माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अनुकरणीय पहल

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जयपुर : राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सिद्ध कर दिया है कि उनके हृदय में बाल कल्याण व बाल साहित्य उन्नयन के लिए विशेष सम्मान हैं। वर्ष 2019 – 20 के बजट भाषण प्रस्तुत करते हुए राजस्थान के  माननीय मुख्यमंत्री  श्री अशोक गहलोत ने कहा कि, “प्रदेश में  बाल साहित्य सम्बंधित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने औऱ बाल साहित्यकारों के सहयोग के लिए मैं राज्य में जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी  के गठन की घोषणा करता हूँ “
 मुख्यमंत्री की इस घोषणा से राजस्थान सहित सम्पूर्ण भारत के बाल साहित्यकारों में हर्ष व्याप्त हो गया और माननीय अशोक गहलोत को बधाई देते हुए सम्पूर्ण भारत के पहली बाल साहित्य अकादमी के गठन के लिए श्रेय देते हुए मंगल कामनाएं की।
      राजस्थान के बाल साहित्य जगत में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां इस वर्ष रही पहला बाल साहित्य अकादमी की घोषणा व राजस्थान के वरिष्ठ बाल साहित्यकार श्री गोविंद शर्मा ,संगरिया के बाल कहानी संग्रह  “काचू की टोपी” को केंद्रीय बाल साहित्य अकादमी द्वारा सम्मान के लिए चुना जाना। राजस्थान के किसी बसल सहित्यकार की हिन्दी पुस्तक पर पहली बार यह सम्मान घोषित हुआ है।
      राजस्थान में बाल साहित्य अकादमी की मांग की परिकल्पना भी ख्यातनाम  वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोविंद शर्मा जी ने की व राजस्थान के कई साहित्यकारों से मुख्यमंत्री राजस्थान को इस बाबत ज्ञापन  भेजने के लिए प्रेरित किया। संयोग से वरिष्ठ बाल साहित्यकार राजकुमार जैन राजन जी के बेटे के शुभविवाह के अवसर पर देश के के ख्यातनाम साहित्यकारों सहित मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी, ख्यातनाम साहित्यकार, पत्रकार श्री फारूक आफरीदी भी वहां पधारे ।समस्त साहित्यकारों ने बाल साहित्य अकादमी के गठन की बात उनके सामने रखी। फिर श्री गोविंद शर्मा व राजकुमार जैन राजन  का राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के एक कार्यक्रम में शिरकत करने जयपुर जाना हुआ। वहां भी यह मांग पुरजोर रखी गई। आदरणीय फारूक आफरीदी जी ने पूरी रुचि लेकर इस मांग व ज्ञापनों को  मुख्यमंत्री तक पहुंचाया और तुरन्त बजट सत्र में इसकी घोषणा भी हो गई। सम्पूर्ण बाल साहित्य जगत राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  सहित विशेषाधिकारी फारूक आफरीदी जी का इस कार्य के लिए आभार प्रकट करता है। श्री गोविंद शर्मा, श्रीराजकुमार जैन राजन,  श्री कृष्णकुमार आशु आदि की सक्रिय भूमिका के लिए आभार प्रकट करता है।
   राजस्थान में बाल साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही हैकेवम यहां बाल कल्याण व बाल साहित्य उन्नयन व्यक्तिगत स्तर पर भी व्यापक गतिविधियां संचालित होती है जितनी पूरे देश में कही नही होती है। राजस्थान में बाल साहित्य अकादमी के गठन के प्रयास वर्षों से हो रहे हैं। वर्ष 2001 में, 7 अक्टूबर को  चित्तौड़गढ़ में प्रथम राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मान समारोह का भव्य आयोजन बाल साहित्य के पुरोधा डॉ. राष्ट्रबन्धु जी की प्रेरणा से हुआ था।इस आयोजन में बाल साहित्य के ख्यातनाम वरिष्ठ बाल साहित्यकारों ने शिरकत की।तब डॉ ओमानन्द सरस्वती, डॉ राष्ट्रबन्धु, कृष्णकुमार अष्ठाना, डॉ. भगवती लाल व्यास, डॉ महेंद्र भानावत, दीनदयाल शर्मा, डॉ जयप्रकाश ज्योतिपुंज, डॉ श्री कृष्ण जुगनू, घमंडी लाल अग्रवाल, डॉ शम्भूनाथ तिवारी, कृपाशंकर शर्मा अचूक, डॉ अजय जनमेजय आदि की उपस्तिथी में चित्तोड़गढ़ में राष्ट्रीय बाल साहित्य अकादमी की घोषणा की गई जिसका संयोजक बाल साहित्यकार राजकुमार जैन राजन को बनाया गया। जिसमें राजन ने सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।दिल्ली, लखनऊ, कानपुर में इस बाबत कई बाल साहित्यकारों से संपर्क किया पर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं व पद लिप्सा के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। अलबत्ता राजकुमार जैन राजन द्वारा बाल साहित्य उन्नयन व बाल कल्याण की अनेक योजनाओं का निर्बाध संचालन तब से अनवरत किया जा रहा है जिसमे राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मान समारोह, जिसमे उत्कृष्ट बाल साहित्य सृजन करने वालों को एक लाख रुपये से ज्यादा की नगद राशि सम्मान स्वरूप प्रदान की जाती है , पुस्तक प्रकाशन हेतु बाल साहित्यकारों को अनुदान, बाल साहित्य के लिए काम करने वाली संस्थाओं को आर्थिक सहयोग व सम्मान स्थापना, आकाशवाणी पर नन्ही दुनिया कार्यक्रम  प्रायोजक, देश की कई पत्रिकायन को बाल साहित्य प्रकाशन के लिए प्रेरित करना, स्वयम के संपादन में ख्यातिनाम पत्रिकाओ के बाल साहित्य विशेषांक प्रकाशित करना व बालकों, बाल साहित्य शोध केंद्रों, देश विदेश के विभिन्न विद्यालयों में लाखों रुपये मूल्य की पुस्तकें निशुल्क भेंट करना आदि प्रकल्प स्वयम  की निजी आय से ही अनवरत चलाये जा रहे हैं।
