कुछ ऐसी होली तुम मनाना-डॉ सुलक्षणा अहलावत

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कुछ ऐसी होली तुम मनाना।
दुश्मनों को भी गले लगाना।  unnamed-1

रंग प्यार का घोल कर।
प्रेम के बोल बोल कर।
सभी का मन तुम हर्षाना।
कुछ ऐसी होली तुम मनाना।
दुश्मनों को भी गले लगाना।

गिरा देना नफरत की दीवार।
करना सिर्फ प्रेम की बौछार।
दिल से दिल को मिलाना।
कुछ ऐसी होली तुम मनाना।
दुश्मनों को भी गले लगाना।

अपने रीति रिवाज के साथ।
थोड़ी शर्म लिहाज के साथ।
रंग गुलाल सभी को लगाना।
कुछ ऐसी होली तुम मनाना।
दुश्मनों को भी गले लगाना।

पीकर शराब प्याला और भंग।
करना नहीं तुम ज्यादा हुड़दंग।
सुलक्षणा का फर्ज था समझाना।
कुछ ऐसी होली तुम मनाना।
दुश्मनों को भी गले लगाना।

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