भटकाव से मुक्ति और ज्ञान से युक्ति का सरल माध्यम है आध्यात्मिक ध्यान : गुरु मां अनुपमा

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गुरुग्राम/21 सितम्बर 2018। युगों-युगों से मनुष्य आत्म रहस्य, ज्ञान व शांति के लिए ब्रह्म (ब्राह्मांड) की परतों को विभिन्न विधाओं व रास्तों से खोलने को लेकर प्रयत्नशील रहा है। उनमें से एक प्रमुख रास्ता आध्यात्मिक ध्यान का है, जो अपने चारों ओर शांति का अनुभव करते हुए स्वयं को ईश्वर या ब्राह्मांड से जुड़ाव महसूस करते हैं। उपरोक्त विचार गुरु मां अनुपमा ने शुक्रवार को यहां शमा रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में व्यक्त किए। तीन दशक से ज्यादा समय तक एनआरआई के तौर पर एक सफल व्यसायी रहीं गुरु मां अनुपमा ने अंतत: भौतिक उपक्रमों से विरत हो स्वान्त: सुखाय व मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए आध्यात्मिक ध्यान साधना एवं हीलिंग में रत होकर समाज कल्याण के पथ पर चल पड़ीं हैं। वे डीएलएफ, फेज़-1 में डीटी मेगा मॉल के नजदीक 22 व 23 सितम्बर को आयोजित दो दिवसीय आध्यात्मिक ध्यान-चिंतन व हीलिंग शिविर का आयोजन कर रही हैं, जिससे कि अशांत व अन्यान्य मानसिक विकारों से परेशान मनुष्य को शांति व स्थिरता प्राप्त हो सके।
इस दौरान गुरु मां अनुपमा ने कहा, मन और शरीर के बीच गहरा संबंध है। मनुष्य जीवन में कई ऐसे क्षण व परिस्थितियां जैसे चिंता, गुस्सा- खिन्नता, हताशा-निराशा, दुख-दर्द, डर आदि प्रकट होते हैं, जिनका शरीर व स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। मेडिटेशन और हीलिंग जैसे उपाय मनुष्य के अवचेतन मन को सकारात्मक संकल्पों से भर देने में सहायक होतीं हैं।
गुरु मां ने आध्यात्मिक ध्यान के संदर्भ को विस्तार देते हुए बताया कि ज्ञान प्राप्ति का सबसे सरल उपाय पर-पीड़ा को अपना समझना है। यह सबकुछ आध्यात्मिक ध्यान से संचित होता है। इससे आदमी जीवन में भटकाव से बचेगा और आनंद का अनुभव करेगा। मन कुविचार या संशय जैसी स्थितियों से बचा रहेगा और जीवन की सार्थकता की ओर उन्मुक्त होगा।
उन्होंने कहा, शिविर का उद्देश्य लोगों को सकारात्मक ऊर्जा से प्रवाहित करना है ताकि मनुष्य नकारात्मकता से बच जाएं और उनका हृदय प्रेम से भर जाए। प्रेम से ही ज्ञान और ज्ञान से हृदय में करूणा और उल्लास उत्पन्न होगा।

आध्यात्मिक गुरु मां अनुपमा के बारे में- परम श्रद्देय गुरु मां ‘अनुपमा’ उर्फ नीना खन्ना जीवन के 35 वर्ष एनआरआई के तौर पर ब्रिटेन, फ्रांस, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया सहित मध्य- पूर्व के देशों में अपना व्यवसाय चलातीं रहीं। इसी क्रम में अफ्रीका प्रवास के दौरान आध्यात्मिक गुरु से संपर्क के बाद अपना सफल व्यवसाय छोड़ भौतिकवादी दुनिया से आध्यात्मिक दुनिया में प्रवेश किया और जीवन पर्यन्त मानव सेवा का प्रण लिया।

इस क्रम में आपने कई वर्षों तक ध्यान साधना में लिप्त रहकर अपने आपको मानव कल्याण के तैयार किया। आपने आध्यात्मिक ध्यान व हीलिंग के माध्यम से ब्रह्मांड (ब्रह्म) शक्ति को एकत्रित कर सामाजिक, आर्थिक, मानसिक व शारीरिक रूप से पीड़ित लोगों में शांति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रसार कर रहीं हैं। पिछले कई सालों से आप भारत में रहकर दुख और शारीरिक पीड़ा में जी रहे लोगों उनके हाल से बाहर निकालने के प्रयास में लगीं हुईं है।  इसके लिए आपने एनजीओ ‘आओ संकल्प लें’ को स्थापित कर उसके माध्यम से मानव कल्याण के विविध आयामों जैसे आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में मेडिटेशन, हीलिंग तथा शिक्षा व स्वास्थ्य के प्रसार के क्षेत्र में काम कर रहीं हैं।
‘अर्थ सेविनियर फाउंडेशन’ के तहत आश्रम में रह रहे मानसिक व शारीरिक रूप से पीड़ितों के बीच आप, आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने के साथ ही अन्य जरूरी सुविधा-सहायता पहुंचा रहीं हैं।

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