पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह का सफल आयोजन

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साहित्य मण्डल, श्रीनाथद्वारा और राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में ७ व ८ फरवरी, २०१८ को आयोजित पाटोत्सव ब्रजभाषा समारोह का शुभारम्भ मुम्बई से आये श्री पारसमल जी दुग्गड़ द्वारा “मुद्राओं से रोग चिकित्सा” पर उद्बोधन से हुआ। श्री दुग्गड़ ने उपस्थित साहित्यकारों से मुद्राओं का अभ्यास भी करवाया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र मंदिर मंडल, नाथद्वारा के मुख्य निष्पादन अधिकारी श्री सत्यनारायण जी आचार्य की अध्यक्षता तथा श्री जगदीशचंद्र जी शर्मा, पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी के मुख्य आतिथ्य में प्रारम्भ हुआ, जिसमें श्री राधागोविंद जी पाठक, श्री पारसमल जी दुग्गड़, श्री गोपाल जी शर्मा ‘प्रभाकर’ व श्री रामरतनप्रसाद सिंह जी विशिष्ट अतिथि रहे। मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ वीणापाणि, प्रभु श्रीनाथजी व कीर्तिशेष बाबूजी श्री भगवतीप्रसाद जी देवपुरा के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। श्री भूपेंद्र जी भरतपुरी द्वारा सरस्वती वन्दना की गई। श्रीनाथ वन्दना श्रीमती प्रभा किरण जी ने तथा ब्रज वन्दना श्री विट्ठल जी पारीक द्वारा की गई। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण जी आचार्य ने साहित्यकारों व अथितियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के विधिवत आरम्भ की घोषणा की। सम्मान की कड़ी में सर्व प्रथम ‘संसार मार्ग’ के सम्पादक श्री नथमल जी अरडावतिया, चिड़ावा, ‘दौड़ता मनुष्य’ के सम्पादक श्री रामनारायण जी जोशी, औरंगाबाद, ‘माइन्डपूल न्यूज़’ के सम्पादक श्री मनोज कुमार जी व्यास, जोधपुर, ‘तरुण देश’ के सम्पादक श्री दयाराम जी मेठानी, भीलवाड़ा, तथा ‘नव पल्लव’ की सम्पादक सुश्री अनुभूति जी गुप्ता, लखीमपुर खीरी को “संपादक शिरोमणि”” की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। इसी क्रम में श्री मोहित जी गौड़, राया को ““पत्रकार प्रवर”” की मानद उपाधि प्रदान की गई। ब्रजभाषा उपनिषद के अन्तर्गत श्री देवकीनंदन जी कुम्हेरिया, गोवर्धन ने ‘कवि घासीराम जी और भक्ति चेतना’ विषय पर और ‘राधावल्लभ सम्प्रदाय का ब्रजभाषा साहित्य’ विषय पर डॉ. अमरसिंह जी सैनी, मथुरा ने अपना आलेख प्रस्तुत किया। आचार्य विष्णुशरण जी भारद्वाज, वृन्दावन ने ‘श्री भट्ट जी और उनका माधुर्य भक्ति साहित्य’ विषय पर तथा ‘जैन कवियों का ब्रजभाषा साहित्य’ विषय पर श्री सर्वोत्तम जी त्रिवेदी ‘लघु’, कामवन ने अपने शोधपरक आलेख का वाचन किया।
अपराह्न के सत्र की अध्यक्षता श्री रामेश्वर जी शर्मा ‘रामूभैया’ ने की मुख्य अतिथि श्री हीरालाल जी श्रीमाली तथा विशिष्ट अतिथि श्री ओमप्रकाश जी अवस्थी, श्री विज्ञान व्रत जी व श्रीमती बानो जी सरताज रही। साहित्य मण्डल के छात्र-छात्राओं द्वारा अष्टछाप के कवि कुम्भनदास जी पर नृत्य नाटिका व ‘कान्हा न माने’ नृत्य प्रस्तुत किया गया।
सम्मान-पुरस्कार की कड़ी में श्री पारसमल जी दुग्गड़, मुम्बई, को ““श्री गोपीलालजी-कंचन बाई दुग्गड़ स्मृति सम्मान-२०१८””, श्री विज्ञान व्रत जी, दिल्ली को ““राव महेन्द्रमान सिंह जी स्मृति सम्मान-२०१८”” व श्री
देवकी दन जी कुम्हेरिया, गोवर्धन को “श्री रामशरण जी पीतलिया स्मृति सम्मान-२०१८”” के साथ शॉल, उत्तरीय, कण्ठहार, मेवाड़ी पगड़ी, श्रीफल, श्रीनाथजी का प्रसाद, श्रीनाथजी की छवि व सम्मान पत्र के साथ पाँच हजार एक सौ की नकद राशि से अभिनंदित किया गया। इसी क्रम में श्रीमती बानो जी सरताज, चन्द्रपुर को ““श्री गोपेन्द्र नाथ शर्मा स्मृति सम्मान-२०१८””, श्री रविजी शतपथी, अकरपडा व श्रीमती निर्मलाबाला जी मिश्र, अकरपडा को ““श्री श्याम लाल शर्मा स्मृति सम्मान-२०१८””, भागवत विदुषी कीर्ति किशोरीजी, वृन्दावन को ““श्री गया प्रसाद शर्मा स्मृति सम्मान-२०१८”” व श्री लोकेश कुमार सोनी, श्रीनाथद्वारा को ““श्रीमती शशिकला मेहता स्मृति सम्मान-२०१८”” के साथ शॉल, उत्तरीय, कण्ठहार, मेवाड़ी पगड़ी, श्रीफल, श्रीनाथजी का प्रसाद, श्रीनाथजी की छवि व सम्मान पत्र के साथ दो हजार एक सौ की
