दिल्ली के जबांज हेलमेट मैन

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दिल्ली:- (अनीता गुलेरिया) दिल्ली में हेलमेट मैन के नाम से पहचाने जाने वाले संदीप कुमार अपने वेतन के लगभग आधा हिस्सा हेलमेट बांटने पर खर्च करते हैं | तकरीबन दो साल के अंदर 500 से ज्यादा लोगों को हेलमेट गिफ्ट कर चुके हैं | संदीप दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात हैं | उनका वेतन चालीस हजार रूपये महीना है | सब लोग प्यार से उन्हें हेलमेट मैन और हेलमेट भाई भी कहते हैं | 22 दिसंबर को शादी की दसवीं सालगिरह पर उन्होंने और उनकी पत्नी ने करीब 20 महिलाओं को हेलमेट गिफ्ट किये | संदीप ने इस पर करीब सत्रह हजार खर्च किए | इन महिलाओं के चालान उन्होंने खुद ही काटे थे | बिहार के मूल निवासी संदीप कहते हैं | ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि नियम तोड़ने वालों के चालान का पैसा सरकारी खजाने में जमा हो | और फिर हेलमेट देकर इन चालान कटने वाले लोगों को सडक नियमो के प्रति जागरुक किया जाए | जो आए दिन नियमों की अनदेखी करते हुए सड़कों पर वाहन चलाते हुए,अपनी जिंदगी को खुद ही खतरे के मोड़ पर रखते है | संदीप ने बताया कि पहले वह सालगिरह,जन्मदिन,होली, दीवाली के त्योौहार पर हेलमेट बांटते थे | लेकिन अब वह हर तरह के त्यौहार पर हेलमेट बांटने लगे हैं | किसी आयोजन में भी जाते हैं तो हेलमेट ही गिफ्ट करते हैं | संदीप ने अपनी शादी की सालगिरह पर पहली बार उन ऐसी महिलाओं को चुना जिनका हेलमेट ना पहनने के कारण चालान कटा हुआ था | संदीप के अनुसार, मैं हर दिन होने वाले 413 से भी ज्यादा सड़क हादसों को लेकर बेहद आहत हूं | दोपहिया चालकों की सबसे ज्यादा मौत एक्सीडेंट के दौरान हेड-इंजरी होने से ही होती है | इसलिए मैंने दो साल पहले संकल्प लिया था | मेरे घर में कोई भी आयोजन होगा | अपने परिवार के साथ मिलकर लोगों को हेलमेट बांटूगा | मैं घूमने फिरने और दूसरे गैरजरूरी कामों में पैसे खर्च करने की बजाए,हेलमेट खरीदता हूं | मेरा आधा वेतन इसी में खर्च हो जाने के बावजूद,मेरी पत्नी मेरे इस काम में मेरा पूरा सहयोग देती है | मेरा यह मानना है हर नाके पर ड्रंकेन – ड्राइविंग को चेक करने जैसे उपायों से सड़क हादसे कम होंगे | इस जांबाज सिपाही के बुलंद हौसलों को हमारा मीडिया-ग्रूप सैल्यूट करता है |

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