राष्ट्रीयतापूर्ण विशेष रचना- दोहे

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हर क्षण उल्लासित हुआ,गूंजा मंगलगान !
हर जन औ’ हर जीव को,मिलता अब सम्मान !!   FB_IMG_1480511935203

भावों की सरिता बही,नगर और हर गांव !
तीन रंग से मिल रही,हमको मोहक छांव !!

देशभक्ति औ’ त्याग का,सभी ओर है शोर !
हर्ष,खुशी औ’ अमन से,नाचा मन का मोर !!

कुछ नारे,कुछ वायदे,जागी नव उम्मीद !
यही सभी को लग रहा,हो दीवाली- ईद !!

ज़मीं हमारी कह रही,जय जय जयतु किसान !
सीमा पर जो है डटा,वह प्रणम्य जवान !!

फलीभूत अब हो रही,कदम- कदम पर आस !
लोकतंत्र  पर कर रहा,जग सारा विश्वास !!

हरियाली दिखने लगी,फैला है उजियार !
सारा ही अब छंट गया,सदियों का अँधियार !!

जीवन फिर हरसा गया,उगीं कोंपलें ख़ूब !
नव विकास उत्थान की,दिखती पावन दूब !!

आज़ादी का पर्व यह,लाया फिर संदेश !
नित आगे बढ़ता रहे,मेरा भारत देश !!

—प्रो.शरद नारायण खरे

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