’राजकुमार जैन राजन फाउण्डेशन’ द्वारा 12-13वां बाल साहित्य सम्मान समारोह

0
35

1006
बाल साहित्य सृजन संस्कारों एवं ज्ञान का बीजारोपण हैः डाॅ. विकास दवे देश भर के साहित्यकारों को मिला सम्मान, बाल प्रतिभाओं ने दी प्रस्तुति

’बाल साहित्य का सृजन समय की आवश्यकता और भावी पीढ़ी के भविष्य को संवारने वाला होना चाहिए। खास बात यह है कि जिनके लिए साहित्य लिखा जा रहा है उन तक यह साहित्य पहुँचना बहुत जरुरी है। बाल साहित्य को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह कोई बचकाना सृजन नहीं है, बल्कि साहित्य के साथ भावी पीढ़ी में संस्कारों व ज्ञान का बीजारोपण है। मौजुदा समय में बाल साहित्यकारों के लिए और भी परीक्षा की घड़ी है।’
यह विचार बाल साहित्य की प्रमुख पत्रिका ’देवपुत्र’ के प्रबंध सम्पादक एवं ख्यातनाम साहित्यकार डॉ. विकास दवे ने कही। ’राजकुमार जैन राजन फाउण्डेशन’ (आकोला) द्वारा 26 नवंबर 2017, रविवार को चित्तौडगढ़ की ’ऋतुराज वाटिका’ में आयोजित 12-13 वों ’राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मान समारोह’ में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधन में डॉ. दवे ने कहा, ’आज बच्चों में साहित्य पढ़ने की परम्परा कम हो रही है जो चिंता का विषय है। आज बच्चों पर प्रतिस्पर्धा के युग में बढ़ते बोझ से जिस उम्र में बच्चों के दाँत टूटते थे उस उम्र में उनके दिल टूट रहे है। हमें साहित्य सृजन में नई पीढ़ी को क्या देना चाहिए। यह सोचना बहुत जरुरी है। साहित्य में व्यवसायिक वृत्ति से ऊपर उठने की जरुरत है।’
समारोह अध्यक्ष सांसद सी.पी. जोशी ने देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों का वीरता की धरा पर स्वागत करते हुए कहा कि, ’अभी चित्तौड़ दुनिया में छाया हुआ है। सिर्फ शोहरत एवं पैसे के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश नहीं करना चाहिए। पूरी दुनिया हमारी भारतीय संस्कृति की ओर भाग रही है और हम पाश्चात्य संस्कृति की ओर जा रहे हैं जो चिंता का विषय है।’
उन्होंने कहा कि ’बदलाव की शक्ति साहित्यकार में होती है और अपनी इस शक्ति से बदलाव लाने की जिम्मेदारी बखुबी निभाएं।’ सत्र को बतौर विशिष्ट अतिथि सम्बोधित करते हुए चित्तौडगढ़ के इतिहास अध्येता साहित्यकार डॉ. ए.एल.जैन ने कहा कि, ’साहित्यकार राजकुमार जैन राजन ने पूरे देश में बाल साहित्य की लौ जला रखी है। बाल साहित्य की पुस्तकें निःशुल्क देश के कई राज्यों के विद्यालयों संस्थाओं में भेंट कर पठन-पाठन परम्परा को सम्बल देकर सराहनीय कार्य कर रहे हैं। आज बच्चों तक अपनी बात कैसे पहुँचाएं यह सोचना होगा।’
विशिष्ट अतिथि साहित्यकार गोविन्द शर्मा, संगरिया ने कहा कि, ’राष्ट्रीय शब्द बाल साहित्य के साथ ही लगाना उपयुक्त है। हमें समय के साथ बाल साहित्य का नये शिल्प और संदर्भों में सृजन करना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि, ’आप किसी भी विधा में साहित्य सृजन करें, लेकिन इसमें बाल साहित्य जरुर हो। बालक पाठक होगा तो वह बड़ा होकर भी पाठक बना रहेगा।’ कोटा से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार, चिंतक, समीक्षक जितेन्द्र निर्मोही ने कहा कि, ’बाल साहित्य बच्चों को संस्कारित करता है। बच्चों के संर्वांगिण विकास के लिए उन्हें बाल साहित्य पढने को अवश्य देना चाहिए।’
समीक्षक, चिंतक, डॉ. कनक जैन ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि ’देश में 40 प्रतिशत आबादी बच्चों की है और इसमें से करीब 73 प्रतिशत बच्चे गाँवों में निवास करते हैं। इसलिए परिवेश व परिस्थिति को समझकर ही साहित्य सृजन करना चाहिए। आज बच्चों पर बस्ते का बोझ, आठ घण्टे पढ़ाई, होमवर्क और फिर ट्यूशन आदि का चक्कर है। साथ ही हमारी उम्मीदों का भी उन पर बोझा है। हमारा लक्ष्य, हमारे सपने उनकी आँखों में हैं। साइबर दुनिया भी बच्चों को निष्क्रिय बना रही है।’
