भैरूंसिंह राजपुरोहित- कर्मठ, ऊर्जावान, समर्पित मरुधरा का कार्यकर्त्ता

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कवयित्री डॉ पूनम माटिया- साक्षात्कारकर्ता

बीकानेर के निवासी, दुबले-पतले, छोटी कद-काठी किन्तु असीमित ऊर्जा और जिजीविषा के भण्डार भैरों सिंह राजपुरोहित मनणा जो मार्च 11 को डायमंड अचीवर्स अवॉर्ड 2018 समारोह आयोजित करने जा रहे हैं आइये कुछ उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में जानने की कोशिश करते हैं …….

*जन्मतिथि- 5 जनवरी 1976
*पढ़ाई-स्नातक, बेचलर ऑफ जर्नालिज़म और मास कम्युनिकेशन डिप्लोमा (BJMC),कोटा
*जन्मस्थान- बीकानेर
*मात-पिता का नाम – श्रीमती देव कवंर एवं स्व. श्री मोहन सिंह जी
*परिवार के सदस्य – माँ, पत्नी, दो बेटे, दो बेटियाँ
*सामाजिक चिंतन एवं कार्य – समाज के हर व्यक्ति, हर तबके के लिए अपने से बन पड़े वो सेवा कार्य करो पर
निस्वार्थ रूप से करो और ख़ासकर आज ज़रूरत है-‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के लिए जन-जागृति की|
संरक्षक- राजपुरोहित युवा विकास मण्डल; प्रदेश प्रवक्ता- मरु प्रदेश निर्माण मोर्चा; प्रदेश प्रभारी – सम्पूर्ण शराब बंदी
आन्दोलन राजस्थान; प्रधान संपादक- ‘यूथ वर्ल्ड समाचार’ पत्रिका, बीकानेर
*परिवार में सामाजिक कार्य क्या कोई और भी करता है या करता था?
पिताश्री के द्वारा किये सामाजिक कार्यो से ही प्रेरणा मिली|
*व्यवसाय- पत्रकारिता
*पत्रकारिता के अतिरिक्त और कौन सा व्यवसाय आर्थिक ज़रूरतें पूरी करता है?
कृषि फ़ार्मिंग
*खाली समय में क्या करते हैं?
पठन-पाठन ख़ासकर इतिहास की पुस्तकें पढ़ना और काव्य रचनाओं को पढ़ना|
*मरू प्रदेश के लिए कार्य – जन जागृति करने का सतत्त प्रयास, जन आन्दोलन और मरु प्रदेश के विकास के लिए
सतत्त आंदोलन करना जब तक अलग मरु प्रदेश का निर्माण न हो जाये।

*अब तक मिले सम्मान – राष्ट्रीय इंटीग्रल ह्युमनिज़म अवॉर्ड 2017, प्राउड इंडियन अवॉर्ड 2017, आईरा कलमवीर
सम्मान 2016, भामाशाह सम्मान 2016 बाड़मेर, राष्ट्रीय युवा चेतना पुरस्कार, जयपुर 2015, युवा चेतना अवॉर्ड 2014,
जागरूक उपभोक्ता अवॉर्ड, 1999
*इस आयोजन का मन कब और कैसे बना?
लंबे समय से यूथ वर्ल्ड समाचार पत्रिका का प्रकाशन कर रहा हूँ और सोशल मिडिया के माध्यम से काफ़ी नेक और
बुद्धिजीवी लोगों का सानिध्य मिला तो मन में ख़याल आया कि क्यों न एक आयोजन किया जाये और इस बारे में
कवयित्री डॉ पूनम माटिया दिल्ली, एडवोकेट श्रीमती ललिता संजीव महरवाल और पूर्व केंद्रीय बालश्रम बोर्ड चेयरमैन
श्री शिशुपाल सिंह निम्बाड़ा, राष्ट्रीय समाज सेवी वीना अरोड़ा जी, श्रीमती निशा राठौड़ और धर्मपत्नी श्रीमती गंगा
कवंर से चर्चा की तो सब ने हौसला अफ़जाई की| डायमंड अचीवर्स अवॉर्ड 2018 के आयोजन की हिम्मत जुट गई|
*उद्देश्य क्या है इस आयोजन का?
प्रतिभाओं को एक मंच पर लाकर आपस में एक दूसरे से रूबरू करवाना और समाज के सामने प्रतिभाओं की
प्रतिभा को प्रस्तुत करना जिससे अन्य लोग भी सेवा कार्य तथा अग्रणी कार्यों की प्रेरणा ले सकें।
*मुझे वक्ता के तौर पर क्यूँ चुना?
साहित्य में आपके वृहद् अनुभव, लगातार साहित्य- सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रियता और अद्भुत काव्य-क्षमता
और मिलनसार व्यक्तित्व को देखते हुए।
*प्रतिभागियों का चयन कैसे किया?
सोशल मिडिया के माध्यम से प्रतिभाओं के परिचय आमन्त्रित किये गए और 500 से ज़्यादा परिचय प्राप्त हुए|
उन सब को यूथ वर्ल्ड समाचार समूह द्वारा गठित चयन कमेटी ने बारीकी से देखा और उनमें से चयन किया
गया|
*परिवार, मित्रों और संस्थाओं का सहयोग- युवा समाज सेवी भूपेंद्र सिंह यादव (राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसीआई), सुश्री
आरती तिवारी, चंडीगढ़ से रविंद्र जी अरोड़ा, गौरव गहलोत, युवा समाज सेवी अभय सिंह जसोल, मित्र गोपाल जोशी
सहित सभी का सहयोग|
*क्या आपकी पत्नी आपके कार्यों में सहयोग देती हैं और इस आयोजन में क्या जिम्मेदारी निभा रही हैं?
वेसे मेरी पत्नी एक गृहणी है पर मेरे द्वारा किये जा रहे कार्यों के बारे में में उससे लगातार चर्चा करता हूँ और वो
अपनी उचित राय भी देती है| इस आयोजन में आयोजन-स्थल पर आगुंतक महिला-शक्ति के स्वागत की जिम्मेवारी
देखेंगी|
*आपकी माता जी से आपको क्या शिक्षा प्राप्त हुई है?
जब मैं 14 साल का था तब मेरे पिताजी का देहांत हो गया था और माताजी ने ही मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया|

