राजकीय विद्यालय में भित्ति पत्रिकाओं का महत्व

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   सरकारी स्कूलों में भित्ति पत्रिकाओं को बनाना अनिवार्य कर दिया है। विद्यालयों को दी जाने वाले अंकों में भित्ति पत्रिका के अंक भी दिए जाते हैं। भित्ति पत्रिका पर विद्यार्थी आज की कविता एवम आज के चित्र लगाए जाते हैं। बच्चे अपनी रचनाओं के माध्यम से मन की बातों को रख सकते हैं। बहुत सी बातें विद्यार्थी कह नहीं पाते हैं। इन रचनाओं सर बालक के अंतर को आईने की तरह देखा जाता है। विभिन्न रंगों के संयोजन से कल्पनाओं की उड़ान भरते इनकी तूलिका से बने सजीव चित्र मन को छूते हैं।
        बालकों की सृजनात्मकता का पता भित्ति पट्ट से लग जाता है।कक्षा के बच्चों में होड़ लग जाती है आज मेरा चित्र,मेरी कविता भित्ति पत्रिका में शामिल हों।
    विद्यार्थियों में जिम्मेदारी की भावना का विकास होता है।एकता व भाईचारे की भावना भी उत्पन्न होती है। भित्ति पत्रिकाओं के माध्यम से उस परिवेश  यानी भौगोलिक ,सामाजिक,सांस्कृतिक विरासत का भी पता चलता है।
   नैतिक शिक्षा देने की बात इन दिनों सभी कह रहे हैं । विद्यार्थियों में सृजन क्षमता का विकास होता है। आज के विद्यार्थियों में नैतिक गुणों की कमी हो रही है जिसका प्रमुख कारण है कि आज बच्चे सृजन करना भूलते जा रहे हैं। कोई भी हुनर सीखना नहीं चाहते। न पेंटिंग करना,रंग भरना, चित्र बनाना। यदि विद्यार्थी कक्षा में सृजनात्मक गतिविधियों में लगा रहेगा तो वह उद्दंड नहीं करेगा। कला सीखने से उसमें कलाकार के सारे गुण धीरे धीरे विकसित हो जाएंगे। वह जहां भी जाएगा। विद्यालय,परिवार, समाज सभी जगह उसका सम्मान होगा।
  बिजली बचाओ,पानी बचाओ,जल,जंगल जमीन बचाओ यह तभी सम्भव होगा जब हम मिलकर विद्यार्थियों को सृजनात्मक कार्यों से जोड़ेंगे।
सभी विषयों का मुक्कमल इल्म तभी होगा जब वह क्रियात्मक रूप से पढ़ाई करेगा। बच्चों की पॉर्टफ़ोलियो फाइलों में ये चित्र लगाए जाएंगे। चित्रों कविताओं के विषय पाठ की विषय वस्तु से संबंधित होना चाहिए।
  भित्ति पत्रिका हेतु बच्चों से कहानी लिखने की कहें उन्हें चित्र देख कर कहानी लिखने हेतु दें। पहेलियां, नाटक,वर्ग पहेली आदि चिपकाना। वर्तनी की अशुद्धियां जांचना सही कराकर चिपकाना। जिन बच्चों की लेख,यात्रा संस्मरण लिखने में रुचि हो उन्हें प्रेरित करना चाहिए। महापुरुषों के अनमोल वचन का संग्रह करना।
कविता,कहानी आदि का संपादन कैसे करते हैं बच्चे सीख सकेंगे। भित्ति पट्ट पर ऐसे चित्र लगाए जाने चाहिए जो पर्यावरण बचाने का संदेश देते हो। महापुरुषों की जीवनी से जुड़े प्रसंगों को प्रेरक बातों को भी भित्ति पट्ट पर लगाया जा सकता है। भित्ति पट्ट से सांस्कृतिक परंपरा का पता चलता है। विद्यार्थी स्थानीय परिवेश से जुड़े रहते हैं। नए नए आविष्कार, नवाचारों से जुड़ने का काम करती है भित्ति पत्रिका।
  मौसम की जानकारी,रंगों की जानकारी,सूर्य,चन्द्रमा,तारों,ग्रह, उपग्रहों की जानकारी आदि ज्ञान विज्ञान की बातें विद्यार्थी जल्दी सीखते हैं।वनस्पति,जीव जंतु को चित्रों के माध्यम से जल्दी सीख लेते हैं। इतिहास,समाज से जुड़ी घटनाओं के चित्र बनाते हैं।कई सामाजिक बुराइयों के बारे में पढ़ते लिखते हैं कविताओं कहानियों में यथा दहेज प्रथा, बाल विवाह,बाल श्रम ये सभी बन्द होने चाहिए ये संदेश देती रचनाएँ।
  खेत,रेलवे स्टेशन,अस्पताल, बस स्टैंड का वर्णन ,बाजार का वर्णन अपने शब्दों में लिखने हेतु देना चाहिए।
  –  कवि राजेश पुरोहित
       शिक्षाविद

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