जा आ आ दू ! जा आ आ दू ! जा आ आ दू

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ashok vyas
व्यंग्य – अशोक व्यास
पंचवर्षीय सीजन की इंडियन जादुई लीग याने आई.जे.एल. समाप्त हो गई थी । विजेता टीम के कप्तान जादूगर सरकार ख़िताबी ट्रॉफी को हाथों में लिए नम्रता की प्रतिमूर्ति बने सेवक की तरह सबका धन्यवाद करते हुए मंत्रालय के गलियारों में प्रवेश कर गए । इस बार की आई.जे.एल. में बहुत उलटफेर हुआ । कई खिलाड़ियों को मुँहमाँगे दामों पर खरीदा गया कुछ जबरन में कूद कर दूसरी टीम में चले गए , कुछ इंतजार करते रह गए कि हमारी भी बोली लगेगी , कई खिलाड़ी गुहार लगते रहे , कई गिड़गिड़ाते रहे , कुछ अकड़ते रहे , कुछ सिकुड़ते रहे , कई इधर से उधर या उधर से इधर होते रहे । कइयों के अनुमान ध्वस्त हो गए, किसी के अरमानो पर पानी फिर गया था । कुछ पता नहीं लग रहा था कि कौन कहाँ है यानी कि मामला तितर – बितर हो गया था । इस बार लीग में कई प्रसिद्ध टीमों ने भाग लिया था जैसे दिल्ली डेविल , मुंबई मेसमेरिज़्म , काली कलकत्ते वाली , पंजाबी तड़का , साउथ सुपर हिट , राष्ट्रीय जादुई सरकार , संयुक्त जादुई सरकार , महाजाती जादुई सरकार । दर्शकों को भी लग रहा था कि बड़े रोमांचक मुक़ाबले होंगे , इस बार नए – नए जादू के आइटम देखने को मिलेंगे खेल में बड़ा मजा आने वाला है । सात दौर जादू के शो दिखाने के हुए लैकिन अंतिम चरण में खिताब की प्रबल दावेदार राष्ट्रीय जादुई सरकार , संयुक्त जादुई सरकार और महाजाती जादुई सरकार के बीच मुकाबला
हुआ । पुराने जादूगर के वंशज ने खानदानी शफाखाने के पुराने फार्मूले वाले आइटम नए नाम से आँख मार – मार कर दिखाये जैसे गरीबी हटाओ , प्यार बांटते चलो , किसी के साथ अन्याय नहीं होगा आदि । महाजाती जादुई सरकार की टीम के शो में नया प्रयोग था स्टेज पर जादूगर और जादूगरनी ने मिल कर आइटम दिखाये थे । इनके जातिभरे जादू में गणित , फिजिक्स , हॉरर , अस्मिता और पहचान का संकट , की केमिस्ट्री का बिना तालमेल का घालमेल था । दर्शकों ने भी ऊपरी मन से तालियाँ बजाई मजा भी नहीं आया । राष्ट्रीय जादुई सरकार ने एसे आइटम दिखाये जो हमेशा सुपरहिट होते हैं जैसे रोटी बनाने के लिए गेस सप्लाई , मकान बनाने के लिए केशबेक स्कीम , कपड़ों के लिए डिजाइनर जेकेट के साथ राष्ट्रवाद का तड़का लगा कर शो हिट करा लिया ।  हिंदुस्तान में जिसे भी जादूगर बनना होता है पुराना हो या नया जादूगर उसे अपने नाम के साथ सरकार जरूर जोड़ना पड़ता है जैसे पीसी सरकार , कैसी सरकार , ऐसी सरकार या वैसि सरकार । सरकार का मतलब ही महान जादूगर होता है । पुराना जादूगर लीग नहीं टेस्ट सीरीज खेलकर जादूगर सरकार बनता था उनका जादू भी सर चड़कर बोलता था । वो स्टेज पर रंगीन रोशनियों , तेज संगीत की धुन पर , डिस्को टाइप की फिल्मों की तरह कपड़े पहने  , चियर लीडर जैसी सुंदर कन्याओं से घिरा , सर पर पगड़ी और हाथों में छड़ी लिए , मुस्कुराकर , सर झुका कर सबको सलाम करके कहता ‘’ अब आप मेरे मायावी संसार में आ गए हैं , आप वही देखेंगे जो में दिखाऊँगा , मेरे सम्मोहन से आप वही करेंगे जो में आपसे  करने को बोलूँगा ‘’ सुनते ही तालियों से हाल गूंजने लगता था । जादूगर मुसकुराता संगीत की तेज धुन पर पगड़ी को एक हाथ पर रखकर दूसरे हाथ में पकड़ी छड़ी को पगड़ी पर घुमाते हुए मंत्र बुदबुदाता तुरंत पगड़ी में से विश्वशांति के कबूतर बाहर निकाल फड़फड़ाने लगते थे हाल में यू