छत्तीसगढ़ में क्राउडफंडिंग की सुबह

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-ललित गर्ग-  
तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों, जनकल्याण उपक्रमों और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग क्राउडफंडिंग का सहारा ले रहे हैं। यह भारतीय चन्दे का आयात किया हुआ एक स्वरूप है, एक प्रक्रिया है। इसमें जहां पारदर्शिता होती है वही जनता के घन के दुरुपयोग होने की संभावनाएं नगण्य हो जाती है। आज जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार को समाप्त करने एवं सार्वजनिक क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिये कमर कसे हुए है, ऐसे समय में सरकारी स्तर पर क्राउडफंडिंग को बढ़ावा मिल सकता है। इस बात के संकेत दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में छतीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित सीएसआर के राष्ट्रीय सम्मेलन में तब मिले जब देश के सबसे बड़े क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु की कार्ययोजना एवं कार्यप्रणाली को सुनने के बाद समारोह के मुख्य अतिथि युवा सांसद अभिषेक सिंह ने छत्तीसगढ़ में सरकारी स्तर पर इसे लागू करने की बात कही और इसके लिये इम्पैक्ट गुरु के कार्यकारी अधिकारी पीयूष जैन को आमंत्रित किया।
भारत में ‘क्राउडफंडिंग’ का चलन तेजी से बढ़ रहा है। तमाम सार्वजनिक योजनाओं और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग इसका सहारा ले रहे हैं। अनेक हिन्दी फिल्में क्राउडफंडिंग के सहारे बनी हंै। अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है। विशेषतः चिकित्सा के लिये लोग इसका सहारा बढ़-चढ़कर ले रहे हैं। पुणे के कुछ युवाओं ने इसके लिए ‘इग्नाइट इंटेंट’ नाम की वेबसाइट बनाई है। लेकिन अनेक क्षेत्रों में प्रभावी प्रस्तुति एवं हिस्सेदारी के लिये क्राउडफंडिंग मंच इम्पैक्ट गुरु का लोकार्पण करते हुए केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका गांधी ने कहा था कि वे भी चाहती हैं कि सरकार के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों और आम नागरिक को सेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिये क्राउडफंडिंग को बढ़ावा देना चाहिए। इम्पैक्ट गुरु की भावी योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में क्राउडफंडिंग न केवल जीवन का हिस्सा बनेगा बल्कि अनेक बहुआयामी योजनाओं को आकार देने का आधार भी यही होगा।
सरकारी स्तर पर क्राउडफंडिंग को अपनाने एवं लागू करने के अनेक फायदें हैं। पीयूष जैन का मानना है कि क्राउडफंडिंग भारत को दुनिया में एक अलग पहचान दिलायेगी। इसको गति देने के लिए वे इम्पैक्ट गुरु की कार्ययोजना को आकार देने के लिये सक्रियता से जुटे हैं। इम्पैक्ट गुरु जागरूकता लाकर लोगों में दान की एक नई परम्परा को विकसित करेगा। दान देने के लिए हमें लोगों को प्रेरित करना है। पीयूष जैन का मानना है समाज में जो सुविधासंपन्न लोग हैं उनकी भी समाज के प्रति जिम्मेदारी बनती है अतः अपनी आय का कुछ हिस्सा इन गरीबों के उत्थान एवं उन्नयन में खर्च करना चाहिए। जैन कहते हैं कि बड़े दानदाता ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे दान को प्रोत्साहन किया जायेगा। लोगों में भी दान देने का प्रचलन बढ़ाना हमारा लक्ष्य है। विशेषतः नवयुवकों मंे जनकल्याण एवं सामाजिक भागीदारी के लिए दान की परम्परा के प्रति आकर्षण उत्पन्न किया जाएगा, जिसके माध्यम से सेवा और जनकल्याण के नये उपक्रम संचालित हो सकेंगे।
राजनीति से देश को नयी पहचान दिलाने के लिये तत्पर युवा सांसद अभिषेक सिंह अपने संसदीय क्षेत्र राजनांदगांव के लिये विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिये देश के बड़े औद्योगिक एवं व्यापारिक घरानों को आकर्षित एवं आमंत्रित करने के लिये दिल्ली में सीएसआर का आयोजन करके यह जाहिर किया है कि कोरी सरकार पर निर्भरता से विकास नहीं होगा, जनभागीदारी जरूरी है। उन्हें क्राउडफंडिंग की प्रक्रिया उपयोगी लगी और वे इस छत्तीसगढ़ में लागू करने के लिये उत्साहित दिखे। संभवतः छत्तीसगढ़ देश का पहला प्रांत होगा जहां क्राउडफंडिंग को लागू करने का अवसर प्राप्त होगा।
