DPL द्वारा बाल गंगाधर तिलक जयंती के उपलक्ष्य में संगोष्ठी (वेबिनार)

0
170

2
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती के उपलक्ष्य में दिल्ली पब्लिक लाईब्रेरी द्वारा दिनांक 25 जुलाई 2020 को जन-साधारण हेतु संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाईब्रेरी बोर्ड द्वारा की गई तथा वक्ता के रूप में डॉ. विनोद बब्बर, वरिष्ठ साहित्यकार एवं डॉ. वेदव्रत तिवारी, सहायक प्राध्यापक, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय उपस्थित रहे ।

डॉ. रामशरण गौड़ द्वारा विषय की रूपरेखा रखते हुए श्रोताओं को बाल गंगाधर तिलक जी के जीवन संघर्ष से जुड़े कई किस्सों से रूबरू करवाया गया । उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख भूमिका निभाने वाले तिलक जी द्वारा दिए गए नारे “स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूंगा” का भी व्याख्यान किया । उन्होंने बताया कि तिलक जी ने शैक्षिक एवं सांस्कृतिक आंदोलनों के माध्यम से जन समूह में राष्ट्रीय एकता की ऊर्जा का संचालन किया । आध्यात्मिक दृष्टि से भी तिलक जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक “गीता रहस्य” इसका उत्तम उदहारण है जिसे सभी को पढ़ना चाहिए । उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तिलक जी द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला । साथ ही आज की परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सभी श्रोताओं से स्वदेशी वस्तुओं का ही प्रयोग करने का आग्रह किया ।

डॉ. विनोद बब्बर ने श्रोताओं को बताया कि बहुमुखी प्रतिभा के ज्ञानी तिलक जी ने “केसरी तथा मराठा” अखबारों के ज़रिए जन जन को जागृत एवं एकजुट किया । उन्होंने बताया कि जन साधारण को भारतीय उत्सवों से जोड़ने हेतु भी तिलक जी कार्यरत रहे । उन्होंने ही गणेश उत्सव को सामूहिक रूप से मनाने का प्रारंभ किया । बब्बर जी ने यह भी बताया कि तिलक जी मानवता को ईश्वर की सेवा के तुल्य मानने वाले व्यक्ति थे । उन्होंने श्रोताओं से कहा कि हम तिलक जी को सच्ची श्रद्धांजलि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर और दूसरों को भी ऐसा करने हेतु प्रेरित करके दे सकते हैं ।

डॉ. वेदव्रत तिवारी ने अपने वक्तव्य का आरंभ करते हुए श्रोताओं को बताया कि तिलक जी सच्चे राजनीतिज्ञ ही नहीं एक शिक्षक तथा समाज सेवक भी थे । उन्होंने तिलक जी के जीवन के कई उतार चढ़ावों को श्रोताओं से साझा करते हुए तिलक जी के जीवन का विस्तृत वर्णन भी प्रस्तुत किया । उन्होंने अपने वक्तव्य में तिलक जी के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं की चर्चा की ।

अंत में श्री आर. के. मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दि.प.ला. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

LEAVE A REPLY