गीतिका: प्यार का मौसम सुहाना आ गया

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प्यार का मौसम सुहाना आ गया    unnamed (1)
गीत हमको गुनगुनाना आ गया ।

आँसुओं को भूलकर अपने सभी
आज हमको मुस्कुराना आ गया ! (1)

मौन थे कबसे नजाने ये अधर
आज इनपर भी तराना आ गया! (2)

राह से अपनी मिटाकर नफ़रतें
प्रेम का दीपक जलाना आ गया (3)

इश्क की इस राह पर चलते हुए
सब गमों को भूल जाना आ गया ! (4)

जिंदगी में जब कदम उसके बढ़े
पाँव हमको भी बढ़ाना आ गया! (5)

और क्या अपनी गजल अब हम कहें
वक्त ही जब शायराना आ गया (6)

डाॅ सोनिया