धारा 370 और 35 A खत्म किये जाने के ऐतिहासिक निर्णय पर नवीन कविता-

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जिसके होने से अपना घर पराधीन सा लगता था,
हिन्दोस्तां का भाल मगर वो पाक चीन सा लगता था,

जिसके कारण नई नई आतंकी पौधें पलती थीं,
जिसके कारण वहां आंधियां अलगावों की चलती थीं,

जिसके कारण सेना पर पत्थर बरसाये जाते थे,
जिसके कारण घुसपैठी दामाद बनाये जाते थे,

जिसके कारण सबसे अलग विधान वहां का होता था,
हिन्दोस्तां से भिन्न एक संविधान वहां का होता था,

जिसके कारण केशर क्यारी वर्षों तक बर्बाद रही,
सरकारें जो भी आयीं वो देती पानी खाद रहीं,

ध्वजा भिन्न कानून भिन्न अधिकार भिन्न ही होते थे,
कितना भी दो प्रेम मगर उद्गार भिन्न ही होते थे,

सुप्रीमकोर्ट की शक्ति जिसके कारण होती बौनी थी,
जो भी उत्तरदायी हो पर साजिश बहुत घिनौनी थी,

दशकों से ये लोट रही थी नागिन बनकर छाती में,
तभी सर्जिकल आवश्यक थी अपने घर की माटी में,

नहीं हौसला दिखलाया न इन्हें कभी भी दण्ड दिया,
तब जाकर के शाह और मोदी ने तेज प्रचण्ड किया,

उनको केशर की क्यारी को फिरसे पावन करना था,
उनको कश्मीरी जनमानस के कष्टों को हरना था,

उनको विस्थापित कश्मीरी पण्डित वहां बसाने थे,
मरहम उनपे देना था जो दशकों घाव पुराने थे,

ये निर्णय पूरी घाटी का मोल बदलने वाला है,
लिखकर के इतिहास नया भूगोल बदलने वाला है,

मोदी जी के अश्वमेघ का घोड़ा नहीं रुकेगा अब,
शाह दूसरा लौहपुरुष है रंच मात्र न झुकेगा अब,

राष्ट्रभक्त जनता सारी है साथ तुम्हारे मोदी जी,
अक्षत रोली चन्दन रखती माथ तुम्हारे मोदी जी,

आज मुखर्जी के सपनों का काश्मीर आबाद हुआ,
गद्दारों की छाती चढ़कर भारत जिंदाबाद हुआ,

रातों में कविताएं लिखकर हमने तुम्हें जगाया है,
इसी भाजपा को तो हमने हंसकर गले लगाया है,

ऐसे काम करोगे मोदी स्वर्णिम नाम कमाओगे,
इतिहासों के नील गगन में ध्रुव तारा हो जाओगे,

कवि चेतन’ नितिन खरे
महोबा, बुन्देलखण्ड

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