घरेलु नुस्खे के उपाय कोरोना से बचाए

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आज हम कोरोना महामारी के चलते घरों में बन्द हैं। पूरा देश महामारी से आतंकित है। हर तरफ मौत का मंजर है, डर है, बदहवासी है, जान बचाने के लाले पड़े हुए हैं। हर घर में आस-पड़ोस से, रिश्तेदारों से, स्वयं अपने घर से मौत की खबर डराती है। पिछले साल मरने वाले कम थे और जो मर भी रहे थे वह सिर्फ बुजुर्ग थे। दुःख कम था भय ज्यादा था। इस वर्ष नौजवान मर रहे हैं। दुःख भी अपार है। ऐसा लग रहा है कि हम सबको मौत धीरे-धीरे अपने आगोष में लेने को आगे बढ़ रही है। हमारी हालत उस कबूतर जैसी हो गयी है जो बिल्ली के सामने चारों तरफ से घिरा हुआ बेबस अपनी आँखें बन्द किये खड़ा है। ताकि वह अपनी मौत को आते हुए न देख सके या इस भुलावे में कुछ क्षण जी लेता है कि बिल्ली ने उसे न देखे। पर ऐसा होता नहीं है। कोरोना नाम की महामारी से जितना डरके भागोगे वह उतनी ही आपके पास मंडराती रहेगी और मौका पाकर आपको जकड़ लेगी।
इससे डरकर चुप बैठ जाने से और अपना आत्मबल एवं मन का विश्वास कमज़ोर करने से काम नहीं चलने वाला है। हमें निश्चय कर खड़ा होने की आवश्यकता है। सावधानी रखनी है, खान-पान सही करना है, मास्क लगाना है और मास्क लगवाना है। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना है। अपनी दिनचर्या ठीक करनी है। सुबह-शाम थोड़ा व्यायाम, प्राणायाम एवं घूमना-फिरना है। हल्दी, अदरक, चुकन्दर, तुलसी, सौंफ, मुलेठी, अश्वगंधा, मेथी, मीठा नीम, सहजन, दालचीनी, लोंग, काली मिर्च, काला नमक, गिलोय का काढा़ बनाकर पीना है। सुबह-शाम नींबू की शिकंजी गरम पानी में बनाकर पीनी है। रात को सोते समय हल्दी डालकर गरम दूध पीना है। मन का विश्वास मजबूत रखना है। दोनों समय अच्छा सुपाच्य और सात्विक भोजन करना है। सुबह का नाश्ता फलों एवं दही के साथ करना है। फिर देखें कोरोना क्या कोई भी रोग आपके पास फटकेगा भी नहीं। सकारात्मक सोच, शुद्ध विचार, सच्चाई का साथ, मन में कोई मैल नहीं, ईष्र्या नहीं, किसी के प्रति दुर्भावना नहीं, सबके प्रति प्रेम एवं आदर का भाव हर समय क्षमाशील रहना, सभी रोगों को दूर भगाने की अचूक दवा है। इसलिये अपने आपको बदलिये। जीवन बहुत छोटा है। कब यहाँ से चले जायेंगे, किसी को पता नहीं। जब तक ज़िन्दा हैं ज़िन्दादिली से जियें। सबके काम आएं। हर एक का भला सोचें एवं भला करें। सहयोग एवं सहकार का जीवन जियें। अपने जीवन को ऐसा बनायें जिससे हर कोई प्रेरणा प्राप्त करे। प्रकृति प्रेमी बनें। जीवन में संगीत, कला, प्रेम, जीव जन्तु एवं वनस्पति प्रेमी बनें। समाज से कम लें और ज्यादा देने का भाव रखंे।
यही सब मेरी समझ में सुखी जीवन के आधार हैं।
!! जय हिन्द !!

लेखक
डाॅ. अशोक कुमार गदिया
कुलाधिपति
मेवाड़ विश्वविद्यालय
गंगरार, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

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