“राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन” हुआ संपन्न…

0
49

22154610_1883333505013568_4031120758249468976_n 22195295_1883334245013494_8676421294783670121_n

सलूम्बर में बालसाहित्य की पुरोधा, सहृदयी व्यक्तित्व की धनी, आदरणीय विमला जी भंडारी के कुशल निर्देशन व “सलिला “संस्था के तत्वावधान में आठवां “राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन” 2 व 3 अक्टूबर को पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कहने को यह बाल साहित्यकार समारोह था पर विमला जी ने अपने विवेक, कौशल और चातुर्य से इस समारोह में विवधताओं के इतने रंग भर दिए कि अभिभूत हुए बिना नही रहा जा सकता।इस बार बाल कहानियां आमंन्त्रित कर उनमे से उत्कृष्ठ कहानी रचनाकरों को सम्मानित किया गया।पुरस्कृत बाल कहानियों को “हमारे समय की बाल कहानियां” वृहद ग्रन्थ के रूप में प्रकाशित किया गया।….यही नही देश के ख्यातनाम रचनाकार की क्रमशः मंच पर उपस्तिथि और उस रचनाकार की कविता का पाठ बालकों के श्री मुख से , रोमांचित कर गया। 82 वर्ष की उम्र में विश्व प्रसिद्ध जनकवि श्री माधव जी दरक का एकल काव्य पाठ सलिला एवम विमला जी की दूरगामी सोच के कारण आयोजन में चार चांद लग गए।कार्यक्रम में इतिहासकार,चिंतक, साहित्यकार “राजस्थानी भाषा ,संस्कृति साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवम “जागती जोत” के पूर्व संपादक श्री डॉ देव कोठारी, केंद्रीय साहित्य अकादमी, राजस्थान साहित्य अकादमी सहित सैंकड़ों सम्मानों से नवाजे गए, कई पुस्तकों के रचयिता, आकाशवाणी के पूर्व कार्यक्रम अधिकारी श्री डॉ जयप्रकाश पण्ड्या “ज्योतिपुंज”, वरिष्ठ साहित्यकार, चिंतक,सैंकड़ों साहित्यिक सम्मानों से विभूषित,दर्जनों पुस्तको के रचनाकार आदरणीय जितेंद्र जी निर्मोही एवम डॉ रमाकांत शर्मा जैसे वरिष्ठ रचनाधर्मियों की उपस्तिथि ने आयोजन को ऊंचाइया प्रदान की। आदरणीय सावित्री चौधरी जी की उपस्तिथि अंगूठी में नगीने सी आयोजन की शान बन अपनी महक से शब्द शिल्पियों को आशीष दे रही थी। वहीं बहुआयामी प्रतिभा के धनी साहित्यकार, संपादक, कार्टूनिस्ट, मिमिक्री आर्टिस्ट मतलब ऑल इन वन” भाई श्री किशोर श्रीवास्तव की प्रस्तुतियों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए तो उनकी “खरी खरी” कार्टून प्रदर्शनी ने दर्शकों के दिलों में असर करने में कोई कसर नही छोड़ी। प्रसिद्ध चित्रकार, साहित्यकार श्री चेतन जी औदीच्य, सुखाड़िया विश्व विद्यालय पत्रकारिता विभाग के हेड डॉ . कुंजन आचार्य, युगधारा के सहयोगी, कहानीकार व राजस्थान साहित्य अकादमी सरस्वती सभा के सदस्य श्री गौरिकान्त शर्मा की उपस्तिथि ने गरिमा प्रदान की। कई रचनाकारों की नव सृजित पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ, जिनके रचनाकारों को इस आयोजन में निश्चित नये, उत्कृष्ठ सृजन की भावनाओं को ऊर्जा व सम्बल प्रदान किया होगा। कई मनीषियों के साथ मुझे भी मंचस्थ अतिथि के रूप में सम्मान दिया, जिसने मेरे गौरव में द्विगुणित बढ़ोतरी की। दोनों दिनों के कार्यक्रमो का कुशल संचालन देश के ख्यातनाम शब्द साधक श्री प्रह्लाद पारीक, आदरणीया शकुंतला सरूपिया एवम पंकज विरवाल ने किया जिनके सहयोगी के सुप में श्री प्रकाश जी तातेड़ अनवरत साथ देते रहे। मुझे ऊर्जा, सम्बल व प्रेरणा से लबरेज कर गया ,आदरणीय विमला दीदी का यह स्नेह!! देश के सैंकड़ों साहित्यकारों की उपस्तिथि, सलिला का सौजन्य, भंडारी परिवार के हर व्यक्ति का आत्मीय स्नेह विमला जी को सलूम्बर का पर्याय बन देता है। मैने गत वर्ष के ” सलिल प्रवाह” की समीक्षा में भी लिखा था कि” सलूम्बर को विश्व मे हाड़ा रानी के बलिदान के लिए जाना जाता रहाहै, पर अब सलूम्बर को डॉ विमला भंडारी जी के काम,नाम से सम्पूर्ण विश्व मे ख्याति मिलेगी।

प्रस्तुति- राजकुमार जैन ‘राजन’

LEAVE A REPLY