कलयुगी रामराज्य 

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रामराज्य की ढ़पली खूब बजाई
ढ़पली की आढ़ में
रावणता फैलाई |

खाकी हुई बेशर्म
सिक्कों में सितारे बेच रही
लुच्चे और लफंगों संग कर रही खोटे कर्म |

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
बस एक कोरा जुमला है
हकीकत में सारे गिद्ध मिलकर नोच खाओ |

कानून बनाये दिखाने को
कानून की धज्जियां उढ़ाते हैं नेता
घड़ियाली आंसू बहाते बेवकूफ बनाने को |

ऊपर से नीचे तक सब रंगे हुए हैं
चोर-कोतवाल सब मिले हुए हैं
कलयुगी रामराज्य में रावणों के चेहरे खिले हुए हैं |

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

 

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