श्रावण के महीने में कांवड का महत्व …

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श्रावण के महीने में बहुत उत्साहपूर्वक और जश्न का माहौल होता है| इसीलिए श्रावण के महीने में कांवण का महत्व और भी कहीं ज्यादा बढ़ जाता है| हांलाकि श्रावण के महीने में ही कांवड का महत्व इतना ज्यादा क्यों होता है| इसको भी जानेंगे पर इससे पहले श्रावण का महीना क्या है और कांवड क्या है यह जानते हैं|
kaavad हांलाकि मानसून की शुरुआत कांवड का त्यौहार शुरू होने से पहले ही आ जाता है| लेकिन खास श्रावण का महीना अमूमन जुलाई में शुरू होता है, और अगस्त तक चलता है श्रावण का महीना भगवान शिव की भक्ति का महीना माना जाता है | श्रावण को देवादि देव महादेव यानि भगवान शिव का महीना भी कहा जाता है, इस दौरान ऐसी मान्यता होती है की श्रावण का महीना भक्तों को अमोघ फल देने वाला होता है, धर्मिक पुराणों के अनुसार श्रावण के महीने में भगवान् शिव को सिर्फ एक बेलपत्र भी चढ़ा दिया जाये तो भक्तों के सभी पापों का विनाश हो जाता है, इसके साथ ही भोलेनाथ को कच्चा दूध, भस्म, भांग और धतूरा भी अर्पित किया जाता है | श्रावण के महीने में भगवान् शिव की पूजा करने से विशेष फल मिलता है | भगवान् शिव को खुश करने के लिए कई तरह के तरीके अपनाये जाते हैं इन्हीं तरीकों में से एक है कांवड़ यात्रा |

कांवड़ यात्रा में भगवान् शिव की पूजा करने के लिए शिवभक्त भगवा कपड़ों में (गेरुए रंग) नंगे पैर कांवड़ यात्रा के लिए निकल पड़ते हैं | ऐसा माना जाता है की शिवलिंग पर जल चढाने से महादेव खुश हो जाते हैं, और शिवभक्तों के सारे पापों को माफ़ कर देते हैं, इस कांवड़ यात्रा के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती है इसलिए इस कांवड़ यात्रा को पवित्र पूजा का रूप माना जाता है | यह कहा जाता है की इस दौरान भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पी लिया था जिसके कारण भगवान् शिव का शरीर जलने लगा, यह देखकर देवताओं ने शीतल जल की वर्षा की और इसी के बाद से ही कांवड़ यात्रा का प्रारंभ शुरू हुआ | हांलाकि इस सब के बाद भी अनेकों पंडित-पुजारियों ने अपनी-अपनी राय दी की कांवड़ यात्रा का प्रारंभ परशुराम ने कांवड़ से गंगा का पवित्र जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया, जिस कारण भगवान् शिव खुश हुए और इसी के बाद से कांवड़ यात्रा का प्रारंभ होना शरू हुआ |

अभय यादव

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