कार्यक्रम संयोजक राजकुमार जैन राजन ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि, ’बाल साहित्यकार ’देवदूत’ हैं जो अपने सृजन के माध्यम से बालकों में हिन्दी भाषा में अनुराग बढ़ाने के साथ ही उन्हें संस्कारों से पल्लवित करते हैं। उनकी कल्पनाओं को उड़ान देते हैं इसलिए पठन-पाठन की परम्परा को एक आंदोलन के रुप में पुनर्जिवित किया जाना चाहिए।’ अपनी बाल साहित्य संवर्द्धन योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए राजन ने कहा कि ’आज साइबर युग में बच्चों का बचपन, संस्कार छिनते जा रहे हैं। ऐसे में लोग बाल साहित्य की महत्ता को समझे, यह भी इस समारोह का हिस्सा है। आने वाली पीढ़ी को हम क्या दे रहे हैं, साहित्य सृजन बच्चों के कितना काम आ रहा है, यह महत्वपूर्ण है।’ ’साहित्य समीर दस्तक’ भोपाल एवं ’राष्ट्र समर्पण’ नीमच की सहभागिता से भी यह साहित्य त्रिवेणी कार्यक्रम हो गया है। इसके लिए उन्होंने कीर्ति श्रीवास्तव एवं संजय शर्मा का आभार व्यक्त किया।
समारोह का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा माँ शारदा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ। सरस्वती वंदना नन्द किशोर निर्झर एवं स्वागत गीत डॉ. शकुंतला सरुपरिया ने प्रस्तुत किया। इससे पूर्व अतिथियों का मेवाड़ी परम्परानुसार स्वागत किया गया। सभी अतिथियों को तिलक लगाकर पुष्प भेंट किए गए।
इस प्रथम सत्र में बाल प्रतिभा ऋभवन जोशी (आकोला) द्वारा शिव आराधना स्त्रोत की प्रस्तुति के बाद बाल साहित्य संवर्द्धन योजना के तहत प्रकाशित पवन पहाड़िया की ’समझो मम्मा’, ’ऐसी जोत जगाएं’, प्रहलादसिंह झोरड़ा ’चांद खिलौना’, ईंजी. आशा शर्मा की ’अंकल प्याज’ महावीर रंवाल्टा की ’अनोखा जन्मदिन’ एवं अब्दुल समद राही की ’चुनमुन-चुनमुन’ बाल साहित्य की पुस्तकों का लोकार्पण मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। इस दौरान डॉ. शील कौशिक, सावित्री चैधरी, खेलन प्रसाद कैवर्त, नीता अगवाल, गुलाबचन्द पटेल आदि की पुस्तकें भी लोकर्पित की गईं। सलूम्बर की बाल प्रतिभा जयेश खटीक व अभिषेक मेहता ने ख्यातनाम रचनाकारों की कविताओं का पाठ किया। राजकुमार जैन राजन ने नागौर के पवन पहाड़िया को 5500 रुपये व सतारा महाराष्ट्र के मछिन्द्र बापू भिसे को 4000 रुपये मूल्य की बाल साहित्य की पुस्तकें निःशुल्क भेंट की।
जिन किताबों को पढ़कर बच्चे खुश होते हैं, जिन्हें पढ़कर वे ज्ञान प्राप्त करते हैं, उन्हीं किताबों के बाल साहित्य रचनाकारों, बाल कल्याण के क्षैत्र में उत्कृष्ठ कार्य करने वालों का सम्मान मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। ’डॉ. राष्ट्र्रबन्धु स्मृति सम्मान’ से सलूम्बर की डॉ. विमला भण्डारी एवं अल्मोड़ा के श्री उदय किरौला को, ’डॉ. श्रीप्रसाद स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ से शाहजहांपुर के डॉ. नागेश पाण्डेय ’संजय’ (अनुपस्थित) एवं,’डॉ. चन्द्र सिंह बीरकाली राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान’ से जयपुर की श्रीमती सावित्री चैधरी को सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरुप प्रत्येक को पाँच हजार एक सौ रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्र, बाल साहित्य प्रदान किये गये।
