गैरो की औकात कहा…

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गैरो की औकात कहा है अपनों ने ही मारा है !
सपने पूरे कर छोडूंगा, यह संकल्प हमारा है !!
टकराना है चट्टानों से,
लड़ना है तूफानों से !
मैं इक दिन इतिहास रचूँगा,
कहता हूँ धनवानों  से !!
मेरे अंदर की प्रतिभा को फिर उसने ललकारा है !
सपने पूरे कर छोडूंगा,     यह संकल्प हमारा है !!
मुझे सब्र है मिलेगा इक दिन,
मेरे मेहनत का मीठा फल !
माना कठिन प्रश्न है यारों,
मगर मिलेगा उसका हल !
मुझको है अभिमान भूमि का सागर पाँव पखारा है !
सपने पूरे कर छोडूंगा,     यह संकल्प हमारा है !!
जब तक पूरे ना हो जाएं,
चैन मुझे न रातों में !
नही उलझना यहाँ किसी से,
उल्टी सीधी बातों में !!
मन में है विश्वाश मुझे अब मंजिल ही बस प्यारा है !
सपने पूरे कर छोडूंगा,     यह संकल्प हमारा है !!
कवि आशीष तिवारी जुगनू
इंदौर

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