दूर होकर भी कोई यूँ मिटना है ऐसे -राज़ सोरखी “दीवाना कवि”

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“…दूर होकर भी कोई यूँ मिटना है ऐसे ?”

जीवन को मेरे तूने महकाया है ऐसे,
खुशबू से गुलिस्तां महकता हो जैसे। Poet1

हर जन्म रहे साथ बस तेरा,
सागर में पानी रहता हो जैसे।

बांहों में भर कर आगोश में ले लो,
सीप में मोती रमता हो जैसे।

छुपा लो दिल के किसी कोने में,
आँखों में कोई ख्वाब बसता हो जैसे।

तेरी जुदाई का असर ये हो चला अब,
पर कटा पंछी तड़पता हो जैसे।

कवि ‘राज़’ भी है नादान कितना,
दूर होकर भी कोई यूँ मिटता है ऐसे ?

राज़ सोरखी “दीवाना कवि”
हिसार, हरियाणा (भारत)

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