भाजपा सांसद ने उठाया मानसिक दिव्यांगो का मुद्दा

दिव्यांग का सर्टिफिकेट बनवाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। खासकर जो लोग मानसिक दिव्यांगता से ग्रस्त हैं, उनके प्रमाण पत्र बनवाने में और अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

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उत्तर- पश्चिम दिल्ली सांसद डॉ. उदित राज ने आज लोक सभा में शून्यकाल के अंतर्गत दिव्यांगों को प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली कठिनाई का मुद्दा उठाया | डॉ. उदित राज ने कहा कि हमारी सरकार दिव्यांग जनों का जीवन सुलभ बनाने की दिशा में कई योजनाएं चला रही हैजिसका लाभ दिव्यान्गजनों को भी मिल रहा हैलेकिन इन्हें दिव्यांग का सर्टिफिकेट बनवाने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। खासकर जो लोग मानसिक दिव्यांगता से ग्रस्त हैंउनके प्रमाण पत्र बनवाने में और अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। राजधानी दिल्ली  की बात करें तो यहां लगभग 28 प्रतिशत दिव्यांगों  के पास ही प्रमाण-पत्र हैं और यदि मानसिक दिव्यांगता की बात करें तो सिर्फ 10 या 12 प्रतिशत के पास ही प्रमाण-पत्र हैं। प्रमाण-पत्रों के अभाव में ये 
दिल्ली में मानसिक विकलांगता से ग्रस्त लोगों को मुख्य रूप से इंस्टीट्यूट ऑफ़ हृयूमन बिहैवियर एंड एलाइड साइंसेज (IHBAS) दिलशाद गार्डन, द्वारा ही प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है, जहां पर लगभग एक साल की वेटिंग चलती रहती है।

स्वास्थ्य मंत्री महोदय से निवेदन है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के प्रत्येक हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड को सख्त हिदायत दी जानी चाहिए कि वे प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी करके प्रमाण-पत्र मुहैया कराएं। प्रत्येक हास्पिटल में कम से कम एक न्यूरोसर्जन अवश्य होना चाहिए ताकि मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों को प्रमाण-पत्र लेने में असुविधा न हो।

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