   इनके अतिरिक्त भी राजस्थान में कई बाल साहित्य के रचनाकार उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं जिनमे सलूम्बर की डॉ. विमला भंडारी पिछले 10 -11 सालों से  सलिला संस्था और स्वतंत्रता सैनानी ओंकारलाल शास्त्री के परिजनों के सहयोग  से इस कार्य में लगी हुई हैऔर प्रतिवर्ष सलूंबर में राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन किया जा रहा है। मंच से विधायक और सांसद के समक्ष राजस्थान में बाल साहित्य अकादमी की स्थापना को लेकर आवाज उठाई जाती रही। राजस्थान साहित्य अकादमी के आर्थिक सहयोग से नेशनल बुक ट्रस्ट के साथ जुड़कर और बाल प्रहरी ,उत्तराखंड के साथ  सलिला संस्था निरंतर कार्य करती रही। बाल साहित्य की पुस्तकों के लोकार्पण, पत्र वाचन, पुस्तक प्रदर्शनी, पुरस्कार, सम्मान, बच्चों की कार्यशाला जैसी कई गतिविधियां निरंतर यहां एक दशक से गतिमान रही है जो उल्लेखनीय है। *सलिल प्रवाह* जैसी वार्षिकी का प्रकाशन जो बाल साहित्य पर केंद्रित है एक दशक से हो रहा है। अब तक तीन अंक बाल साहित्यकार केंद्रित निकल चुके हैं।
भीलवाड़ा में तो बाल वाटिका के माध्यम से  डॉ भेरूलाल गर्ग को  कई
वर्ष से भी अधिक हो गए हैं बाल साहित्यकार सम्मेलन करते हुए। ‘बाल वाटिका’ बाल साहित्य की पत्रिका है जो भीलवाड़ा से निरंतर प्रकाशित हो रही है। इसी तरह की गतिविधियाँ राजसमंद के कांकरोली में भी  श्री संचय जैन द्वारा “अणुविभा” के माध्यम से निरंतर पूरी समग्रता और समर्पण से चल रही है। अब तो “बच्चों की देश” पत्रिका भी यहां से निकलने लगी है।
उदयपुर की युगधारा संस्था ने भी बाल साहित्यकार सम्मेलन किए हैं। नाथद्वारा ने भी बाल साहित्यकार सम्मेलन को अपना कार्यक्रम का हिस्सा बनाया है।
हनुमानगढ़ जिले के  ग्राम संगरिया से वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोविंद शर्मा की बाल साहित्य की 32 उत्कृष्ठतम पुस्तकों के प्रकाशन के साथ ही  कई बाल साहित्य व बाल साहित्य के कई कार्यक्रम अपने ग्रामोत्थान विद्यापीठ में करवाये है। आपको इस वर्ष केंद्रीय बाल साहित्य अकादमी  द्वारा
 इक्यावन हजार रुपये राशि  के बाल साहित्य सम्मान के लिए चुना गया है जो सम्पूर्ण बाल साहित्य जगत के लिए गौरव की बात है।राजस्थान सरकार द्वारा ऐसे समर्पित वरिष्ठ साहित्यकार को  बाल साहित्य अकादमी के निदेशक के पद पर सुशोभित कर संम्मानित करना चाहिए ।
     श्रीगंगानगर में कृष्ण कुमार आशु ने बाल साहित्यकार सम्मेलन और पुरस्कार भी प्रारंभ किए हैं जो निरंतर जारी है और आगामी वर्षों में उनकी बाल साहित्य को लेकर भी कई योजनाएं हैं। जयपुर की साहित्य समर्था संस्था की नीलिमा टिक्कू ने इस वर्ष से बाल साहित्य पुरस्कार प्रारंभ किया है।
 राजस्थान की धरती से निरंतर बाल साहित्य की गूंज उठती रही है। श्रेय लेने व अपने आप को प्रोजेक्ट करने, लॉबिंग के काम अभी से शुरू हो गए हैं। हर बाल साहित्यकार यह जताने में लगा है कि हमारे प्रयास रंग लाये और बाल साहित्य अकादमी की घोषणा हुई। खेर जो भी हुआ हो, सबका सामूहिक प्रयास व सहयोग इस घोषणा की क्रियान्विति में बहुत आवश्यक हैं। स्वयम को श्रेष्ठ साबित करने व दुसरो को तुष्ट समझने की मानसिकता कहीं नुकसान न कर बैठे।
माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से निवेदन है कि अकादमी के गठन के क्रियान्वयन को सक्रियता से गति दें। इतिहास में आपका नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। अवसरवादी रचनाकारों की पहचान कर वरिष्ठ, समर्पित , सक्रिय साहित्यकारों का सहयोग लें। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए विशेषधिकारी श्री फारूक आफरीदी  जी  जैसे निष्ठावान लोंगो की सेवाएं भी आवश्यक है। एक  बार फिर राजस्थान में बाल साहित्य अकादमी के गठन की घोषणा करने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार। आपका यह कदम अन्य राज्य सरकारों को भी बाल साहित्य गठन की प्रेरणा देगा।

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