DPL द्वारा गोस्वामी तुलसी दास जयंती के उपलक्ष्य में गोष्ठी (वेबिनार)

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दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा गोस्वामी तुलसी दास जयंती के उपलक्ष्य में दिनांक 27  जुलाई 2020 को गोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन किया गया I गोष्ठी डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के सानिध्य में आयोजित की गयी एवं अध्यक्ष के रूप में श्री महेश चंद शर्मा, पूर्व महापौर, दिल्ली नगर निगम व सदस्य, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड तथा वक्ता के रूप में डॉ. वेद प्रकाश, सहायक प्राध्यापक, हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय उपस्थित रहे I कार्यक्रम में डॉ. राम अवतार शर्मा, सदस्य, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड विशेष रूप से उपस्थित रहे I

श्री महेश चंद शर्मा द्वारा अपने अध्यक्षीय भाषण में श्रोताओं को बताया गया कि किस प्रकार गोस्वामी तुलसी दास जी ने रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, गीतावली, दोहावली, साहित्य रत्न जैसे महान ग्रंथों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपरा को जीवंत करने का उच्चतम कार्य किया है I उन्होंने श्रोताओं को बताया कि रामचरितमानस भारत ही नहीं पूरे विश्व में पूज्य है I उन्होंने यह भी कहा कि आज जो हम हिन्दू समाज का स्वरुप देख रहे हैं वह भी गोस्वामी तुलसी दास जी की ही देन है I

डॉ. वेद प्रकाश ने रामचरितमानस की अनेकों चौपाइयों के माध्यम से श्रोताओं को गोस्वामी तुलसी दास जी द्वारा तत्कालीन समाज को जागृत करने हेतु दिए गए ज्ञान पर विस्तृत रूप से चर्चा की I उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी का युग ऐसा युग था जब आस्थाएं विखंडित हो रही थीं, मूल्यों का पतन हो रहा था, मंदिर देवालय तोड़े जा रहे थे, समाज में त्रासदियाँ फैली हुई थी I ऐसे समय में गोस्वामी जी ने अपने विचारों और संदेशों के माध्यम से समाज में जाग्रति फैलाई I उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी की रचनाओ में वर्णित व्यक्ति चिंतन, राष्ट्रचिन्तन पर आधारित संकल्पों को हमें पुनः अपने जीवन में लाने की आवश्यकता है I अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने भारतवर्ष के युवाओं का आह्वाहन करते हुए उनसे अपने अतुल्य आत्मबल को जागृत कर उच्चतम जीवन मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया I

डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड ने सभी श्रोताओं को गोस्वामी जी रचित रामचरितमानस से बलिदान, कर्तव्यनिष्ठता, परित्याग आदि गुणों को अपनाकर चरित्र निर्माण करने का परामर्श दिया I उन्होंने सभी से निवेदन किया कि वह रामचरितमानस का पाठ करें तथा हमारी लुप्त हो रही परम्पराओं को पुनः अपनाकर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दें I

अंत में श्री आर. के. मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दि.प.ला. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

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