बांध रहा है जो हाथ हमारें जला डालो-अशोक सपड़ा

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बांध रहा है जो हाथ हमारें जला डालो वो संविधान
कब तक चलती रहेगी देश में नेताओं की अंधी दुकाँ  fb_img_1482336680085

सन्सद गूंगी बहरी हो गई जो सुनाई उसको देता नहीं
2019 छोड़ो मोदी जी देखिये चीख रहा है वर्तमान

क्यों तुम्हारे शहरें दिल में उदासियाँ नहीं छाती कभी
क्यों आतंकियों और पत्थरबाजो पर हो तुम मेहरबाँ

कहाँ गया अब वो छप्पन इंच का चौड़ा सीना तुम्हारा
क्यों नहीं धारा 370 खत्म करने का होता है फरमान

कश्मीर जल रहा सुकमा में भी आग लगी बारूद की
क्यों दिल तुम्हारा जलता नहीं कैसे तुम हो हुकुमरान

खिल उठे थे सोच दिल के गुंचे भी तुम सच्चे नेता हो
पर अब नजर आने लगें तुम्हारे भी है राजनैतिक बयाँ

सुकमा हो या कश्मीर हमारा देख हाल देश रो रहा है
आँखें भी बहती थमती नहीं अश्क़ों के भी आये तूफां

दम बे दम खालिशे खार मिल रहें हमको देश वालों से
कब तक खतरें में पड़ें रहेंगे हमारी सेनाओं के जवान

अब भी मौका है आरपार की बात कर लों तुम ज़रा
सुकमा हो या कशमीर कब खतरें में रहेगा ये हिन्दुस्तां

इस अशोक के दिल में भी अब आग का दरिया बह रहा
कलम आग उगल रही सदियों तक उगलेगी इसकी जुबाँ

अशोक सपड़ा की कलम से दिल्ली से

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