नकद पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
ब्रजभाषा उपनिषद के अन्तर्गत ‘चन्द्र सखी भज बालकृष्ण छवि’ पर श्री राधागोविंद जी पाठक, बलदेव, ‘राजस्थान के ब्रजभाषा कवियों का काव्य’ पर श्री रामखिलाड़ी जी स्वदेशी, रेपुरा जाट, ‘श्री कृष्ण भक्त कवियों की भाषा’ पर श्री विट्ठल जी पारीक जयपुर, ‘ब्रज भाषा का सर्वव्यापी व्यवहार’ पर डॉ. अंजीव अंजुम, दौसा ने शोधपरक आलेख का वाचन किया गया। सम्मान के क्रम में डॉ. ओंकारनाथ जी द्विवेदी, सुल्तानपुर, डॉ. अमरसिंह जी सैनी, मथुरा, श्री प्रकाशचंद्र जी पाराशर, डीग, श्री राधाकृष्ण जी सैनी, कंजौली, श्री दुलीचंद जी लोधा, कामवन, श्री गिर्राजप्रसाद जी मधुर, डीग,
श्री दरियावसिंह जी राजपूत ‘ब्रज कण’, मोदी नगर, श्री कृष्णकुमार जी यादव ‘कनक’, गुंदाऊ, श्री राजकुमार जी ‘राज’, आगरा, व शून्य आकांक्षी जी, कोटा को ““ब्रजभाषा विभूषण”” की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। सम्मान में शॉल, उत्तरीय, कण्ठहार, मेवाड़ी पगड़ी, श्रीफल, श्रीनाथजी का प्रसाद, श्रीनाथजी की छवि, व सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में श्रीनाथजी मन्दिर के मोती महल प्रांगण में “अखिल भारतीय ब्रजभाषा कवि सम्मेलन” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गोस्वामी १०५ श्री विशाल बाबा के कर कमलों से हरसिंगार के सद्य प्रकाशित प्रकीर्णनांक वर्ष २० अंक १-२ का लोकार्पण किया गया। श्री विशाल बाबा द्वारा प्रतिभागी
कवियों को शॉल, उत्तरीय व श्रीनाथजी का प्रसाद प्रदान कर स्वागत किया गया। कवि सम्मेलन में श्री राधागोविंद जी पाठक, बलदेव, श्री विट्ठल जी पारीक, जयपुर, श्री ब्रजेन्द्र जी चकोर, सरमथुरा, श्री भूपेन्द्र जी भरतपूरी, जयपुर, श्री हरिओम जी ‘हरि’, भरतपुर, श्री राम खिलाड़ी जी स्वदेशी, रेपुरा जाट, श्री शिवसागर जी शर्मा, आगरा, डॉ. अंजीव जी अंजुम, दौसा, डॉ. भगवान जी मकरंद, कामवन, श्री सुरेन्द्र जी सार्थक, अलवर, सुश्री रचना जी गोस्वामी, आगरा व श्री गिरीश जी विद्रोही श्रीनाथद्वारा ने काव्य पाठ किया। देर रात तक चले कवि सम्मेलन का सरस व सफल संचालन श्री सुरेन्द्र जी सार्थक, अलवर ने किया। दो दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता श्री रवि जी शतपथी ने की। मुख्य अतिथि श्री सुरेन्द्र जी सार्थक व विशिष्ट अतिथि श्री बलवन्त सिंह जी यादव, श्री वीरेन्द्र जी लोढ़ा, श्री उमादत्त जी भारद्वाज, श्री भगवत सिंह जी मयंक और श्री अरविंद कुमार जी देवपुरा थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों
द्वारा माँ शारदा व प्रभु श्रीनाथजी तथा बाबूजी श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
प्रथम सत्र में सवैया “सुहावन लागे” व “चकोर जुं चन्दकी” तथा कवित्त “शोभा मनभामनी” व “निसान है” पर समस्या पूर्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें श्री जितेंद्र जी सनाढ्य, श्री गिर्राजप्रसाद जी मधुर, श्री सर्वोत्तम जी त्रिवेदी ‘लघु’, श्री शिवसागर जी शर्मा, श्रीमती नीना जी शर्मा, श्री प्रकाशचंद्र जी पाराशर, श्री हरिओम जी ‘हरि’, श्री दरियावसिंह जी राजपूत, आचार्य श्री विष्णुशरण जी भारद्वाज, श्री राधागोविन्द जी पाठक, श्री भगवान जी मकरंद, श्री विट्ठल जी पारीक, डॉ. अंजीव जी अंजुम, श्री दुलीचंद जी लोधा, श्री देवकीनंदन जी कुम्हेरिया, श्री कमल सिंह जी कमल, डॉ. अमरसिंह जी सैनी, श्री अनिल