कैसी होती दीवाली !

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कोई  तो  हमको  समझायेकैसी  होती दीवाली ।

तेल नदारददीया गायबफटी जेब हरदम खाली ।।

 

हँसी नहीं बच्चों के मुख परचले सदा माँ की खाँसी ।

बापू  की  आँखों के सपनेरोज  चढ़े शूली फाँसी ।।

अभी दशहरा आकर बीतासीता फिर भी लंका में ।

रावण अब भी मरा नहीं हैक्या है राघव डंका में ।।

गिरवी माता का कंगन हैबंधक  पत्नी की बाली ।

कोई  तो  हमको  समझायेकैसी  होती दीवाली ।।

तेल नदारददीया गायबफटी जेब हरदम खाली ।।

 

राशन  पर  सरकारें बनतींमत बिकते हैं हाटों में ।

संसद की हम बात करें क्याबँटा तन्त्र है भाटों में ।।

ईद गईबकरीद गई  अबतीन तलाक बना मुद्दा ।

सवा  अरब की आबादीपरलावारिस दादीदद्दा ।।

मिडिया का कुछ हाल न पूछोलगे हमें माँ की गाली।

कोई  तो  हमको  समझायेकैसी  होती दीवाली ।।

तेल नदारददीया गायबफटी जेब हरदम खाली ।।

 

अगर मान लो बात हमारीदिल को दीप बना डालो ।

सत्य धर्म ममता निष्ठा कोमीठा तेल बना डालो ।।

नाते – रिश्तों की बाती मेंस्वाभिमान पावक भर दो ।

जग  में  उजियारा फैलायेऐसी  दीवाली कर दो ।।

ऐसे  दीप जलायें मिलकरकहीं न हों रातें काली ।

कोई  तो  हमको  समझायेकैसी  होती दीवाली ।।

तेल नदारददीया गायबफटी जेब हरदम खाली ।।

 

अवधेश कुमार अवध

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