DPL द्वारा डॉ. एस. आर. रंगनाथन जयंती के अवसर पर संगोष्ठी (वेबिनार)

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दिनांक 13 अगस्त 2020 को डॉ. एस. आर. रंगनाथन जयंती के अवसर पर दिल्ली पब्लिक लाईब्रेरी द्वारा “लाइब्रेरियन का उत्तरदायित्व और व्यवहार” विषय पर संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री आर. के मीणा, पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा की गई तथा वक्ता के रूप में डॉ. गीता मल्होत्रा, कंट्री डायरेक्टर, रीड इंडिया उपस्थित रहीं ।

श्री आर. के. मीणा द्वारा संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के सभी कर्मचारियों, पठन- केन्द्रों के प्रभारियों हेतु पुस्तकालय विज्ञान के जन्मदाता श्री रंगनाथन की 78 वीं जयंती के अवसर पर प्रेषित शुभकामना सन्देश श्रोताओं से साझा करते हुए बताया कि श्री रंगनाथन युगों तक स्मरणीय रहेंगे l उन्होंने न केवल पुस्तकालयों को एक नया स्वरूप दिया, बल्कि लाइब्रेरियनों को सुविधा से पाठकों को पुस्तक उपलब्ध कराने और पाठकों को सुगमता से पुस्तक प्राप्त करने का मार्ग सुगम किया l सूचना क्रांति के प्रेरणापुरुष के रूप में वे सर्वथा समादरणीय रहेंगें l

डॉ. गीता मल्होत्रा ने श्रोताओं को कहा कि प्रत्येक लाइब्रेरियन को अपनी सेवाओं का प्रतिपादन करते हुए डॉ. एस. आर. रंगनाथन द्वारा दिए गए पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियमों का पालन करना चाहिए।  उन्होंने बताया कि एक लाइब्रेरियन को विभिन्न विषयों का ज्ञान होना अत्यावश्यक है क्योंकि उन्हें विभिन्न विषय क्षेत्रों से संबंधित पाठकों की विभिन्न शैक्षिक/ मनोरंजक जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता होती है।  उन्होंने बताया कि पुस्तकालय एक मंदिर के समान है अतः लाइब्रेरियन को हमेशा इस मानसिकता का होना चाहिए कि वे अपने पाठकों की मदद कैसे कर सकते हैं, कैसे कम से कम समय में पाठकों को अधिक से अधिक जानकारी प्रदान की जा सकती है।  यह लाइब्रेरियन की जिम्मेदारी है कि वह हर प्रकार/ रूप की सूचना को एकत्रित करे और पाठकों को आसानी से उपलब्ध कराए।  साथ ही, लोगों को पुस्तकालय के प्रयोग हेतु जागरूक करना भी एक लाइब्रेरियन का ही कर्तव्य है। उन्हें समाज के लोगों में पढ़ने की आदतें विकसित करने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

श्री आर. के. मीणा ने अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. एस. आर. रंगनाथन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके बाल्यकाल, शिक्षण, उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकों, उन्हें प्रदत्त पुरस्कारों आदि  के विषय में श्रोताओं को संक्षिप्त में बताया। उन्होंने पुस्तकालय क्षेत्र से जुड़े सभी श्रोताओं से आग्रह किया कि वे रंगनाथन जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए पुस्तकालय के विकास हेतु कार्य करें तथा पाठकों को उच्चतम सेवाएं प्रदान करें

अंत में श्री के. एस. राजू , पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दि.प.ला. द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।

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