एन ओ टाइप की शांति छाने लगती थी I उसका विश्वास था कि विश्वशांति से हर समस्या हल हो जायेगी । जादुई टेस्ट लीग के अवसर पर जादूगर आइटमों को अदल – बदल कर दिखाता जादूगर बदल जाता परंतु आइटम नहीं बदलते और पुराने भोलेभाले दर्शक जादूगर के सोम्य , सुंदर व्यक्तित्व पर मोहित और चमत्कृत होकर ताली बजाते शो सफल हो जाता था जादूगर सरकार का खिताब उसे मिल जाता था । दर्शक सोचता गरीबी दूर होने ही वाली है , समाजवाद आने ही वाला है , विश्वशांति बस चंद कदम दूर है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता था । दर्शक नहीं जानते थे कि अब जादूगर
अलग और सरकार अलग – अलग हो गए हैं । जादूगर के पास जादुई छड़ी रह गई और सरकार के हाथ में कानून का अद्रश्य डंडा आ गया है । जिसके कारण वह बड़े भोलेपन से कह देता था कि मेरे पास अब कोई जादू की छड़ी नहीं है जिसे घुमाकर समस्याएँ हल हो जाएंगी । समस्याओं को हल करने के लिए वह कानून के डंडे का ज़ोर दिखाता था । लेकिन
शो मस्ट गो ऑन । दर्शक ऊबने लगते थे वह जादूगर बदल देता लेकिन शो वही देखने को मिलता था । सिनेमा हो या राजनीति हो या जादू यकीन दिलाने की कला का नाम है यकीन नहीं तो जादू समाप्त हो जाता है । आज समय बदल गया है आइटम बदल गए हैं बाजार में नए – नए जादूगर आ गए हैं ये शान से दर्शकों से कहते हैं “ देखिये हमारे हाथों में जादुई छड़ी भी नहीं है हम बिना छड़ी घुमाए जादू दिखा सकते हैं ‘’ । पुराना जादूगर सरकार स्टेज शो करता था आज का जादूगर चलते – फिरते रोड शो करता है । आज पीसी , कैसी , ऐसी या वैसी सरकार का जमाना नहीं है बल्कि डेविड ब्लेन , डायनेमो , क्रिस एंजेल और उगेश सरकार का जमाना है । इंडियन जादुई लीग के इस सीजन में खानदानी शफाखाने वाले चिरयुवा जादूगर ने नई बोतल में पुरानी शराब की तरह वही पुराने आइटम दिखाये । आज भी वह अपने जादू पर आत्म मुग्ध है उसे लगता है कि साहेबान – कद्रदान कहते ही दर्शक उसके शो को देखने के लिए टूट पड़ेंगे वह यह मानने के लिए तैयार ही नहीं है कि बिना स्टेज के भी शो किया जा सकता है । जहां उसकी सुविधानुसार सब सेट होता था वह अपने कंफ़र्ट जोन से बाहर नहीं निकल पा रहा है । महाजाती जादूगर प्लस जादूगरनी ने डराने वाले वाले हॉरर टाइप के कइ आइटम दिखाये लेकिन उनके जादू में वो केमिस्ट्री नदारद थी जिसके लिये वह विख्यात या
कुख्यात थे । विजेता राष्ट्रीय जादुई सरकार के जादूगर ने अपने शो में आइटम्स की सुनामी ले आया था । उसके हाथों में जादू की छड़ी नहीं हेरी पॉटर वाला जादुई झाड़ू था जिस पर बैठ कर देश भर में उड़ते – फिरते राष्ट्रवादी जादू के शो दिखा कर इंडियन जादुई लीग का जादूगर सरकार का खिताब जीत लिया । उसके जादू , जादू , जादू का शोर देश में गूंजने
लगा था । इस प्रकार अवतारों वाले इस देश में एक महान जादूगर का उदय हो गया जो पत्ते नहीं मुद्दे बदल देता है , जो नई सोच और नए शोचालय गड़ रहा है । जो पुरातन और  आधुनिक जादूगर सरकार का मिलाजुला स्वरूप है । इंडियन जादुई लीग जीतने के बाद अब यह जादूगर विश्व रंगमंच पर भारत का परचम लहराने के लिए कमर कस कर वर्ड लीग
जीतने के लिए विश्व भ्रमण पर  निकलने ही वाला है । शीघ्र ही भारत से लेकर होल वर्ड में जा आ आ दू ! जा आ आ आ दू ! जा आ आ आ दू की गूंज सुनाई देने वाली है ।

अशोक व्यास
सी – 79 क्रिस्टल केम्पस अवधपुरी
भोपाल 462022 मध्यप्रदेश

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