पल

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धुंआ-धुंआ सी
स्वर्णिम यादें बनें
गुजरे पल
बंद नयन
मन करें उजला
स्वर्णिम पल
रेत के जैसे
क्षण में फिसलते
सुंदर पल
अंतर्मन को
आलोकित करते
बिताए पल
रखो सहेज
बस मीठी सी यादें
अमूल्य पल
नव चेतना
सदा ही भरते
प्यारे से पल
भर लो तुम
अपने अंतर में
सुखद पल
बांटो सभी से
सिर्फ तुम अपने
सुहाने पल
✍🏻नाम-दीपासंजय*दीप*

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