जी, श्री कृष्णकुमार जी यादव ‘कनक’, श्रीमती निर्मलाबाला जी मिश्र ने छन्द प्रस्तुत किये। सम्मान के क्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों को, जिन्होंने सर्वोच्च अंक प्राप्त कर कीर्तिमान स्थापित किया, उन्हें ““विद्यार्थी रत्न”” से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले विद्यार्थी निम्नांकित है। श्री बुरानुद्दीन बोहरा, सुश्री हर्षिता सनाढ्य, श्री सखाराम सिरवी, सुश्री निर्मला कुँवर चौहान, सुश्री करिश्मा पुरोहित, सुश्री हीना माली, सुश्री यशोदा कुमावत, सुश्री नीतू पालीवाल, सुश्री रीना कुँवर देवड़ा, श्री संकेत कुमार, श्री आकाश सोनी, सुश्री वर्षा टेलर, सुश्री वैशाली जोशी, सुश्री प्रियल माहेश्वरी, सुश्री दीक्षा जोशी तथा श्री अशरफ मंसूरी। सभी विद्यार्थियों को उत्तरीय, कण्ठहार व सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। द्वितीय व समापन सत्र महाकवि श्री बलबीर सिंह जी करुण की अध्यक्षता में प्रारम्भ हुआ। इस सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी के सचिव एवं राजस्थान संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. जगदीशनारायण जी विजय रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि श्री देवनारायण जी, श्री देवकीनंदन जी कुम्हेरिया व आचार्य रामदेव जी दीक्षित रहे।
साहित्य मंडल विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्र-भाषा गान व गोपी नृत्य से आरम्भ इस सत्र में श्री राधागोविन्द जी पाठक ने सरस्वती वन्दना और श्री विट्ठल जी पारीक ने ब्रज वन्दना प्रस्तुत की। ब्रजभाषा उपनिषद के अन्तर्गत श्री शिवसागर जी शर्मा ने ‘कृष्ण भक्त कवि और साम्प्रदायिक सद्भाव’ पर, श्री सुरेन्द्र जी सार्थक ने ‘भक्त कवि श्री ध्रुवदास जी’ पर, श्री हरिओम जी ‘हरि’ ने ‘भक्त कवि मूलकदास जी की ब्रजभाषा सेवा’ पर और श्री भगवान जी मकरंद ने ‘आदि वृन्दावन कामवन: ब्रज का सांस्कृतिक केंद्र’ विषय पर शोधपरक आलेख प्रस्तुत किए।
सम्मान के क्रम में श्री बलवन्तसिंह जी यादव, बेड़िया कमालपुर को “रा ष्ट्र सेवा रत्न” और श्री विवेक प्रकाश जी सक्सेना, मथुरा को “संगीत रत्न” की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। महाकवि श्री बलबीर सिंह जी करुण को शॉल, उत्तरीय, कण्ठहार, मेवाड़ी पगड़ी, श्रीफल, श्रीनाथजी का प्रसाद, श्री नाथजी की छवि, अभिनन्दन पत्र और ग्यारह हजार रुपये की नकद राशि प्रदान कर ““श्री गणेशवल्लभ राठी स्मृति सम्मान-२०१८”” व “साहित्य मार्तण्ड” की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
““हिन्दी साहित्य मनीषी”” की मानद उपाधि से समादृत श्री रामरतन प्रसाद सिंह जी रत्नाकर, मकनपुर, डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद जी गोस्वामी, मथुरा, श्री दिनेश कुमार जी पांडेय, कांकरोली, आचार्य नीरज जी शास्त्री, मथुरा, डॉ. अमिता जी दुबे, लखनऊ, डॉ. विद्योत्तमा जी मिश्र, वाराणसी, डॉ. शीताभ जी शर्मा, पाहुवा, डॉ. बीनारानी जी गुप्ता, लखीमपुर खीरी को शॉल, उत्तरीय, कण्ठहार, मेवाड़ी पगड़ी, श्रीफल, श्रीनाथजी का प्रसाद, श्रीनाथजी की छवि और उपाधि पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. अंजीव जी अंजुम, श्री वीरेन्द्र जी लोढ़ा, श्रीमती रेखा जी लोढ़ा ‘स्मित’, श्री प्रद्युम्नप्रकाश जी देवपुरा, श्री अनिरुद्ध जी देवपुरा, श्री नौरतमल जी वर्मा, श्री महेश चन्द्र जी पालीवाल तथा विद्यालय के अध्यापकों व विद्यार्थियों का महती योगदान रहा।
कार्यक्रम का सरस व सफल संचालन साहित्य मंडल के प्रधानमंत्री श्री श्याम प्रकाश देवपुरा और श्री विट्ठल जी पारीक ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार प्रदर्शन श्री श्याम प्रकाश देवपुरा द्वारा किया गया।

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