इसी तरह ’डॉ. बालशौरी रेड्डी स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ रतनगढ़ के श्री ओम प्रकाश क्षत्रिय एवं पौढ़ी गढ़वाल उत्तरांचल के श्री मनोहर चमोली ’मनु’ (अनुपस्थित) को, ’श्री अंबालाल हींगड़ स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ जोधपुर के डॉ. डी.डी. ओझा एवं गांधी नगर, गुजरात के श्री गुलाबचंद पटेल को, ’श्रीमती इंदिरा देवी हींगड़ स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ पटियाला की श्रीमती सुकीर्ति भटनागर एवं इन्दौर के श्री प्रदीप मिश्र को, ’शांति लाल हिंगड़ स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान’ भोपाल के श्री घनश्याम मैथिल ’अमृत’ एवं रायपुर के डॉ सत्यनारायण सत्य (राजस्थानी) को, ’श्री जगदीश दुग्गड़ स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ गुडगाँव (हरियाणा) के श्री हरीश कुमार ’अमित’ एवं बरेली के श्री अरविन्द कुमार साहू (अनुपस्थित) को, ’श्री फतेहलाल चण्डालिया स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ झालावाड़ (राज.) के श्री शिवचरण सेन ’शिवा’ (अनुपस्थित) एवं सोजत (राज.) के श्री अब्दुल समद राही (अनुपस्थित) को, ’चैधरी श्री मंगतराम कुलहरी स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ पटना (बिहार) के श्री भगवती प्रसाद द्विवेदी एवं दौसा (राज.) के श्री अंजीव अंजुम को, ’श्रीमती बरजी देवी दूणा स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ जोधपुर की डॉ.जेबा रशीद एवं नैनीताल उत्तराखण्ड की श्रीमती विमला जोशी को एवं ’चैधरी खूमसिंह कड़वासरा स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ मथुरा (उ. प्र.) के श्री संतोष कुमार सिंह को सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरुप प्रत्येक को दो हजार एक सौ रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्र एवं बाल साहित्य प्रदान किया गया। अतिथियों एवं विशिष्ट प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदित किया गया।
नीमच से प्रकाशित ’राष्ट्र समर्पण’ द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित ’राष्ट्र समर्पण बाल कहानी प्रतियोगिता’ में प्रथम गंजबासौदा की श्रीमती पद्मा चोंगावकर, द्वितीय गुडगांव के श्री हरीश कुमार अमित एवं उत्तरकाशी (उत्तराखंड) के श्री महाबीर रवांल्टा, तृतीय रहीं जयपुरकी श्रीमती रेणु चंद्रा माथुर को नगद राशि, प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्र व बाल साहित्य प्रदान किया गया। इस अवसर पर गोविन्द भारद्वाज (अजमेर) व सुनील गज्जानी (बीकानेर) को भी इनकी श्रेष्ठ कहानी के लिए सम्मानित किया गया। इस अभियान में संपूर्ण देश से 386 बाल कहानियाँ प्राप्त हुईं थीं। धन्यवाद एवं आभार ज्ञापन महेश मेनारिया ’कृष्ण मिलन’ व संजय शर्मा ने किया।
भोजनोपरांत भोपाल से प्रकाशित ’साहित्य समीर दस्तक’ के सौजन्य एवं ’राजकुमार जैन राजन फाउण्डेशन’ के संयोजन में द्वितीय सत्र का शुभारंभ हुआ जिसमें सुविख्यात हिन्दी राजस्थानी साहित्यकार डॉ. जय प्रकाश पाण्डया ’ज्योतिपुंज’ मुख्य अतिथि, पूर्व विधायक व डेयरी चैयरमेन बद्रीलाल जाट अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि के रुप में वरिष्ठ साहित्यकार, इतिहासकार डॉ. विमला भण्डारी, सुखाडिया विश्वविद्यालय उदयपुर के पत्रकारिता व जनसंचार विभागााध्यक्ष डॉ. कुंजन आचार्य व भारतीय जीवन बीमा निगम के विकास अधिकारी श्री ओम प्रकाश आमेरिया, युवा चिराग आर. जैन उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. ज्योतिपुंज जी ने कहा कि, ’बच्चों में हमारा भविष्य है वे कल की उम्मीद बंधाते हैं। राजकुमार जैन राजन फाउण्डेशन के साथ मिलकर कीर्ति श्रीवास्तव रचनाकारों को सम्मान व प्रोत्साहन देने का जो कार्य कर रहीं हैं वह स्तुत्य है।’ अध्यक्षता करते हुए बद्रीलाल जाट जी ने जोरदार शब्दों में ऐसे साहित्यिक आयोजनों की सार्थकता प्रतिपादित करते हुए उपादेयता सिद्ध की। डॉ. कुंजन आर्चाय ने कहा कि, ’आज साइबर दुनिया के कारण भाषा व संस्कार खतरे में पड़ गए हैं। संवेदनशीलता तथा भावनात्मकता समाप्त हो रही है। ऐसे में सद्साहित्य ही रोशनी की किरण है। हमें उपहार में पुस्तकें देने की संस्कृति को बढ़ाना चाहिए।’ डॉ. विमला भण्डारी ने बाल साहित्य उन्नयन व बाल कल्याण के क्षैत्र में मेवाड़ में किए जा रहे कार्यों को बताया। उन्होंने कहा कि ’इस क्षैत्र में जो कार्य मेवाड़ की वीर प्रस्तुता भूमि से हो रहा है ऐसा देश में कहीं भी नहीं होता है। जब हम जड़ में पानी सींचेंगे यानी बालकों को पुस्तकों से जोड़ेंगे तभी हमारी आने वाली पीढ़ी संस्कारों से पल्लवित होगी।’
द्वितीय सत्र का विषय प्रवर्तन करते हुए ’साहित्य समीर दस्तक’ की संपादक एवं साहित्यकार कीर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि, ’साहित्य समीर दस्तक’ के माध्यम से हिन्दी के नये प्रतिभावान रचनाकारों को प्रोत्साहन देने के भाव से यह सम्मान समारोह आयोजित किया है और ’शब्दों के इन्द्रधनुष’ साझा प्रकाशन की योजना बनी। इस आयोजन के पीछे हमारी भावना यही रही है कि हिन्दी भाषा व हिन्दी में सृजन के प्रति अनुराग बढ़े और भाषा का विकास हो।’ उन्होंने कहा कि ’हम राजकुमार जैन राजन जी के आभारी है जिन्होंने अपने भव्य आयोजन में हमें सहभागिता करने का अवसर प्रदान किया। भविष्य में भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे ऐसा हमारा प्रयास रहेगा।’
इससे पूर्व मंचस्थ अतिथियों ने राजकुमार जैन राजन व कीर्ति श्रीवास्तव के संपादन में प्रकाशित उत्कृष्ट साझा काव्य संकलन ’शब्दों के इन्द्रधनुष’ का लोकार्पण किया। राष्ट्रीय कवि अब्ुदल जब्बार, डॉ. शकुंतला सरुपरिया , प्रमोद सनाढ््य, राजेश राज एवं बंषी लाल लड्डा ने अपनी काव्य रचनाओं के पाठ से श्रोताओं को आहलादित कर दिया।
इस अवसर पर डॉ. शील कौशिक, सिरसा हरियाणा, श्री सत्यनारायण सत्य ’मधुप’, भीलवाड़ा , श्री राजेश पुरोहित, भवानीमण्डी, श्री जितेन्द्र निर्मोही, कोटा, श्री खेलन प्रसाद कैवर्त, रायगढ़, श्रीमती साधना श्रीवास्तव एवं श्रीमती कांता राय भोपाल को ’राष्ट्रीय गौरव सम्मान’ से विभूषित किया गया तो श्री प्रमोद सनाढ््य, नाथद्वारा, श्रीमती आशा भाटिया, नीमच, श्री पवन पहाडिया, नागौर, श्रीमती सारिका कालरा, दिल्ली, श्री प्रहलाद सोनी, भीलवाड़ा, श्री गुलाब पटेल, गाँधीनगर, सुश्री अनुजा बेगम, असम, श्री सुरजीत सिंह, हाथरस, श्री राजीब नसीब, अजमेर, श्री सूर्य नारायण गुप्त ’सूर्य’ देवरिया, श्रीमती रेणु खत्री, अलवर, श्रीमती नीता अग्रवाल, हुनुमानगढ़, श्रीमती पदमा पंचोली, देवास एवं सुश्री सुनीता शर्मा, गुडगाँव को ’साहित्य गौरव सम्मान’ से मंचस्थ अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरुप प्रत्येक को प्रशस्ति पत्र, अंग वस्त्र एवं ’शब्दों के इन्द्रधनुष’ की प्रति भेंट की।
दोनों सत्रों का कुषल संचालन ख्यातनाम कवयित्री डाॅ. षकुंतला सरूपरिया, उदयपुर ने किया। इससे पूर्व अतिथियों एवं विशिष्ट प्रतिभागियों को आयोजक मंडल की ओर से स्मृति चिन्ह प्रदान किये गए। इस आयोजन में देष भर के लगभग 160 षब्द षिल्पियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में मंचस्थ अतिथियों सहित समस्त प्रतिभागियों ने खडे होकर ’राष्ट्रगान’ प्रस्तुत किया
राजकुमार जैन राजन, कीर्ति श्रीवास्तव एवं संजय शर्मा ने ’फिर मिलेंगे’ के आगाज के साथ कार्यक्रम समापन की घोषणा की।

LEAVE A REPLY