एड्स का जागरुकता ही बचाव है- लाल बिहारी लाल

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लाल बिहारी लाल

लगभग 200-300 साल पहले इस दुनिया मेंमानवों में एड्स का नामोनिशान तक नही था। यह सिर्फ अफ्रीकी महादेश में पाए जानेवाले एक विशेष प्रजाति के बंदर में पाया जाता था । इसे कुदरत के अनमोल करिश्मा ही कहे किउनके जीवन पर इसका कोई प्रभाव नही पडता था। वे सामान्य जीवन जी रहे थे।

ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले एक अफ्रीकी युवती इस वंदर से अप्राकृतिकयौन संबंध स्थापित की और वह एड्स का शिकार हो गई क्योंकि अफ्रीका में सेक्स कुछखुला है , फिर उसयुवती ने अन्य कईयोंसे यौन संबंध वनायी और कईयों ने कईयों से इस तरह तरह एक चैन चला और अफ्रीका महादेशसे शुरु हुआ यह एड्स की विमारी आज पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले चुकी है। आजपूरी दुनिया में 40 मिलियन के आसपास एच.आई.वी. पोजिटीभ है ।इनमें से 25 मिलियन तोडिटेक्ट हो चुके हैं। जिसमें से सिर्फ अमेरिका मेही 1 मिलियन इस रोग से प्रभावित लोग हैं। हाल ही मे जारी संयुक्तराष्ट्रसंघ की ताजा रिपोर्ट के अनुसारएच.आई.वी. से प्रतिदिन 6,800 लोग संक्रमित होते हैं। तथा कम से कम 5,700 लोग एड्सके कारण मौत को गले लगा रहे हैं।

भारत में कुछ मशहूर रेड लाइट एरिया–मुम्बई,सोना गाछी (कोलकाता), वनारस, चतुर्भुजस्थान(मुज्जफरपुर), मेरठएवं सहारनपुर आदि है। उनमें कुछ साल पहले तक तो सबसे ज्यादा सेक्स वर्कर मुम्बईमें इस एड्स रोग से प्रभावित थे पर आज एड्स से सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्स कर्मीलुधियाना में है । राज्यो की बात करे तो सर्वाधिक महाराष्ट्रमें है. इसके बाद दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश है।

इस विमारी के फैलने का मुख्य कारण (80-85प्रतिशत) असुरक्षित यौन संबंध -ब्यभिचारियों, बेश्याओं,वेश्यागामियों एंवहोमोसेक्सुअल है।इसके अलावे संक्रमित सुई के इस्तेमाल किसी अन्य के साथ करने,संक्रमित रक्त चढानेआदी के द्वारा ही फैलता हैं। इस विमारी के चपेट में आने पर एम्यूनी डिफेसियेसी(रोगप्रतिरोधक क्षमता) कम हो जाती है।जिससे मानव काल के ग्रास की ओर बहुत ही तेजी सेबढ़ता है। औऱ अपने साथी से यौन संबंध बनाने के समय सुरक्षित होने के लिए कंडोम काप्रयोग अवश्य करें। सन 1981 में इसके खोजके बाद अभी तक 30 करोड़ से ज्यादा लोग काल के ग्रास में पूरी दुनिया में समा चुकेहैं।

इसके लक्षणोंमें मुख्य रुप से लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया,जीभ/मूँह पर सफेदधब्बे,,सुखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदी प्रमुख हैं।इस बिमारी को फैलने में भारत के ग्रामिण इलाके में गरावी रेखा से नीचे ,अशिक्षा,रुढीवादिता ,महँगाई और बढती हुई खाद्यानों के दामों के कारण पापी पेट के लिए इस कृत(पाप) को करने पर उतारु होना पड़ता है। इससे बचने के लिए सुरक्षा कवच के रुप मेंकंडोम का उपयोग एवं साथी के साथ ही यौन संबंध बनाये रखना ही सवोर्चम उपाय है ।दुनिया में 186 देशों में मिले आकड़ो परआधारित एच.आई.वी./एड्स ग्लोबल रिपोर्ट-2012 के मुताबिक भारत में 2001 से 2011 केमुकाबले नए मरीजो की संख्या में 25% की कमी आई है। 40-50% मरीजों को एंटी रेटरोवायरल दवायें उपलब्ध है।लेकिन अभी भी विश्व में इसका खतरा टला नहींहै। वर्ष 2011 में 20.5 करोड़ लोग इसके शिकारहुए हैं। जबकि 50% की कमी आई है। 2005 से 2011 के बीच पूरी दुनिया में 24%कम मौत दर्ज की गई है। अच्छी बात है पर भी भी इसके लिए जागरुकता कीसख्त जरुरत है।पिछले दिनों जाररुकता के दौरान ये बाते सामने आई है कि होमियोपैथीमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने की कई दवायेंहै जिसके उपयोग से ज्यादा दिन तक रोगी सर्वाइभ कर सकता हैं। साथ ही साथ योग के बलपर एवं हरी शाक्सब्जी के दम पर ज्यादा दिन तक जी सकता हैं। इसी क्रम में आम जन कोजागरुक करने के उद्देश्य से हर साल 1988से 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाते आ रहे है।

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