अनवर जलालपुरी- एक शख़्सियत

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shivansh

चाहे तो मिरी आँखों को आईना बना लो

देखो तुम्हें ऐसा कोई दर्पन न मिलेगा
न जाने क्यूँ अधूरी ही मुझे तस्वीर जचती हैं
मैं काग़ज़ हाथ में लेकर फ़क़त चेहरा बनाता हूँ
वो जिस को पढ़ता नही कोई बोलते सब हैं
जनाब-ए-“मीर” भी कैसी ज़बान छोड़ गए
ऐसे ही खूबसूरत शे’र कहने वाले ज़िंदादिल शख़्सियत,मशहूर शायर स्व. अनवर जलालपुरी जी को गये आज ( 2 फरवरी 2019) को एक बरस बीत गया हैं । आज ही के दिन सूचना मिली थी कि उर्दू अदब की एक बड़ी शख़्सियत शायर अनवर जलालपुरी जिन्हें हिंदी वाले भी अपना मानते थे,हमारे बीच नही रहे।
        6 जुलाई 1947 को जलालपुर,अम्बेडकर नगर,उत्तर प्रदेश में जन्मे अनवर जलालपुरी जी दुनिया भर में अपनी निज़ामत के लिए थे मशहूर थे तो एक अच्छे शायर की हैसियत के लिए भी।
         अनवर जलालपुरी जी का लहज़ा बहुत खूबसूरत था। मैंने उन्हें कभी रू-ब-रू देखा नही लेकिन youtube पर उनकी निज़ामत सुनी हैं, internet से उनके शे’र पढे हैं। उनका अंदाज़ उनकी गुफ्तगू उनके बात करने का अंदाज़ सभी अच्छी लगती थी।
         मैंने उनके ज़्यादातर कवि सम्मेलन और मुशायरे youtube के जरिए देखे और सुने हैं। मैं चाहता था कि मुझे कभी ये मौका मिले कि उन्हें अपने कुछ शे’र सुना पाऊ लेकिन ऐसा न हो सका, मेरी ये ख़्वाहिश मुक़म्मल न हो सकी कि मैं रू-ब-रू उन्हें देख सकूँ ,उनसे मिल पाऊ।
         आज से एक बरस पहले हमने हिंदी और उर्दू अदब के एक अच्छे व बड़े शायर को खो दिया।राहरौ से रहनुमा तक(2012),उर्दू शायरी में गीता(2013),उर्दू शायरी में गीतांजली(2014) उनकी कुछ प्रमुख कृतियाँ रही।उन्होंने “अकबर-द ग्रेट” धारावाहिक के संवाद भी लिखे।उन्हें कई अवार्ड से भी नवाज़ा गया।
          अनवर जलालपुरी साहब के शे’र,उनकी बातें हमेशा हमें प्रेरणा देती रहेंगी।
शिवाँश भारद्वाज

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