‘चंदा’ हमारे देश की बहुप्रचलित एवं अति प्राचीन परंपरा है. हिंदू धर्म में सत्संग, दुर्गा पूजा, कांवड यात्रा, अनुष्ठान, यज्ञ जैसे कार्यक्रमों के सफल आयोजन का आधार चंदा ही रहा है। साथ-ही-साथ शिक्षा संस्थान, अस्पताल, धर्मशाला, वृद्धाश्रम, महिला आश्रम आदि भी चन्दे की सहायता से पूरे होते रहे हंै। इसके अलावा दूसरे धर्मों में भी चंदा मांगकर सार्वजनिक एवं आस्था के कार्य पूरे किए जाते रहे हैं। भारत में प्रचलित किसी सार्वजनिक आयोजन को लेकर लिए और दिये जाने वाले ‘चंदे’ का चलन विदेशों में ‘क्राउडफंडिंग’ के रूप में तेजी से बढ़ा। चंदे एवं क्राउडफंडिंग में जो मूल फर्क देखने को मिलता है, वह यह है कि चन्दा प्रायः धार्मिक कार्यों के लिये ही दिया जाता रहा है जबकि क्राउडफंडिंग का क्षेत्र व्यापक है और इसमें धार्मिक कार्यांे के साथ-साथ अन्य सार्वजनिक कार्य या व्यावसायिक कार्य जैसे पुल बनवाना, मोहल्ले की सफाई कराना, सड़क बनवाना या फिर फिल्म बनाने का काम हो, या पत्रकारिता से जुड़ा उपक्रम हो, किसी की असाध्य बीमारी का इलाज हो या ऊंच शिक्षा, इनमें क्राउंडफंडिंग का इस्तेमाल अब आम हो गया है। छत्तीसगढ़़ सरकार अपनी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लिये क्राउडफंडिंग का सहारा लेना चाहती है। सरकारी फण्ड से जनता का भला एवं विकास की योजनाओं को लागू करना जटिल होता जा रहा है, इसलिये सरकारे भी चंदा जुटाकर विकास को तीव्र गति देना चाहती है और इसके लिये वह क्राउंडफंडिंग जैसे आधुनिक दान जुटाने के रास्तों का इस्तेमाल करने का मन बना रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी क्राउडफंडिंग के जरिये सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक सशक्त बनाने के लिये उत्साहित दिखाई देते हैं। आनलाइन के इस युग में क्राउडफंडिंग का भविष्य उज्ज्वल ही दिखाई दे रहा है। नेपाल में आए भूकंप पीड़ितों के लिए एक आठ साल के बच्चे ने 26 हजार अमेरिकी डॉलर (लगभग 26 लाख नेपाली रुपये) जुटाने का कारनामा कर दिखाया है। उसने यह काम लोगों से चंदा एकत्रित (क्राउडफंडिंग) करके किया है। मैरीलैंड के रहने वाले नीव सराफ ने इसके लिए अपने मित्रों समेत उनके परिजनों से संपर्क किया। हरियाणा के सिरसा जिले के एक गांव में गांववाले क्राउडफंडिंग के जरिए 1 करोड़ रुपये इकट्ठा कर एक पुल का निर्माण करा रहे हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हंै जो क्राउडफंडिंग की उजली सुबह की आहट कहे जा सकते हैं।
पीयूष जैन के इस कथन में सच्चाई है कि ‘सरकार हमारे तमाम मसले नहीं सुलझा सकती और जनता अपने बीच की समस्याओं के समाधान के लिये खुद ही आगे आना चाहती है। मध्य और उच्च वर्ग के लोग न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र बल्कि जनकल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं के लिये दान करना चाहते हैं। लोग एक-दूसरे की मदद भी करना चाहते हैं। लगता है आने वाले समय में छोटे-छोटे दान बड़ी योजनाओं को आकार देने के माध्यम बनेंगे।
पहले भारत में ऑफलाइन क्राउडफंडिंग होती थी पर अब समय बदल रहा है लोग ऑनलाइन क्राउडफंडिंग को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। चंदे से हुई शुरुआत भले ही आज के समय में क्राउडफंडिंग के रूप में विकसित एवं लुभावनी हो गई है, लेकिन भारत जैसे देश में बिना जागरूकता इसकी राह अभी बहुत आसान नजर नहीं आ रही है। इसीलिये पीयूष जैन भारत सरकार को क्राउडफंडिंग के लिए नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि सरकार को क्राउडफंडिंग के लिए योजना बनानी चाहिए। क्राउडफंडिंग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लोग जिन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते उनके लिए दान करना नहीं चाहते हैं। इस स्थिति में लोगों को दान कराने के लिए राजी करना चुनौती भरा होता है। जब सरकार की ओर से इसको प्रोत्साहन मिलेगा और इसकी सुनियोजित योजना सामने आएगी तो लोगों का विश्वास जागेगा।
क्राउडफंडिंग भारत में काफी सफल होगा। यहां अमीर-गरीब के बीच गहरी खाई है। यह उसे पाटने में अहम भूमिका निभा सकता है, इसके जरिए अमीर मिलकर गरीबों की मदद कर सकते हैं। इससे उन लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा, जो पैसों की कमी की वजह से बुनियादी जरूरतों से महरूम रह जाते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि तकनीक के मामले में भारत की दुनिया में अलग पहचान है। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम भूमिका निभा सकती है। क्योंकि क्राउडफंडिंग से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे हैं जो कि अब कला, विज्ञान और मनोरंजन को समृद्ध करने एवं सरकार की योजनाओं के लिये भी धन जुटाने का जरिया हो जायेगी। ऐसा होने से क्राउडफंडिंग की उपयोगिता एवं महत्ता सहज ही बहुगुणित होकर सामने आयेंगी। हम जहां रहते हैं वहां एक-दूसरे की मदद के बिना समाज नहीं चल सकता. अगर लोग इस तरह की मदद के लिए आगे नहीं आएंगे तो पैसों की कमी के चलते अनेक सामाजिक और सार्वजनिक इकाइयां मरनासन्न होकर रसातल में चली जायेगी। छत्तीसगढ़ प्रांत की सरकार यदि क्राउडफंडिंग के लिये जागरूक हुयी है तो यह शुभ भविष्य का सूचक है। इसके लिये छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह बधाई के पात्र होंगे।

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