बेटी की शादी से पहले-अशोक सपड़ा

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बेटी की शादी से पहले उसका पसीना देखा  fb_img_1482336680085
सावन तो सावन है विदाई पर महीना देखा
जिसे जिंदगी में आने नहीं देना चाहता था वो
 उसके लिए फिर दिन रात मरना जीना देखा
कलेजे के टुकड़े को रो रो के भुला ना सका
अश्कों की बरसात में टुटा एक सफीना देखा
उसका लहज़ा बड़ा अखबारी था कभी यारों
अब बेटीयोंं के लिए उसका एक करीना देखा
अपनी दुःख में सुखी था वो बेटी की खातर
फ़र्ज़ की सूरत में ओढ़े ना उसे पश्मीना देखा
अशोक सपड़ा की कलम से दिल्ली से

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