ऐसे हर एक ने खेली होली

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रंगों की है बहार होली !
सावन की है फुहार होली !!

जब आती है यह प्यारी होली !
मिलते है बिछडे हम जोली !!

भीगा है हर दामन चोली !
ऐसे हर एक ने खेली होली!!

गोरी भी कैसे मुस्काये !
सजना जब जब गुलाल लगाये!!

झूम रहा है हर एक इंसान!
हर मजदूर, जवान, किसान!!

दूर यहाॅ से अब नफरत हो!
एक दूजे मे एक चाहत हो !!

कहती है ‘‘आजाद’’ यह होली!
हम सब बोले प्यार की बोली !!

डा0 महताब अहमद आजाद

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