बच्चों के चाचा-जवाहर लाल नेहरू

0
44

ghh

लाल बिहारी लाल

नई दिल्ली। बच्चें हर देश काभविष्यऔर उसकी तस्वीर होते हैं। बच्चे ही किसी देश के आने वाले भविष्य को तैयारकरते हैं। लेकिन भारत जैसे देश में बाल मजदूरी,बाल विवाह और बाल शोषण के तमाम ऐसेअनैतिकऔर क्रूर कृत्य मिलेंगे जिन्हें देख आपको यकीन नहीं होगा कि यह वही देश हैजहां भगवान विष्णु को बाल रूप में पूजा जाता है और जहां के प्रथमप्रधानमंत्री कोबच्चे इतने प्यारे थे कि उन्होंने अपना जन्म दिवसही उनके नाम कर दिया।

देश के प्रथमप्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से विशेषप्रेम था। यह प्रेम ही था जोउन्होंने अपने जन्म दिवस को बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णयलिया।जवाहरलालनेहरू को बच्चों से लगाव था तो वहीं बच्चे भी उन्हें चाचा नेहरू केनाम से जानतेथे। जवाहरलाल नेहरू ने नेताओं की छवि से अलग हटकरएक ऐसी तस्वीर पैदा की जिस पर चलना आज के नेताओं के बस की बात नहीं। आज चाचा नेहरूका जन्म दिन है, तो चलिएजानतेहैं जवाहरलाल नेहरू के उस पक्ष के बारे में जोउन्हें बच्चों के बीच चाचा बनातीथी।

14नवंबर, 1889 कोउत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मे पं. नेहरू का बचपन काफी शानो शौकतसेबीता। उनके पिता देश के उच्च वकीलों में से एक थे।पं. मोतीलाल नेहरु देश के एक जाने माने धनाढ्य वकील थे। उनकी मां का नाम स्वरूपरानी नेहरू था। वह मोतीलाल नेहरूके इकलौते पुत्र थे। इनके अलावा मोती लाल नेहरूकी तीन पुत्रियांथीं उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बाद में संयुक्तराष्ट्र महासभा की पहली महिलाअध्यक्ष बनीं।

पं. नेहरु महात्मा गांधीके कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े। चाहे असहयोग आंदोलनकी बात हो याफिर नमक सत्याग्रह या फिर1942के भारत छोड़ो आंदोलन की बात हो उन्होंने गांधी जीके हर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। नेहरू की विश्व के बारे मेंजानकारी सेगांधी जी काफी प्रभावित थे और इसीलिए आजादी के बादवह उन्हें प्रधानमंत्री पद परदेखना चाहते थे। सन्1920में उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले मेंपहलेकिसान मार्च का आयोजन किया।1923में वहअखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिवचुने गए।1929में नेहरूभारतीयराष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र के अध्यक्ष चुने गए। नेहरू आजादी केआंदोलन के दौरान बहुत बार जेल गए।1920से1922तक चलेअसहयोग आंदोलन के दौरानउन्हें दो बार गिरफ्तार किया गया।

नेहरू जहांगांधीवादी मार्ग से आजादी के आंदोलन के लिए लड़े वहीं उन्होंने कई बारसशस्त्रसंघर्ष चलाने वाले क्रांतिकारियों का भी साथ दिया।आजाद हिन्द फौज के सेनानियों परअंग्रेजों द्वारा चलाए गए मुकदमे में नेहरू नेक्रांतिकारियों की वकालत की। उनकेप्रयासोंके चलते अंग्रेजों को बहुत से क्रांतिकारियों का रिहा करना पड़ा।27मई, 1964को उनका निधन हो गया.

बच्चों के चाचा नेहरू

एक दिन तीन मूर्तिभवन के बगीचे में लगे पेड़-पौधों के बीच से गुजरतेहुए घुमावदार रास्ते पर नेहरू जीटहल रहे थे।उनका ध्यान पौधों पर था, तभी पौधों के बीच से उन्हें एकबच्चे के रोनेकी आवाज आई. नेहरूजी ने आसपास देखा तो उन्हेंपेड़ों के बीच एक-दो माह का बच्चा दिखाई दिया जो रो रहा था।नेहरूजी ने उसकीमां को इधर-उधर ढूंढ़ा पर वह नहीं मिली। चाचा ने सोचा शायद वह बगीचेमें ही कहींमाली के साथ काम कर रही होगी।नेहरूजी यह सोच ही रहे थे कि बच्चे ने रोना तेज करदिया। इस पर उन्होंने उस बच्चे की मां की भूमिका निभाने का मन बनालिया।वह बच्चे को गोदमें उठाकर खिलाने लगे और वह तब तक उसके साथ रहे जबतक उसकी मां वहां नहीं आ गई। उसबच्चे को देश के प्रधानमंत्री के हाथ में देखकरउसकी मां को यकीन ही नहींहुआ।

दूसरा वाकया जुड़ाहै तमिलनाडु से, एक बार जब पंडित नेहरू तमिलनाडु के दौरे पर गए तब जिससड़क से वेगुजर रहे थे वहां लोग साइकलों पर खड़े होकर तो कहींदीवारों पर चढ़कर नेताजी कोनिहार रहे थे। प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिएहर आदमी इतना उत्सुक था कि जिसेजहां समझ आया वहां खड़े होकर नेहरू जी को निहारनेलगा। इस भीड़ भरेइलाके में नेहरूजी ने देखा कि दूर खड़ा एक गुब्बारेवाला पंजों के बल खड़ा डगमगा रहाथा, ऐसा लग रहा था कि उसके हाथों के तरह-तरह केरंग-बिरंगी गुब्बारे मानो पंडितजीको देखनेके लिए डोल रहे हों. जैसे वे कह रहे हों हम तुम्हारा तमिलनाडु में स्वागतकरते हैं। नेहरूजी की गाड़ी जब गुब्बारे वाले तक पहुंची तो गाड़ी सेउतरकर वे गुब्बारे खरीदने के लिए आगे बढ़े तो गुब्बारे वाला हक्का-बक्का-सा रह गया।नेहरूजी नेअपने तमिल जानने वाले सचिव से कहकर सारे गुब्बारेखरीदवाए और वहां उपस्थित सारेबच्चों को वे गुब्बारे बंटवा दिए। ऐसे प्यारे चाचानेहरू को बच्चों के प्रति बहुतलगाव था। नेहरू जी के मन में बच्चों के प्रति विशेषप्रेम और सहानुभूति देखकर लोगउन्हें चाचा नेहरू के नाम से संबोधित करने लगे औरजैसे-जैसे गुब्बारे बच्चों के हाथों तक पहुंचे बच्चों ने चाचा नेहरू-चाचा नेहरू कीतेज आवाज से वहां का वातावरणउल्लासित कर दिया. तभी से वे चाचा नेहरू के नाम सेप्रसिद्ध हो गए। भारत के भारत में इस तरह के महान मानव का जन्म बहुत कम ही हो रहाहै जो देश के युवाओं एव बच्चों की सोंच रखता है और इसके चहुमुखी विकास की बात करता हो।

लेखक-वरिष्ठ साहित्यकार एवं लाल कला मंच,नई दिल्ली के सचिव हैं।

LEAVE A REPLY