दलित और पीड़ित जनता के ह्रदय सम्राट :- बाबा साहब अम्बेडकर

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6 दिसम्बर ( महापरिनिर्वाण दिवस )   – राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
   हमारे देश के महान विधिवेत्ता,अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ,समाज सुधारक,दलित समाज,मजदूर वर्ग,महिलाओं के प्रति सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने वाले बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का 6 दिसम्बर 1956 को निधन हुआ था। सारा देश शोकमग्न हो गया था। उनके इस दिन को प्रतिवर्ष महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
   भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि अम्बेडकर जी का राष्ट्र के प्रति योगदान बहुमूल्य और उल्लेखनीय है।उनकी सोच आदर्श समानता पर आधारित समाज बनाने में मार्गदर्शन हैं। बाबा साहब दलित और सताए गए लोगों की आवाज़ थे।
   समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में हमारा मार्गदर्शन करने वाले अम्बेडकर जी द्वारा लिखित संविधान है।  हमारे देश का संविधान हमारा राष्ट्रग्रंथ है। सबसे बड़ा विशाल संविधान। दुनियां का सबसे बड़ा संविधान भारत का है जिसे तैयार किया बाबा साहब ने। स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री थे अम्बेडकर थे।
    14 अप्रैल 1891 अंबावडे महू मध्यप्रदेश में अम्बेडकर जी का जन्म हुआ था। इनके बचपन का नाम रामजी सकपाल था। इनके पिता का नाम राम जी मालाजी सकपाल था। माता का नाम भीमा बाई था। ये अपने पिता की चोदवे पुत्र थे।इनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना मऊ छावनी में नोकरी करते थे। 1894 में इनकी पेंशन होने के बाद इनकी माता का दो वर्ष बाद निधन हो गया था। बाबा साहब की देखभाल इनके इनकी चाची जी ने की थी।
इनका जन्म महार जाति में हुआ था। उस समय महार जाति को अछूत,दलित या सबसे निचले वर्ग की माना जाता था।
   उस समय छुआछूत का बोलबाला था। बाबा साहब ने बचपन में ही आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव देखा। उत्तम और दलित जातियों के मध्य भेदभाव देखा। उन्होंने बचपन से ही प्रण किया कि मुझे आगे जाकर समतामूलक समाज की स्थापना करना होगा जहां सभी धर्म सभी जातियों का सम्मान हो।
  बाबा साहब के गुरुजी एक ब्राह्मण शिक्षक महादेव अम्बेडकर थे। इन्होंने इनका नाम सकपाल से अम्बेडकर किया। अंबावडे गाँव के नाम से बाबा साहब का नाम गुरुजी ने रखा और फिर वह बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
   बाबा साहब की शिक्षा मुम्बई विश्वविद्यालय, भारत,कोलंबिया विश्वविद्यालय,लन्दन यू. के. विश्वविद्यालय,बर्लिन जर्मनी विश्वविद्यालय,लन्दन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स यू .के. में शिक्षा प्राप्त की। बाबा साहब अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे। जिन्होंने विधि,अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान,के शोध कार्य में ख्याति अर्जित की। इन्होंने वकालात भी की। अम्बेडकर भारत के उस समय के एक ऐसे राजनेता थे जिन्होंने 32 डिग्रियाँ अर्जित की थी। बी ए, एम ए, पी एच डी, एम एस सी, डी एस सी, एल एल डि, आदि। बाबा साहब ने  गांव को वर्णव्यवस्था की प्रयोगशाला कहा। उन्होंने अपने जीवन में गरीबी देखी इसीलिए वे गरीबों का दर्द समझते थे। 1906 में इनका विवाह रमा बाई से हुआ था। इन्होंने कुली का भी काम किया। इनके लेख दी आनहिलेशन ऑफ कास्ट में संकलित हैं।
   इतिहास की तारीखों पर नज़र डालें तो 29 अगस्त 1947 को अम्बेडकर भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाये गए। 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया। 8 अगस्त 1930 को शोषित वर्ग सम्मेलन में बाबा साहब ने अपनी राजनेतिक दृष्टि को सारे संसार के सामने रखते हुए अपने विशेष संबोधन में कहा था”शोषित वर्ग की सुरक्षा उसकी सरकार और कॉंग्रेस दोनों से स्वतंत्र होने में है।
 1956 में पांच लाख साथियों के साथ बाबा साहब ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। यह बाबा साहब का सबसे बड़ा चमत्कार माना गया। उन्होंने तीन रत्न ग्रहण किये। पंचशील को जीवन में अपना लिया।यह शुभ दिवस था अशोक विजयादशमी। अब हिन्दू धर्म से बाबा साहब बौद्ध हो गए थे।
  बाबा साहब एक साहसी लेखक, ग्रंथकर्ता थे। उनके द्वारा लिखित सुबोध साहित्य में उनकी असामान्य विद्धता,दूरदर्शिता देखी जा सकती है। उनके निजी पुस्तकालय में लगभग पचास हज़ार पुस्तकें थी। चिंतक,लेखक, थे बाबा साहब। 6 भारतीय भाषाओं हिंदी , मराठी ,गुजराती, पाली ,संस्कृत के साथ 6 विदेशी भाषाओं जर्मन,फ़ारसी,फ्रेंच,बंगाली, सहित अन्य भाषाओं के ज्ञाता थे। उन्होंने लेख,निबंध,लिखे। उनके भाषण बहुत प्रभावी हुआ करते थे।
 अम्बेडकर जी ने हमें बड़ा ही सरल मार्ग,सीधा व सच्चा पथ बताया ।आज हम सबको मिलकर अम्बेडकर जी के सपने को उनकी अभिलाषा को पूरा करने का दायित्व निभाने महत्ती जिम्मेदारी मिली है।
  बाबा साहब को 1990 में भारत रत्न मरणोपरांत दिया था। आओ आज उनके महानिर्वाण दिवस को मनाएँ।
    “दलितों के मसीहा की जय हो।
    पीड़ित जन के हरि की जय हो।।”
  राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”

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