कवि नरेश सक्सेना द्वारा साहित्य सभा का उद्घाटन 

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दिल्ली। ‘मातृभाषाओं में पढ़े-समझे बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। रटी हुई भाषा में रटे हुए विचार ही आएँगे, वहाँ मौलिक और नये विचार पैदा नहीं हो सकते।’ सुप्रसिद्ध हिंदी कवि नरेश सक्सेना ने उक्त विचार  हिन्दू कालेज की हिंदी साहित्य सभा का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए। सभा द्वारा आयोजित वेबिनार में लखनऊ से जुड़े कवि सक्सेना ने हिंदी की वर्तमान स्थिति के प्रति चिंता और दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी आज तक ज्ञान की भाषा नहीं बन पाई, साथ ही कोई भी भारतीय भाषा ज्ञान की भाषा नहीं बन सकी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते  हुए क्षोभ व्यक्त किया कि अंग्रेजी माध्यम ने हमारी बुद्धि को नष्ट कर दिया है। अपने व्याख्यान के दुसरे हिस्से में सक्सेना ने हिंदी कविता के पढ़ने-पढ़ाने की रूढ़ प्रविधियों से भिन्न नए ढंग से कविताओं को समझने की जरूरत बताई। उन्होंने बड़े कवियों के साहित्यिक भूगोल पर प्रभाव को बताते हुए कहा कि मुक्तिबोध के आने से पहले ज्यादातर स्थापित कवि उत्तर प्रदेश के थे परंतु मुक्तिबोध के प्रभाव से इस स्थिति में  बदलाव हुआ और  मध्यप्रदेश से श्रेष्ठ कवियों की लंबी शृंखला देखने को मिली। सक्सेना ने मुक्तिबोध के साथ अपने कुछ संस्मरणों को भी साझा किया। उन्होंने मुक्तिबोध की कविता में विज्ञान के विषयों जैसे क्वांटम भौतिकी आदि की उपस्थिति को बताया ,जो विद्यार्थियों के लिए नई जानकारी रही। उन्होंने मुक्तिबोध की कविता ‘कृष्ण विवर’ की चर्चा भी की जो ब्लैक हॉल पर लिखी गई थी। सक्सेना ने कुछ प्रसिद्ध कविताओं का सस्वर वाचन करके उन कविताओं में लय और ताल की उपस्थिति की चर्चा की। इसमें उन्होंने नागार्जुन की कविता ‘अकाल और उसके बाद’, शमशेर बहादुर सिंह की कविता ‘उषा’, विनोद कुमार शुक्ल की कविता ‘हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था’ में गीति तत्त्व की उपस्थिति और महत्त्व की नवोन्मेषी व्याख्या की। सक्सेना ने कहा कि संगीत के बिना कविता की कोई सार्थकता नहीं हो सकती है क्योंकि बिना संगीत के कविता स्मृति में जगह नहीं बना पाएगी। व्याख्यान के बाद  सक्सेना और विद्यार्थियों के बीच संवाद सत्र (सवाल-जवाब) हुआ ,जिसका संयोजन साहित्य सभा के संयोजक हर्ष उरमलिया ने किया ।

इससे पहले विभाग के  प्रभारी डॉ पल्लव ने शैक्षणिक सत्र 2020 21 के लिए गठित हिंदी साहित्य सभा की कार्यकारिणी की घोषणा की।  उन्होंने बताया कि सत्र 2020-2021 के लिए हिंदी साहित्य सभा का अध्यक्ष राहुल कसौधन, एम. ए. (उत्तरार्द्ध), संयोजक हर्ष उरमलिया, स्नातक (तृतीय वर्ष), महासचिव प्रखर दीक्षित, स्नातक (तृतीय वर्ष), सचिव –  श्रेयश श्रीवास्तव स्नातक (द्वितीय वर्ष) तथा कोषाध्यक्ष दिशा ग्रोवर  स्नातक (द्वितीय वर्ष) को बनाया गया है। विभाग की वरिष्ठ अध्यापिका डॉ रचना सिंह ने सक्सेना के व्याख्यान के महत्त्वपूर्ण पक्षों को रेखांकित किया। डॉ नौशाद अली ने लेखक परिचय दिया। आयोजन में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ अभय रंजन, डॉ हरींद्र कुमार और डॉ विमलेन्दु तीर्थंकर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। इनके साथ ही विभाग के पूर्व विद्यार्थी तथा अन्य साहित्य प्रेमी भी कवि नरेश सक्सेना की कविताओं का पाठ सुनने के लिए आयोजन में शामिल हुए। अंत में सभा के महासचिव प्रखर दीक्षित ने आभार व्यक्त किया। वेबिनार की समाप्ति अध्यापकों और विद्यार्थियों के विशेष आग्रह पर नरेश सक्सेना जी के माउथ ऑर्गन वादन के साथ हुई।

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