हाउसफुल 4

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कलाकार: अक्षय कुमार, बॉबी देओल, रितेश देशमुख, कृति सेनन, कृति खरबंदा, पूजा हेगड़े आदि
निर्देशक: फरहाद सामजी
निर्माता: फॉक्स स्टार स्टूडियोज, नाडियाडवाला ग्रांडसंस

सबसे पहले बता दूँ कि अक्षय कुमार की हाउसफुल 4 हाउसफुल फ्रैंचाइज़ी की चौथी किस्त है। हाउसफुल 4 से साजिद खान के निकलने के बाद फरहाद सामजी ने इसके निर्देशन की कुर्सी संभाली। शायद यही वजह रही की हाउसफुल 4 गैर इरादतन तरीके से फिल्माई गई एक फुस्स फ़िल्म है।

एक सौ पैंतालीस मिनट दर्शकों के खराब करने के लिए निर्माता निर्देशकों पर जुर्माना किया जाना चाहिए। साजिद नाडियाडवाला (निर्माता और कहानी), सारा बोडिनार (कहानी और पटकथा), ताशा भांबरा, वर्षा खेतरपाल और साजिद खान के साथ (न होने के बावजूद पटकथा के लिए श्रेय दिया गया है) है।  पहली तीन किस्तों – हाउसफुल 1, 2 और 3, अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, बॉबी देओल, कृति सनोन, कृति खरबंदा और पूजा हेगड़े-स्टारर की थीम को ध्यान में रख कर न जाने क्यों हाउसफुल 4 बनाकर दर्शकों पर अत्याचार किया गया है।

2019 में यानी वर्तमान में दशकों पुरानी कहानी को मिलाकर जब बनाया जाए तो कम से कम उसे उस दौर का तो दिखना चाहिए। अक्षय (हैरी) को कृति खरबंदा (नेहा) से प्यार में है, रितेश (रॉय) को पूजा हेगड़े (पूजा) और बॉबी (मैक्स) से प्यार है और वह कृति से प्यार करती है।  ये महिलाएं बिगड़ैल अमीर हैं। वे अपने भावी ससुर, रणजीत (ठकराल) से मिलते हैं और बहुत विचार-विमर्श के बाद, उसे रिश्ते के लिए मना लेते हैं।

फ़िल्म के लीड रोल अक्षय कुमार को बुरे-बुरे सपने आते हैं – 1419 के पिछले जीवन की झलकियाँ उसे दिखती है। जब वह राजकुमार बाला देव सिंह हुआ करते थे। फिल्म हाउसफुल 4 की कहानी लंदन से शुरू होती है जहां हैरी, मैक्स और रॉय (अक्षय कुमार, बॉबी देओल और रितेश देशमुख) को वहां के डॉन के कुछ पैसे चुकाने हैं। इस मुसीबत से पार पाने के लिए वे तीनों अमीर घराने से ताल्लुख रखने वाली कीर्ति, नेहा और पूजा (कृति सेनन, कृति खरबंदा, पूजा हेगड़े) को अपने प्यार में फंसा लेते हैं और शादी करने की तैयारी शुरू कर देते हैं। सभी शादी करने के लिए भारत में सितमगढ़ आ जाते हैं। सितमगढ़ आकर हैरी की पिछले जन्म की की सभी यादें ताजा हो जाती हैं। उसे यह पता चलता है कि वह 600 साल पहले वह यहां का राजकुमार था जिसका नाम बाला होता है और सिर्फ वही नहीं बल्कि दूसरे सभी लोगों का भी यह पुर्नजन्म है। जिसमें तीन कबूतर, नील, नितिन और मुकेश शामिल हैं। उन्हें यह भी ज्ञात होता है। वे अधूरे प्यार के अभिशाप के साथ मर गए जिसे उनको इस जीवन में इसे सही करना होगा।  इस जीवन को छोड़कर, वे अपने पिछले जन्म की भाभी से शादी करने वाले हैं। उफ ये अगला पिछला जन्म और इस दांवपेच में फंसी यह फ़िल्म बेआवाज़ साबित होती है।

हाउसफुल 4 की पटकथा इतनी भ्रामक है कि दा विंची कोड से तुलना करना सरल होगा। राजा के लैंडिंग से लेकर ड्रैगनस्टोन तक के गेम ऑफ थ्रोन्स से प्रभावित होने वाले असाधारण सेट, नीचे-बराबर सीजीआई का एक उत्पाद।  तेजतर्रार वेशभूषा जो की पूरी तरह से बदतर है।

अंतहीन सेक्सिस्ट और होमोफोबिक चुटकुले, चिल्लाहट और मन-मस्तिष्क को सुन्न कर देने के बाद मिनट बाद हम सोचते हैं। कि क्यों फालतू पैसा जायज किया। हाउसफुल 4 में बहुत सारे गाने हैं जिनसे आप रूबरू हो सकते हैं।  उनमें से कोई भी विशेष रूप से यादगार नहीं है, जब साजिद खान शुरू में हाउसफुल 4 का निर्देशन कर रहे थे, तब उनके खिलाफ MeToo के आरोप भी आए जिसके कारण उन्हें फ़िल्म से हटाना पड़ा।

अक्षय कुमार ने हिंदी सिनेमा में अपना एक खास ब्रांड बना रखा है। वह एक तरफ तो भारतीयता को बढ़ावा देने की फिल्में करके अपना नाम बनाते हैं और दूसरी तरफ हाउसफुल 4 जैसी ऊलजूलूल कहानियों पर बनी फिल्में करके पैसा भी छापते हैं। सिनेमा के इतिहास में उनका नाम सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाले हीरो के तौर पर दर्ज होगा या फिर देशभक्त हीरो के तौर पर, ये खुद अक्षय कुमार ही बेहतर तय करेंगे लेकिन हाउसफुल 4 की रिलीज के दिन उनके धूम 4 में काम करने की खबर की जिस तरह से यशराज फिल्म्स ने हवा निकाली, उससे उनकी ब्रांडिंग पर बहुत खराब असर पड़ा है। और, ऐसी ही एक खराब फिल्म है हाउसफुल फोर।

अपनी रेटिंग-  ढेड़ स्टार

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