हमारी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी पर माताजी ने सदैव यही कहा-‘एक समय भूखा रह लो पर अपने से हो
सके जितनी ज़रुरतमंद की मदद करो और सदैव नेकी पर रहो’|
* सामाजिक कार्यों का प्रभाव अपने घर परिवार में क्या देखते हैं?
सामाजिक कार्य की छवि बचपन में पिताजी के सामाजिक कार्यो में देखी, लोग-बाग उनके पास आते, वार्ताएं चलती
तो उनको सुनना अच्छा लगता और उसी से प्रेरणा मिली और मेरे द्वारा सतत्त सामाजिक कार्यों से जुड़े रहने का
असर स्पष्ट रूप से अपने बच्चों में देख रहा हूँ| बड़ा बेटा 15 साल का है पर पढाई के साथ-साथ उसका लगाव भी
खेल-कूद से ज्यादा सामाजिक गतिविधियों में रहने लगा है| परिवार पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा
है ।
*आप बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में विश्वास रखते हैं। साधुवाद। स्वयं अपनी बेटियों को भविष्य में कहाँ देखते हैं और
अभी उनकी गतिविधियां क्या हैं?
बेटी है तो कल है, बेटी जगत का आधार है। मैं अपनी दोनों बेटियों को पूरी शिक्षा दिलाने को संकल्पित हूँ और
उनकी इच्छानुसार उनको शिक्षा दिलवाऊंगा वैसे अभी दोनों बेटियां छोटी हैं| बड़े वाली 9th में और छोटी 4th में और
उसको कविताओं का बड़ा शौक है| आपने जो एक काव्य-पुस्तक मुझे भेजी थी तो मेरी बिटिया ख़ुशी ने सारी
कविताओं- ‘आईना मेरा अक्स दिखाता है’ ..से लेकर सभी को याद ही कर लिया है|
*अरे वाह! ये तो कमाल है| वैसे वे आपसे किस प्रकार के प्रश्न पूछती हैं? और हाँ, नवीं कक्षा के बच्चे छोटे नहीं
होते|
जब सामाजिक कार्यो के सिलसिले में लगा रहता हूँ तो कई बार बड़ी बिटिया समय नही दे पाने के कारण नाराज़
हो जाती है और बोल देती है-‘’आपको समय नहीं हमारे लिए’ पर फिर थोड़ी देर में ही बोल देती है-‘कोई नहीं पापा
उनको काम था आपसे, उनको ज़रूरत थी सो कोई नहीं आप बस ऑफ़िस से घर जल्दी आ जाया करें और खाना
समय पर खाया करें, मेरे पापा सबसे अच्छे हैं, हमारी स्कूल में भी कई बार सर आपका उदाहरण देते हैं तो मुझे
बड़ी ख़ुशी होती है अपनी दोस्तों के सामने|’’
*इससे आगे क्या करने का मन है ?
यूथ वर्ल्ड समाचार पत्रिका के माध्यम से समाज में छुपी हुई प्रतिभाओं को समाज के सामने लाना और आगामी
समय में एक बड़ा आयोजन करवाना|
*क्या प्रतिभाओं को सम्मानित करने से या इस तरह के आयोजनों से ज़मीनी स्तर पर कोई सुधार या विकास होता
है या हो सकता है?
प्रतिभाओं को सम्मानित करने से एक ओर तो प्रतिभाओं की हौसला अफ़जाई होती है वहीं दूसरी ओर अन्य लोग प्रेरित होते
हैं|समाज-सेवा जैसे नेक कार्य को गति मिलती है| साथ ही एक मंच पर अलग-अलग प्रान्तों की प्रतिभाओं को आमंत्रित करने से
एक-दूसरे से मिलने का अवसर और एक दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर प्राप्त होता है।

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