कोरोना के बाद जीवन नए सिरे से शुरू करना होगा

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neeraj tyagi

         जब से कोरोना वायरस महामारी का फैलाव दूसरे देशों की तरह भारत में बढ़ने लगा।जिसकी वजह से लोगों को घर में रहना पड़ा और लोगों के घर में रहने के कारण परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी कि हमारे देश में बहने वाली नदियां उनका पानी लगातार साफ होता चला गया।
         जीवन के इस बदलाव या इस पहलू में लोग कहने लगे कि जो काम काफी समय से नहीं हो पा रहा था। नदियों को साफ करने का.वह अपने आप होता चला गया।इसी प्रकार वातावरण में होने वाले प्रदूषण के कारण लगातार  हवा में जो जहर फैलता जा रहा था।वह भी प्रदूषण फैलाने वाले वाहन ना चलने की वजह से बहुत कम होता चला गया।
         लेकिन लोगों के जीवन में होने वाले इस बदलाव को सही कहना कितना सही है।इस बारे में विचार करना होगा।जीवन के इस पहलू को सब लोग अच्छा महसूस कर रहे हैं। लेकिन लगातार ऐसा महसूस हो रहा है कि पर्यावरण और नदिया तो साफ हो जाएंगी।लेकिन बहुत से लोगों का काम लगभग चौपट होने की अवस्था में आ जायेगा।
           छोटे कारोबारी हो या बड़े कारोबारी सभी लोग लगातार लॉक डाउन में बहुत परेशान है और कुछ व्यापारियों के तो काम ही बंद होने की कगार पर आ गए हैं।लगातार बड़े-बड़े शहरों से मजदूरों के पलायन के बाद छोटी-छोटी कंपनियां मजदूरों के अभाव में बंद होने की कगार पर आ जाएंगी।
          जीवन के इन बदलते पहलुओं का क्या कोई उपाय और नहीं हो सकता था।लॉक डाउन हालांकि बहुत ही जरूरी हो गया था और करना भी था लेकिन लगातार अपने घर में बैठकर कब तक काम चलेगा।कोई भी व्यक्ति आपको घर मे बैठे रहने की तनख्वाह कब तक दे देगा।
           पर्यावरण और नदिया तो साफ हो जाएंगी लेकिन इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही भयंकर होगा।कोरोना काल मे जीवन में सिर्फ एक ही अच्छी बात सीखी जा सकती है।कि अब हर व्यक्ति को अपने जीवन के नए रूप में जीने की आदत डालनी होगी।यह जो बदलाव आपके घर रहने से पर्यावरण और नदियों के पानी में आया है।कोशिश करनी होगी कि सब काम करते रहने के साथ साथ इन सबको साफ रखने का भी ध्यान रखना होगा।
            कोशिश करनी होगी कि सारी चीजों का ध्यान रखते हुए अब आगे जीवन तो जिया जाए और अपने कार्यों को भी आगे बढ़ाया जाए।जीवन के इस नए पहलू को एक पॉजिटिव में लेकर आगे बढ़ना होगा। जिससे देश का भी निरंतर विकास होता रहे और आम आदमी के जीवन मे भी कोई आजीविका की परेशानी ना आये।
नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश ).

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