डालरों-दीनार की दुनिया में खो जाते हैं लोग…..

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आईपेक्स भवन वेलफेयर सोसाइटी की प्रतिष्ठित मासिक काव्य परंपरा गोष्ठी की श्रृंखला में 3 नवम्बर, 2019 को 107वीं गोष्ठी संपन्न हुई। छठ पूजा वाले दिन हुई इस गोष्ठी को गद्यगीत शिरोमणि पद्मविभूषण कवि राय कृष्णदास (1892-1980) को समर्पित किया गया। प्रयोग-धर्मिता की शृंखला में इस बार उत्तराखंड के तीन वरिष्ठ कवियों यथा कवि डॉ नीरज नैथानी (हास्य-व्यंग), श्रीकांत ”श्री” (ओज), और श्री अम्बर खरबन्दा (शायर) को आमंत्रित किया गया । गोष्ठी के प्रारंभ में प्रख्यात समाजसेवी व संस्था के महामंत्री श्री सुरेश बिंदल और संयोजक श्री प्रमोद अग्रवाल और आईपेक्स महासंघ  के महामंत्री श्री मदन खत्री नें सभी आमंत्रित कवियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ आईपी एक्सटेंशन निवासी कवि राजेश अग्रवाल ने पद्मविभूषण कवि राय कृष्णदास के जीवन परिचय से किया। कवि नीरज नैथानी ने वन्य जीवन और नैतिक अवमूल्यन को आधार बनाकर उत्कृष्ठ विचार कविताओं से गोष्ठी का प्रारम्भ किया। श्री नैथानी की कविताओं पर श्रोताओं की तालियों से सदन निरंतर गुंजायमान रहा। दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी के मद्देनज़र उन्होने कुछ यूँ कटाक्ष किया –
कपलतास की तैयारी है, खरगोश का दिल भारी है,
जहाँ न पहुँच सके आदमी, उस जगह की तलाश जारी है,
सावधान ! जंगल जड़ी-बूटियों,
निर्माण निरंतर जारी है।
भारत माता की जय से गुंजित माहौल में कवि श्रीकांत ”श्री” ने राष्ट्रवाद को समर्पित अपने काव्य पाठ के दौरान शहीदों कोनमन करते हुए हुए कुछ यूँ कहा –
भले ही दीप से पुजा तू आठों याम मत करना,
मिले कोई मुहल्ले में तो राधेश्याम मत करना,
नमन करना या मत करना कोई कुछ ना कहेगा पर,
शहीदों की शहादत को कभी बदनाम मत करना।
वरिष्ठ शायर श्री अम्बर खरबन्दा ने मानवीय व्यवहार और जीवन मूल्यों से जुड़े अपने अनुभवों को अपनी रचनाओं के
माध्यम से ख़ूब बांटा। उन्होने विशेष तौर पर श्रोताओं की वाह-वही लूटी। इस क्रम में उन्होने कहा-
बूढ़ी धुंधली चार आँखों को तरसता छोड़ कर,
डालरों-दीनार की दुनिया में खो जाते हैं लोग,
तुम यहाँ बैठो तुम्हारे वास्ते लाता हूँ फल,
इतना कहकर माँ से तीरथ में बिछड़ जाते हैं लोग।
गोष्टी का सफल संचालन आईपी एक्सटेंशन निवासी कवि राजेश अग्रवाल ने किया। आज की सफल गोष्ठी में कई वरिष्ठ
कवि व साहित्यकार आदि भी उपस्थित थे। गोष्ठी के अंत में संस्था के चेयरमेन श्री शुशील गोयल ने धन्यवाद ज्ञापन
किया। राष्ट्र वंदना के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।

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