन्हीं अनुभवों के आधार पर कोशिश की है कि एक अच्छे सब्जेक्ट पर फिल्म लायें। आजकल हम जैसे फिल्मों में देख सकते हैं कि फिल्म और इसके विषय में एंटरटेनमेंट के साथ-साथ सीखने का पक्ष होना चाहिए। ऐसे में फिल्म के माध्यम से यदि जाने अनजाने में दर्शकों को मैसेज़ मिले या कुछ ऐसा देखने को मिले जो सोचने पर  मजबूर करे। हालांकि हमारे बीच बहुत से मुद्दे जो है जब सामने आते हैं तो सोचने पर मजबूर करता है ऐसी ही फिल्म है ‘द मैसेज’। अपने बैनर ‘द ग्रेट एंटरटेनमेंट’ के अन्तर्गत हमारा प्रयास लीक से हटकर फिल्में बनाने का रहेगा जहां एंटरटेनमेंट के साथ-साथ ऐसे पहलू हो जो गद्गद् करे, भावुक भी करे, प्रभावित करें और सोचने पर मजबूर करे।
फिल्म के विषय में ज्यादा जानकारी न देते हुए प्रसून कुमार ने कहा कि मैंने अपनी सोच को, अपने दिल की चाहत को और कुछ ऐसी बातें जो मुझे महसूस हो रही थी, झकझोर रही थी। समाज में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, उसको लेकर एक मैसेज आये इस विषय में दिल से सोचा और द मैसेज की रूपरेखा तैयार हुई और रूपहले पर्दे पर इस उतारने के लिए प्रयास शुरू हुए कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गयीं और आज हम आपके सामने हैं एक नई सोच, विचार-धारा के साथ। उम्मीद करते हैं कि इसके माध्यम से हम आम लोगों को जोड़ पायेंगे, उन्हें सोचने पर मजबूर करते हुए आगे बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि फिल्म मार्च से फ्लोर पर जायेगी और उम्मीद है कि हम इसी वर्ष रिलीज भी करेंगे।Vierendrra Lalit, Rahul Roy, Narendra Jha, Prasun Kumar, Trivikram Mattoo
नरेन्द्र झा, एक सशक्त आवाज़ व बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार हैं। चाहे थियेटर हो, छोटा पर्दा हो या बड़ा पर्दा, नरेन्द्र को हमेशा एक नये अतवार में देखा गया है। उन्होंने डार्क भूमिका, ग्रे शेड, संजीदा व सशक्त किरदारों को बखूबी निभाया है और दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुए हैं। नरेन्द्र ने कहा कि जैसा कि मैंने बताया मुझे लगता है सिनेमा सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम है, यहां सिनेमा व कलाकार लोगों को प्रभावित करते हैं और इस फिल्म से हमारा प्रयास स्ट्रांग मैसेज देने का है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होगा कि इसकी कहानी टीच करेगी लेकिन कहानी का ताना बाना कुछ इस तरह से बुना है, जिसके माध्यम से लोगों का विश्वास हमारे सिस्टम व सुपरविजन, डे टू डे गतिविधियों की तरफ पुर्नस्थापित हो।
डायरेक्टर विरेन्द्र ललित ने बताया कि फिल्म को लेकर काफी साझा हुआ है मैं दो पक्षों पर प्रकाश डालूंगा कि यह पहली फिल्म कार्बन  न्यूट्रल फिल्म रहेगी। जहां फिल्म बनने के दौरान जो भी कार्बन एमिशन होगा, उसके आधार पर हम वृक्षारोपण करेंगे जिससे पर्यावरण हित में काम होगा। इसके अलावा हमने तय किया है कि इस फिल्म से जो भी प्रोफिट होगा, उसका लगभग 5 फीसदी हम आर्मी परिवार की विडो को देंगे।
त्रिविक्रम ने कहा आज की पीढी को एक चीज या भावना बहुत दूर जा रही है वह है देशभक्ति। मैं स्वयं युवा हूं तो मेरा मानना है कि युवाओं को फिल्म देखने के बाद देशभक्ति की भावना जागृत होगी। त्रिविक्रम ने इन पंक्तियों के साथ कार्यक्रम को विराम दिया – ‘‘बुझी शमा जल सकती है हवा रूख बदल सकती है, मायूस न हो इरादा कर बुलंद, तकदीर किसी वक्त भी बदल सकती है।’

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