DPL द्वारा बाल दिवस के उपलक्ष्य में “नई शिक्षा नीति: बाल शिक्षा एवं पुस्तकालयों का महत्व” संगोष्ठी

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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा दिनांक 12 नवम्बर 2020 को बाल दिवस के उपलक्ष्य में “नई शिक्षा नीति: बाल शिक्षा एवं पुस्तकालयों का महत्व” विषय पर वेबिनार द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया । डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा कार्यक्रम की अध्यक्षता की गई तथा वक्ता के रूप में डॉ. वेद प्रकाश, सहायक प्राध्यापक, हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं डॉ. संजीव कुमार शर्मा, पुस्तकालयाध्यक्ष, राजधानी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय उपस्थित रहे । सुश्री नीरू द्वारा सरस्वती वंदना से वेबिनार का आरम्भ किया गया I


डॉ. वेद प्रकाश ने अपने वक्तव्य के द्वारा नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार में चर्चा कर श्रोताओं का ज्ञानवर्धन किया I नई शिक्षा नीति से श्रोताओं को रूबरू करवाते हुए कहा कि यह शिक्षा नीति पूरे देश की आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करने वाली,  युवाओं को केन्द्रित कर उनके उज्जवल भविष्य हेतु नींव रखने वाली तथा देश के आधारभूत ढांचे को मज़बूत करने वाली है I आज के समय में समूचा विश्व तेज़ी से आगे बढ़ते जा रहा है ऐसे में इस शिक्षा नीति में शिक्षा के सतत विकास एवं सर्वव्यापी प्रसार हेतु यंत्र अधिगम, डेटा विश्लेषण समता, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस जैसे विभिन्न आयामों को लेकर यह नई शिक्षा नीति की रचना की गयी है  I रोज़गार आज के समय में  वैश्विक समस्या है I अतः यह शिक्षा नीति प्राचीन एवं नवीन ज्ञान का समन्वय करते हुए कौशल विकास पर बल देने वाली है, जिससे नए रोज़गार आयाम खुलेंगे I इसमें प्रावधान है कि छात्र न केवल साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स तक सीमित ज्ञान अर्जित करें बल्कि विविध ज्ञान के विषयों को सीखते, कौशल विकास करते हुए नए भारत की नींव रखें I उन्होंने कहा कि बाल दिवस के अवसर पर हमें बच्चों को शिक्षित, विकसित करने हेतु क्रियाशील होने की आवश्यकता है I बाल शिक्षा पर पुस्तकालयों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकालय जल स्रोतों के समान पुस्तकों को आने वाली कई पीढ़ियों के लिए संग्रहित कर ज्ञान का संरक्षण तथा संचार करते हैं I साथ ही उन्होंने शिक्षा एवं पुस्तकों को जन-जन तक पहुँचाने हेतु दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के बारे में बताया I

डॉ. संजीव कुमार शर्मा द्वारा मनुष्य के सम्पूर्ण विकास में पुस्तकालयों के महत्व को विस्तार में समझाया गया I उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति में भी पुस्तकालयों के महत्व को समझते हुए अन्य विषयों के साथ-साथ छात्रों को पुस्तकालयों की भूमिका को समझाने एवं उनका प्रयोग सिखाने हेतु विशेष प्रावधान रखे गए हैं I पुस्तकालय ज्ञान को संरक्षित रखने में एक विशेष भूमिका निभाते हैं ताकि ज्ञान जन्म जन्मान्तर तक उपलब्ध रहे I उन्होंने कहा कि सार्वजानिक पुस्तकालय सामान्य जन समूह हेतु विद्यालयों की भूमिका निभाते हुए पुस्तकों में समाहित ज्ञान को जन-जन हेतु उपलब्ध करवाते हैं I नई शिक्षा नीति में समय के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने हेतु तकनीकी शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है ताकि तकनीक का सही उपयोग करते हुए सम्पूर्ण रूप से एक विकसित राष्ट्र का निर्माण किया जा सके I उन्होंने सामान्य जन जीवन से उदाहरण देते हुए बताया कि एक सभ्य नागरिक बनने में भी पुस्तकालय विशेष भूमिका निभाते हैं I
 
डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा संगोष्ठी में उपस्थित सभी गणमान्य जनों एवं श्रोताओं का अभिनन्दन करते हुए अपने वक्तव्य का प्रारंभ किया I उन्होंने श्रोताओं को बताया कि पिछले कई वर्षों से भारतवर्ष में तीव्रता से पश्चिमी, सुविधाभोगी संस्कृति फैलती जा रही है जिसके कारण भारतीय संस्कृति विलुप्त सी होती जा रही थी I बच्चों में नैतिक जीवन मूल्य लुप्त होते जा रहे हैं I नई शिक्षा नीति में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म,भाषाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है I उन्होंने महापुरुषों द्वारा शिक्षा एवं संस्कृति के विकास हेतु किये गए योगदान पर प्रकाश डाला I नई शिक्षा नीति युवाओं को अपनी संस्कृति का सम्मान करते हुए आधुनिक तकनीति का उपयोग कर कौशलता को प्राप्त कर राष्ट्र के सतत विकास हेतु कार्य करने हेतु तैयार करने का कार्य करेगी I अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने पुस्तकालय कर्मचारियों को उच्चतम पुस्तकालय सेवाएं प्रदान करते हुए पाठकों की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु सदैव क्रियाशील रहने का आवाहन किया I

श्री आर. के. मीना, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा धन्यवाद  ज्ञापन दिया गया तथा अंत में राष्ट्र ज्ञान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

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