मिट्टी वाले दीप जलाकर भूमण्डल को शुद्ध करो

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चकाचौंध में चायनीज के घर कुम्हार का खाली है,
कैसे बोलो फिर कह दूँ की भारत में दीवाली है,
धन तेरस से लेकर जो त्यौहार दूज तक जाता है
इतने दिन में ड्रैगन हमसे अरबों नोट कमाता है,
हिंदुस्तानी रुपया जितना पहुँच चीन को जायेगा,
वही पाक से होकर के वापिस आतंक मचायेगा,
नहीं चाइना की झालर समझो शकुनी के पांसे हैं,
एक एक झालर से ही चलती ड्रैगन की साँसे हैं,
पाक चीन ये परम मित्र हैं दोनों पर आघात करो,
दुश्मन से केवल दुश्मन की भाषा में ही बात करो,
अब अपने त्यौहारों में न दुश्मन को समृद्ध करो,
मिट्टी वाले दीप जलाकर भूमण्डल को शुद्ध करो, (१)

हिन्द देश के वासी हो अपने भारत से प्यार करो,
चायनीज की बली चढ़ा निज सैनिक का सत्कार करो,
अपने घर की लक्ष्मी को यूँ ऐसे ना बर्बाद करो,
त्यौहारों के मौसम में न दुश्मन को आबाद करो,
पाक हितैषी चीनी सेना के मंसूबे पस्त करो,
लात मारके सामानों में अर्थव्यवस्था ध्वस्त करो,
चायनीज सामान यहाँ जितने हमने धिक्कार दिए,
समझो उतने दुष्ट पाक आतंकी हमने मार दिए,
मिलकर के सब करो प्रतिज्ञा कड़ी जोड़के रख दोगे,
घर बैठे ही दुश्मन की तुम कमर तोड़के रख दोगे,
सेना लड़ती है सीमा पे तुम भीतर से युद्ध करो,
मिट्टी वाले दीप जलाकर भूमण्डल को शुद्ध करो,(२)

मेरे प्यारे देशवासियों तुम भारत के संबल हो,
भूमिपुत्र की आश तुम्हीं हो तुम ही सैनिक का बल हो,
राष्ट्रभक्ति के नायक भी तुम स्वदेशी अनुयायी भी,
सावरकर अरविन्द घोष गंगाधर की परछायी भी,
रविन्द्रनाथ टैगोर और बंकिम की तुम परिभाषा हो,
वर्तमान में देश बदलने की तुम अंतिम आशा हो,
बालकृष्ण राजीव भाई तुम रामदेव की आँधी हो,
स्वदेशी का साथ निभाने वाले महात्मा गाँधी हो,
भरतभूमि की शान स्वयं की संस्कृति के रखवाले हो,
तुम होली के रंग और दियों के तुम्हीं उजाले हो,
चीनी सेना की ताकत को तुम मिलकर अवरुद्ध करो,
मिट्टी वाले दीप जलाकर भूमण्डल को शुद्ध करो, (३)

कवि ‘चेतन’ नितिन खरे
सिचौरा, महोबा, उ.प्र.

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