विश्व पुस्तक मेले में विचार गोष्ठी एवं काव्य संध्या “ भारतीय साहित्य में पर्यावरण “

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आज ०६/०१/२०१८  इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती ,दिल्ली सम्बद्ध अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा विश्व पुस्तक मेले, प्रगति मैदान में एक विचार गोष्ठी “भारतीय साहित्य में पर्यावरण “ एवं काव्य संध्या का आयोजन किया गया | कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामशरण गौड़ जी ने की | कार्यक्रम का शुभारम्भ अंजना अंजुम जी ने सरस्वती वन्दना से किया | विचार गोष्ठी का संचालन श्री मनोज शर्मा महामंत्री जी ने किया | श्री अभिषेक अग्रवाल जी पर्यावरण विद ने अपने विचार व्यक्त किये कि हमें पोलीथिन का इस्तेमाल बिलकुल भी नहीं करना चाहिए ऐसी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए, जिन्हें *रिसायकल* किया जा सके. उन्होंने साहित्यकार और कवियों से भी अपील की , कि आप भी अपने लेखो में और कविताओं में इनका जिक्र करें  जिससे ये समाज जागरूक हो सके |दूसरे पर्यावरण विद श्री संजय शर्मा ने भी पर्यावरण को संजो कर रखने की अपील की |
काव्य संध्या का संचालन डॉ पूनम माटिया जी ने किया उन्होंने अपनी कविता भी सुनाई ये रिश्तों के धागे सम्भालो इन्हें तुम, कि कैंची ज़ुबां की कतरती खटाखट…., जो मासूम बच्चों  तलक को न छोड़े , ये वहशी हैं इनको लगाओ चटाचट …,
अंजना अंजुम ने कविता कही “ छोड़ दो पुरानी कथा ,जिंदगी भोर है चहु और है , मुश्किलों में तुम्हे कौन कब मिल गया , जिनका कोई न था उसे रब मिल गया
श्री जय सिंह आर्य जी ने कविता कही “ कहाँ जा रहा है कहाँ जायेगा तू , उधर जायेगा तो बिखर जायेगा तू, इधर आ , इधर आएगा तो संवर जाएगा तू
श्री वीर सैन जैन सरल जी ने कविता कही “ओ समय ज़रा धीरे धीरे चल”
कार्यक्रम में अन्य कवि  श्रीमती सरोज शर्मा , सूक्ष्म लता महाजन , रमाकांत पूनम ने सैकड़ो श्रोताओ का मन मोह लिया और पर्यावरण के प्रति जागरूक भी किया |
मंच पर विश्व प्रसिद्ध कवि श्री कुंवर बैचैन , व्यंग्यकार श्री हरीश नवल जी, संगठन मंत्री श्री प्रवीण आर्य जी , राष्ट्रीय कवि  श्री जय सिंह आर्य जी उपस्थित रहे |
कार्यक्रम में श्री नृत्य गोपाल शर्मा जी , श्री शान्ति स्याल जी , श्री संजीव सिन्हा जी ,ब्रजेश गर्ग, श्रीमती पूर्णिमा अग्रवाल जी , आदि अनेक व्यक्ति उपस्थित रहे।

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